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विश्वविद्यालय पर खुफिया नजर
Allahabad
Updated Wed, 27 Feb 2013 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। निष्कासित छात्र नेताओं की आत्मदाह की धमकी तथा मारपीट की घटनाओं के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिसर पर खुफिया नजर भी बढ़ा दी गई है। कुलपति कार्यालय में मारपीट तथा तोड़फोड़ के मामले में निष्कासित छात्र नेता अविनाश दुबे और अजीत यादव ने मंगलवार को आत्मदाह करने की घोषणा की थी। वे निष्कासन वापस लेने की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं। इसके मद्देनजर परिसर में जगह-जगह फोर्स तो तैनात रही ही साधे ड्रेस में भी पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई है।
हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से उनकी मांग पर विचार किए जाने का आश्वासन दिए जाने के बाद दोनों छात्र नेताओं ने फिलहाल तो इस तरह की कोई कोशिश नहीं की लेकिन उन्होंने इसके लिए 72 घंटे का समय दिया है। छात्रसंघ भवन से जुलूस की शक्ल में कलेक्ट्रेट पहुंचे छात्रों ने ज्ञापन भी सौंपा। अविनाश का कहना था कि पांच मार्च से परीक्षाएं शुरू होनी है। ऐसे में 72 घटें में निष्कासन वापस नहीं हुआ तो व आत्मदाह जैसा कठोर कदम उठाने को मजबूर होंगे। इस मामले में चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर माता अंबर तिवारी का कहना है कि पुलिस को पूरी जानकारी दे दी गई है। पुलिस प्रशासन नजर रखे हुए है।
सहायक अभियोजन अधिकारी (एपीओ) की भर्ती रद्द करने के विरोध में प्रतियोगियों ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग कार्यालय पर प्रदर्शन किया। उन्होंने मांग का ज्ञापन भी सौंपा। प्रतियोगियों का कहना था कि इस पद पर वैसे ही नियमित भर्ती नहीं होती। ऐसे में परीक्षा कार्यक्रम घोषित होने के बावजूद भर्ती वापस लिया जाना प्रतियोगियों के साथ अन्याय तथा उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
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हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से उनकी मांग पर विचार किए जाने का आश्वासन दिए जाने के बाद दोनों छात्र नेताओं ने फिलहाल तो इस तरह की कोई कोशिश नहीं की लेकिन उन्होंने इसके लिए 72 घंटे का समय दिया है। छात्रसंघ भवन से जुलूस की शक्ल में कलेक्ट्रेट पहुंचे छात्रों ने ज्ञापन भी सौंपा। अविनाश का कहना था कि पांच मार्च से परीक्षाएं शुरू होनी है। ऐसे में 72 घटें में निष्कासन वापस नहीं हुआ तो व आत्मदाह जैसा कठोर कदम उठाने को मजबूर होंगे। इस मामले में चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर माता अंबर तिवारी का कहना है कि पुलिस को पूरी जानकारी दे दी गई है। पुलिस प्रशासन नजर रखे हुए है।
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सहायक अभियोजन अधिकारी (एपीओ) की भर्ती रद्द करने के विरोध में प्रतियोगियों ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग कार्यालय पर प्रदर्शन किया। उन्होंने मांग का ज्ञापन भी सौंपा। प्रतियोगियों का कहना था कि इस पद पर वैसे ही नियमित भर्ती नहीं होती। ऐसे में परीक्षा कार्यक्रम घोषित होने के बावजूद भर्ती वापस लिया जाना प्रतियोगियों के साथ अन्याय तथा उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
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