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Prayagraj News: अत्यधिक बारिश से 81 गांवों में 18 फीसदी फसल प्रभावित
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जिले में अत्यधिक बारिश से 81 गांवों के किसानों की 18 फीसदी फसल प्रभावित हुई है। सबसे अधिक प्रभाव खेती के उन क्षेत्रों में हुआ जहां जलभराव की समस्या है। उप निदेशक कृषि पवन कुमार विश्वकर्मा कहते हैं कि सबसे अधिक सब्जियों के पैदावार पर 15 फीसदी पर असर पड़ा है। इसके साथ ही पानी में डूबे रहने से करीब तीन फीसदी धान की फसल भी प्रभावित हुई है। जनपद में इसका सर्वे और आकलन कराया जा रहा है।
बारिश से जिन किसानों की फसल का नुकसान हुआ है और उन्होंने अब तक फसल का बीमा नहीं कराया है। वह 31 अगस्त तक बीमा अवश्य करा लें। इसके लिए विशेष अभियान चलाकर किसानों को जागरूक किया जा रहा है।
नियमानुसार, अत्यधिक बारिश या बाढ़ से फसल में 33 प्रतिशत या उससे अधिक का नुकसान होने पर ही किसान मुआवजे के हकदार होते हैं। मौसम विभाग के अनुसार, जिले में जून से अगस्त तक सामान्य तौर पर 503 मिमी वर्षा होती है लेकिन इस वर्ष इसी अवधि में 619.7 मिमी बारिश हुई। यह सामान्य बारिश से 123 फीसदी अधिक है।
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72 घंटे में दें नुकसान की सूचना
बारिश या जलभराव के बाद किसानों को 72 घंटे में नुकसान की जानकारी बीमा कंपनी या कृषि विभाग को देनी होती है। इसके लिए टोल फ्री नंबर 14447 या फसल बीमा एप का उपयोग किया जा सकता है। खेत में जलभराव होने की स्थिति में व्यक्तिगत स्तर पर क्षति का मूल्यांकन करके दावा मंजूर किया जाता है। नुकसान के बाद जिला प्रशासन को अलर्ट किया जाता है। लेखपाल, कृषि विभाग और बीमा कंपनी के प्रतिनिधि संयुक्त रूप से प्रभावित खेतों का दौरा करके क्षति का जायजा लेते हैं।
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बारिश से जिन किसानों की फसल का नुकसान हुआ है और उन्होंने अब तक फसल का बीमा नहीं कराया है। वह 31 अगस्त तक बीमा अवश्य करा लें। इसके लिए विशेष अभियान चलाकर किसानों को जागरूक किया जा रहा है।
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नियमानुसार, अत्यधिक बारिश या बाढ़ से फसल में 33 प्रतिशत या उससे अधिक का नुकसान होने पर ही किसान मुआवजे के हकदार होते हैं। मौसम विभाग के अनुसार, जिले में जून से अगस्त तक सामान्य तौर पर 503 मिमी वर्षा होती है लेकिन इस वर्ष इसी अवधि में 619.7 मिमी बारिश हुई। यह सामान्य बारिश से 123 फीसदी अधिक है।
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बारिश या जलभराव के बाद किसानों को 72 घंटे में नुकसान की जानकारी बीमा कंपनी या कृषि विभाग को देनी होती है। इसके लिए टोल फ्री नंबर 14447 या फसल बीमा एप का उपयोग किया जा सकता है। खेत में जलभराव होने की स्थिति में व्यक्तिगत स्तर पर क्षति का मूल्यांकन करके दावा मंजूर किया जाता है। नुकसान के बाद जिला प्रशासन को अलर्ट किया जाता है। लेखपाल, कृषि विभाग और बीमा कंपनी के प्रतिनिधि संयुक्त रूप से प्रभावित खेतों का दौरा करके क्षति का जायजा लेते हैं।