{"_id":"51bc9bac489d109c2a7abde296f6f8c1","slug":"acting-vc-selection-committee-may-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कार्यवाहक कुलपति कर सकते हैं चयन समिति की बैठक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कार्यवाहक कुलपति कर सकते हैं चयन समिति की बैठक
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Sat, 18 Apr 2015 11:59 PM IST
विज्ञापन
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर्स की प्रोन्नति हेतु चयन समिति की बैठक बुलाने का रास्ता साफ हो गया है। हाईकोर्ट ने कार्यवाहक कुलपति के अधिकारों को स्पष्ट करते हुए कहा है कि कुलपति की गैरहाजिरी में कार्यवाहक कुलपति को चयन समिति की बैठक बुलाने और प्रोन्नति पर निर्णय लेने का अधिकार है। संस्कृत विभाग की डॉ. सुचित्रा मित्रा और अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता और न्यायमूर्ति वीके मिश्रा की खंडपीठ ने याचिका स्वीकार करते हुए कार्यवाहक कुलपति को चयन समिति की बैठक बुलाने का निर्देश दिया है ताकि प्रोन्नति के लंबित प्रकरण पर निर्णय लिया जा सके।
याचिका में कहा गया कि याची संस्कृत विभाग में सहायक प्रोफेसर है। यूजीसी की कैरियर एचीवमेंट स्कीम के तहत उनका प्रमोशन होना है मगर वर्तमान में नियमित कुलपति नहीं होने के कारण चयन समिति की बैठक नहीं हो पा रही है जिससे याची के प्रोन्नति में विलंब हो रहा है। मांग की गई कि कार्यवाहक कुलपति को चयन समिति की बैठक बुलाने का निर्देश दिया जाए।
विश्वविद्यालय के अधिवक्ता का कहना था कि कुलपति और प्रति कुलपति दोनोें के नहीं होने के कारण वरिष्ठतम प्रोफेसर को कार्यवाहक कुलपति का बनाया गया है इस वजह से बैठक नहीं बुलाई जा रही है। खंडपीठ ने कहा कि विश्वविद्यालय की नियमावली के तहत कुलपति प्रधान कार्यकारी अधिकारी होता है। उसकी गैरमौजूदगी में उसके सभी काम प्रतिकुलपति करता है। दोनों के नहीं होने की स्थिति में कार्यवाहक कुलपति को उन सभी कार्यों को करने का अधिकार है जो नियमित कुलपति को है। पीठ ने चयन समिति की बैठक बुलाने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
याचिका में कहा गया कि याची संस्कृत विभाग में सहायक प्रोफेसर है। यूजीसी की कैरियर एचीवमेंट स्कीम के तहत उनका प्रमोशन होना है मगर वर्तमान में नियमित कुलपति नहीं होने के कारण चयन समिति की बैठक नहीं हो पा रही है जिससे याची के प्रोन्नति में विलंब हो रहा है। मांग की गई कि कार्यवाहक कुलपति को चयन समिति की बैठक बुलाने का निर्देश दिया जाए।
विज्ञापन
विश्वविद्यालय के अधिवक्ता का कहना था कि कुलपति और प्रति कुलपति दोनोें के नहीं होने के कारण वरिष्ठतम प्रोफेसर को कार्यवाहक कुलपति का बनाया गया है इस वजह से बैठक नहीं बुलाई जा रही है। खंडपीठ ने कहा कि विश्वविद्यालय की नियमावली के तहत कुलपति प्रधान कार्यकारी अधिकारी होता है। उसकी गैरमौजूदगी में उसके सभी काम प्रतिकुलपति करता है। दोनों के नहीं होने की स्थिति में कार्यवाहक कुलपति को उन सभी कार्यों को करने का अधिकार है जो नियमित कुलपति को है। पीठ ने चयन समिति की बैठक बुलाने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन