वंदे भारत: सुविधाएं आधुनिक, मनोरंजन के नाम पर पुराने जमाने के गाने, हिंदी फिल्मों के लिए सिर्फ दो विकल्प
वंदे भारत में स्क्रीन पर चल रहा सिनेमा अब भी ब्लैक एंड व्हाइट दौर की याद दिला रहा है। एक तरफ जहां देश की जेन जी नई फिल्मों, ट्रेडिंग रील्स और ट्रेंडिंग गानों पर थिरक रही है, वहीं वंदे भारत का एंटरटेनमेंट सिस्टम उन्हें 70 और 80 के दशक के दौर में ले जा रहा है।
विस्तार
बुलेट की रफ्तार, वर्ल्ड क्लास सुविधाएं और शीशे जैसी चमक। वंदे भारत नई रफ्तार और आधुनिक सुविधाओं के साथ देश में रेल यात्रा की तस्वीर बदल रही है, लेकिन इसके मनोरंजन संसार में यात्रियों को पुराने दौर की फिल्मों और गीतों से रूबरू होना पड़ रहा है।
जेन जी के दौर में जब नई पीढ़ी नए गीत, फिल्में और मनोरंजन की ताजा सामग्री पसंद करती है, ऐसे में वंदे भारत में 70 और 80 के दशक के गीतों की मौजूदगी चर्चा का विषय बन रही है। सूची में महज दो विकल्प दिखाई देते हैं। इनमें से एक नाम गोरखपुर के सांसद से जुड़ा है। नई पीढ़ी के यात्रियों का कहना है कि जब ट्रेन की रफ्तार और सुविधाएं आधुनिक हैं तो मनोरंजन की पसंद भी थोड़ी आधुनिक क्यों नहीं ?
यह सुझाव अच्छा है। आज की पीढ़ी के लिए विकल्प बढ़ाने की जरूरत है। वंदे भारत ट्रेन में जेन जी की पसंद के गाने व मनोरंजन का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा। - डाॅ. शिवम शर्मा, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, उत्तर मध्य रेलवे
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ब्लैक एंड व्हाइट दौर की याद दिला रहा सिनेमा
वंदे भारत में स्क्रीन पर चल रहा सिनेमा अब भी ब्लैक एंड व्हाइट दौर की याद दिला रहा है। एक तरफ जहां देश की जेन जी नई फिल्मों, ट्रेडिंग रील्स और ट्रेंडिंग गानों पर थिरक रही है, वहीं वंदे भारत का एंटरटेनमेंट सिस्टम उन्हें 70 और 80 के दशक के दौर में ले जा रहा है। ट्रेन के ऑन बोर्ड एंटरटेनमेंट सिस्टम में बालिका वधू , बरसात की एक रात, बहू की आवाज, बालमा, बारूद, वास्तव जैसी पुरानी क्लासिक फिल्मों का दबदबा है।
हद तो यह है कि यात्रियों 2005 की भोजपुरी फिल्म दूल्हा मिलल दिलदार भी माैजूद हैं, जिसमें गोरखपुर से मौजूदा लोकसभा सांसद रवि किशन मुख्य भूमिका में हैं। यात्रियों का कहना है कि पुरानी फिल्मों का अपना एक अलग नशा है, लेकिन आधुनिक ट्रेन में जेन जी के लिए नई फिल्मों, नए गीतों, संगीत, खेल और ज्ञानवर्धक कार्यक्रमों को भी पर्याप्त स्थान मिलना चाहिए।
बोले यात्री
वंदे भारत में पुराने नगमों का सफर सुकून भरा हो सकता है, पर हमारी पीढ़ी तो ट्रेंडिंग म्यूजिक और लेटेस्ट कंटेंट की दीवानी है। क्लासिक गानों के साथ-साथ अगर आज के दौर के हिट ट्रैक और ब्लॉकबस्टर फिल्में भी जुड़ जाएं, तो सफर का मजा दोगुना हो जाएगा। - प्रियंका अग्रवाल
ओल्ड इज गोल्ड पुराने गानों की अपनी एक अलग ही फैन फॉलोइंग है और उन्हें हटाना सही नहीं होगा। लेकिन हर उम्र के यात्री का ख्याल रखते हुए लिस्ट में थोड़ी विविधता लाई जानी चाहिए। नए गानों, स्पोर्ट्स और इंफॉर्मेटिव शो से एंटरटेनमेंट का बैलेंस एकदम परफेक्ट हो जाएगा। - राहुल गुप्ता
वंदे भारत अपनी स्पीड और लग्जरी के लिए जानी जाती है, तो फिर इसका स्क्रीन मीडिया पीछे क्यों रहे? पुराने दौर की फिल्मों को सम्मान देते हुए इसमें नई पीढ़ी की पसंद को भी शामिल किया जाए। इससे मनोरंजन के बेहतरीन विकल्प तैयार हो जाएंगे। - प्रियांशु शर्मा
वंदे भारत में पुराने गीत सुनना भी अच्छा अनुभव हो सकता है, लेकिन जेन जी की पसंद को भी ध्यान में रखना चाहिए। नई पीढ़ी नए गाने, फिल्में और संगीत सुनना पसंद करती है। इसलिए पुराने गीतों के साथ नए दौर की सामग्री भी मनोरंजन में शामिल होनी चाहिए। - दुर्गेश उपाध्याय