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युवा अधिवक्ताओ को भी आर्थिक मदद दे सरकार: बार कौंसिल
Tue, 24 Mar 2020 09:55 AM IST
अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Prayagraj
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Published by: अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Tue, 24 Mar 2020 09:55 AM IST
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- फोटो : AMAR UJALA
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प्रदेश बार कौंसिल ने करोना संक्रमण से बचाव के मद्देनजर जिला अदालतों में की गई बंदी और लॉक डाउन की स्थिति में युवा अधिवक्ताओं को भी 5 हज़ार रुपए भत्ता दिए जाने की मांग की है।
कौंसिल का कहना है कि जिस तरह से सरकार दैनिक मजदूरों और अन्य प्राइवेट कर्मचारियों के लिए सहूलियत दे रही है उसी तरीके से 5 वर्ष तक की प्रैक्टिस वाले अधिवक्ताओं को भी कुछ आर्थिक मदद देना जरूरी है।
काउंसिल के चेयरमैन हरिशंकर सिंह का कहना है कि जिला अदालतों के बंद होने और लॉक डाउन के चलते युवा अधिवक्ताओं के पास रोजी रोटी का कोई जरिया नहीं बचा है। यह अधिवक्ता न्यायालय खुला रहने पर प्रतिदिन कुछ ना कुछ आमदनी करके अपना खर्चा चलाते हैं। वह आमदनी पूरी तरीके से ठप हो गई है जिससे अधिवक्ताओं के सामने घोर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है ऐसी स्थिति में सरकार को युवा अधिवक्ताओं को भी मदद देनी चाहिए जैसे कि सरकार अन्य लोगों को मदद दे रही है।
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हरिशंकर शंकर सिंह का कहना है कि युवा अधिवक्ताओं को स्टाइपेंड देने की मांग पुरानी है। सरकार इसे स्वीकार भी कर चुकी हैं मगर इसके लिए धन आवंटित नहीं किया जा रहा है ।जिसकी वजह से अधिवक्ताओं को कोई सहायता नहीं मिल पा रही है यदि स्टाइपेंड मिल रहा होता तो संकट की घड़ी में उनकी कुछ मदद हो सकती थी।
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कौंसिल का कहना है कि जिस तरह से सरकार दैनिक मजदूरों और अन्य प्राइवेट कर्मचारियों के लिए सहूलियत दे रही है उसी तरीके से 5 वर्ष तक की प्रैक्टिस वाले अधिवक्ताओं को भी कुछ आर्थिक मदद देना जरूरी है।
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काउंसिल के चेयरमैन हरिशंकर सिंह का कहना है कि जिला अदालतों के बंद होने और लॉक डाउन के चलते युवा अधिवक्ताओं के पास रोजी रोटी का कोई जरिया नहीं बचा है। यह अधिवक्ता न्यायालय खुला रहने पर प्रतिदिन कुछ ना कुछ आमदनी करके अपना खर्चा चलाते हैं। वह आमदनी पूरी तरीके से ठप हो गई है जिससे अधिवक्ताओं के सामने घोर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है ऐसी स्थिति में सरकार को युवा अधिवक्ताओं को भी मदद देनी चाहिए जैसे कि सरकार अन्य लोगों को मदद दे रही है।
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हरिशंकर शंकर सिंह का कहना है कि युवा अधिवक्ताओं को स्टाइपेंड देने की मांग पुरानी है। सरकार इसे स्वीकार भी कर चुकी हैं मगर इसके लिए धन आवंटित नहीं किया जा रहा है ।जिसकी वजह से अधिवक्ताओं को कोई सहायता नहीं मिल पा रही है यदि स्टाइपेंड मिल रहा होता तो संकट की घड़ी में उनकी कुछ मदद हो सकती थी।