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क्षेत्र पंचायत सदस्य की गोली मार हत्या, चेहरा भी जलाया
Allahabad
Updated Tue, 08 Apr 2014 05:30 AM IST
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मेजा/कोरांव (इलाहाबाद)। कोरांव के निश्चिंतपुर गांव के क्षेत्र पंचायत सदस्य रामकृष्ण यादव की सोमवार सुबह बोंगी पहाड़ी के निकट गोली मारकर हत्या कर दी गई। उस वक्त वह घर से शहर के लिए निकले थे। सिर पर गोली मारने के बाद कातिलों ने चेहरा और सारे कागजात भी जला दिए। आरोप है कि बरसों तक हाईकोर्ट में चले जमीन के मुकदमे में कुछ ही दिन पहले उनके पक्ष में फैसला आने के बाद से विरोधी भन्नाए थे। पुलिस ने पिता-पुत्रों समेत पांच लोगों पर नामजद केस लिखा है।
शिवनारायण यादव के सात बेटों में सबसे बड़े रामकृष्ण यादव उर्फ मुलायम (50) खेती करते थे। उनके परिवार में पत्नी संगीता, तीन बेटे और एक बेटी है। रामकृष्ण का पड़ोस में रहने वाले ब्रह्मदीन यादव से पिछले 35 साल से जमीन के विवाद में हाईकोर्ट में मुकदमा चल रहा था। दरअसल, ब्रह्मदीन मूल रूप से मिर्जापुर जनपद के हैं। निश्चिंतपुर में उनकी ननिहाल है। ब्रह्मदीन का दावा है कि उनकी मां इकलौती संतान थीं, इसलिए नाना रामजनम ने अपनी पूरी संपत्ति उन्हें सौंप दी थी। वर्ष 1976 से ही वह मां के साथ निश्चिंतपुर गांव आकर रहने लगे थे। मगर पट्टीदारी के रामकृष्ण और उनके भाइयों ने उन्हें जमीन पर यह कहकर काबिज नहीं होने दिया कि मृत्यु से पहले रामजनम ने उनके पक्ष में वसीयत की थी। उन दोनों के बीच हाईकोर्ट में मुकदमा चल रहा था।
आरोप है कि कुछ दिन पहले हाईकोर्ट से रामकृष्ण के पक्ष में फैसला होने पर ब्रह्मदीन बौखला गया था। सोमवार सुबह करीब आठ बजे रामकृष्ण घर से जमीन और अदालत के फैसले की प्रतिलिपि लेकर शहर के लिए निकला था। उन्हें साइकिल से मुख्य मार्ग स्थित चौराहे तक जाकर बस में बैठना था। मगर करीब नौ बजे कुछ लोगों ने बोंगी पहाड़ी के निकट उनकी लाश देखी। हल्ला मचा तो वहां भीड़ लग गई। रामकृष्ण के सिर पर घाव था। चेहरा भी झुलसा था। पास में ही कागजात जले पड़े थे। खबर पाकर कोरांव और मेजा पुलिस के साथ सीओ जेपी यादव पहुंच गए। पुलिस का अनुमान है कि रामकृष्ण की गोली मारकर हत्या के बाद कागजात जलाए गए थे। रामकृष्ण के परिवार के लोग भी वहां पहुंच गए। पत्नी और बेटे-बेटियां चीख-चीखकर आरोप लगा रहे थे कि ब्रह्मदीन ने ही कोर्ट में मुकदमा हारने पर यह हत्या की है। रामकृष्ण के बेटे ज्ञान सिंह यादव की अर्जी पर पुलिस ने ब्रह्मदीन, उसके बेटों लक्ष्मण, कुंवर, अनिरुद्ध यादव तथा मिर्जापुर में दीवान पट्टी गांव में रहने वाले दामाद जवाहर लाल के खिलाफ हत्या तथा सबूत मिटाने की कोशिश की एफआईआईर लिखी है। सोमवार सुबह घटना के बाद से ही सभी आरोपी फरार हैं।
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शिवनारायण यादव के सात बेटों में सबसे बड़े रामकृष्ण यादव उर्फ मुलायम (50) खेती करते थे। उनके परिवार में पत्नी संगीता, तीन बेटे और एक बेटी है। रामकृष्ण का पड़ोस में रहने वाले ब्रह्मदीन यादव से पिछले 35 साल से जमीन के विवाद में हाईकोर्ट में मुकदमा चल रहा था। दरअसल, ब्रह्मदीन मूल रूप से मिर्जापुर जनपद के हैं। निश्चिंतपुर में उनकी ननिहाल है। ब्रह्मदीन का दावा है कि उनकी मां इकलौती संतान थीं, इसलिए नाना रामजनम ने अपनी पूरी संपत्ति उन्हें सौंप दी थी। वर्ष 1976 से ही वह मां के साथ निश्चिंतपुर गांव आकर रहने लगे थे। मगर पट्टीदारी के रामकृष्ण और उनके भाइयों ने उन्हें जमीन पर यह कहकर काबिज नहीं होने दिया कि मृत्यु से पहले रामजनम ने उनके पक्ष में वसीयत की थी। उन दोनों के बीच हाईकोर्ट में मुकदमा चल रहा था।
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आरोप है कि कुछ दिन पहले हाईकोर्ट से रामकृष्ण के पक्ष में फैसला होने पर ब्रह्मदीन बौखला गया था। सोमवार सुबह करीब आठ बजे रामकृष्ण घर से जमीन और अदालत के फैसले की प्रतिलिपि लेकर शहर के लिए निकला था। उन्हें साइकिल से मुख्य मार्ग स्थित चौराहे तक जाकर बस में बैठना था। मगर करीब नौ बजे कुछ लोगों ने बोंगी पहाड़ी के निकट उनकी लाश देखी। हल्ला मचा तो वहां भीड़ लग गई। रामकृष्ण के सिर पर घाव था। चेहरा भी झुलसा था। पास में ही कागजात जले पड़े थे। खबर पाकर कोरांव और मेजा पुलिस के साथ सीओ जेपी यादव पहुंच गए। पुलिस का अनुमान है कि रामकृष्ण की गोली मारकर हत्या के बाद कागजात जलाए गए थे। रामकृष्ण के परिवार के लोग भी वहां पहुंच गए। पत्नी और बेटे-बेटियां चीख-चीखकर आरोप लगा रहे थे कि ब्रह्मदीन ने ही कोर्ट में मुकदमा हारने पर यह हत्या की है। रामकृष्ण के बेटे ज्ञान सिंह यादव की अर्जी पर पुलिस ने ब्रह्मदीन, उसके बेटों लक्ष्मण, कुंवर, अनिरुद्ध यादव तथा मिर्जापुर में दीवान पट्टी गांव में रहने वाले दामाद जवाहर लाल के खिलाफ हत्या तथा सबूत मिटाने की कोशिश की एफआईआईर लिखी है। सोमवार सुबह घटना के बाद से ही सभी आरोपी फरार हैं।
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