{"_id":"5dd6dcac8ebc3e54c64ea01f","slug":"allahabad-highcourtr-order-to-pay-25-lakh-compensation-in-death-case-due-to-dengue-disease-allahabad-news-ald2608241139","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"डेंगू से मौत होने पर हाईकोर्ट ने माना डॉक्टरों की लापरवाही, 25 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डेंगू से मौत होने पर हाईकोर्ट ने माना डॉक्टरों की लापरवाही, 25 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश
Fri, 22 Nov 2019 12:21 AM IST
इलाहाबाद ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 22 Nov 2019 12:21 AM IST
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डेंगू से युवा अधिवक्ता की मौत के मामले में 25 लाख रुपये मुआवजा पीड़ित परिवार को देने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि डेंगू की रोकथाम और बचाव के लिए सभी जरूरी उपाय किए जाएं।
कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल में डायलिसिस यूनिट के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध कराया जाए। यह भी कहा है कि डेंगू से बचाव के लिए स्थापित विशेष जांच केंद्रों और ब्लड सेपरेशन यूनिट को पूरी तरीके से क्त्रिस्याशील रखा जाए ताकि, डेंगू के मरीजों को इलाज में किसी प्रकार की परेशानी ना होने पाए।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता बीपी मिश्रा की जनहित याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल और न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने दिया है। अधिवक्ता बीपी मिश्रा के युवा पुत्र जो खुद भी वकील थे कि 2016 में डेंगू से मौत हो गई थी। उन्होंने इलाज में लापरवाही बरतने की शिकायत करते हुए मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था। इस पत्र को अदालत ने जनहित याचिका के तौर पर स्वीकार करते हुए सुनवाई शुरू की। कोर्ट का कहना था की युवक की मौत डॉक्टरों द्वारा बीमारी का सही कारण पता न लगा पाने के चलते हुई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल में डायलिसिस यूनिट के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध कराया जाए। यह भी कहा है कि डेंगू से बचाव के लिए स्थापित विशेष जांच केंद्रों और ब्लड सेपरेशन यूनिट को पूरी तरीके से क्त्रिस्याशील रखा जाए ताकि, डेंगू के मरीजों को इलाज में किसी प्रकार की परेशानी ना होने पाए।
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता बीपी मिश्रा की जनहित याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल और न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने दिया है। अधिवक्ता बीपी मिश्रा के युवा पुत्र जो खुद भी वकील थे कि 2016 में डेंगू से मौत हो गई थी। उन्होंने इलाज में लापरवाही बरतने की शिकायत करते हुए मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था। इस पत्र को अदालत ने जनहित याचिका के तौर पर स्वीकार करते हुए सुनवाई शुरू की। कोर्ट का कहना था की युवक की मौत डॉक्टरों द्वारा बीमारी का सही कारण पता न लगा पाने के चलते हुई है।
विज्ञापन
Trending Videos
डॉक्टर यह नहीं जान पाए कि उसे डेंगू है और उसे ऐसी एंटीबायोटिक दवाएं दी गईं, जो डेंगू के मरीज के लिए घातक होती हैं। डॉक्टरों द्वारा एंटीबायोटिक दिए जाने के कारण मरीज की स्थिति खराब हो गई और उसे बचाया नहीं जा सका। कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा था।
राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि वेक्टर बांड डिजीज की रोकथाम के लिए तमाम उपाय किए गए हैं।
प्रदेश भर में 37 सेंटेनियल सर्विलांस हॉस्पिटल स्थापित किए गए हैं, जहां डेंगू, चिकनगुनिया जैसी वेक्टर बांड डिजीज की जांच की जाती है। इसके अलावा 32 से अधिक ब्लड सेपरेशन यूनिट्स लगाई गई हैं जहां प्लेटलेट्स तैयार किए जाते हैं। कोर्ट ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह डेंगू चिकनगुनिया जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए तैयार की गई कार्ययोजना की स्वयं मॉनीटरिंग करेंगे तथा जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी इन योजनाओं को लागू कराएंगे। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाए और कार्रवाई की जाए।
राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि वेक्टर बांड डिजीज की रोकथाम के लिए तमाम उपाय किए गए हैं।
प्रदेश भर में 37 सेंटेनियल सर्विलांस हॉस्पिटल स्थापित किए गए हैं, जहां डेंगू, चिकनगुनिया जैसी वेक्टर बांड डिजीज की जांच की जाती है। इसके अलावा 32 से अधिक ब्लड सेपरेशन यूनिट्स लगाई गई हैं जहां प्लेटलेट्स तैयार किए जाते हैं। कोर्ट ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह डेंगू चिकनगुनिया जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए तैयार की गई कार्ययोजना की स्वयं मॉनीटरिंग करेंगे तथा जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी इन योजनाओं को लागू कराएंगे। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाए और कार्रवाई की जाए।