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Aligarh News: स्वयं सेवकों की कदमताल ने पेश की अनुशासन की मिसाल
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पथ संचलन निकालते स्वयंसेवक।
- फोटो : samvad
विजयदशमी पर मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों ने महानगर में 36 स्थानों से पथ संचलन निकाले। पूर्ण गणवेश में घोष की धुन पर कदमताल करते हुए आगे बढ़े स्वयंसेवकों ने अनुशासन की झलक दिखाई। स्वयंसेवकों का जगह-जगह स्वागत किया गया।
कई मार्गों पर पुष्पवर्षा हुई तो नौरंगाबाद में आरती उतारी गई। पथ संचलन की तैयारियां करीब एक महीने से चल रही थीं। मंगलवार सुबह लगभग 7:30 बजे अधिकांश स्थानों से संचलन शुरू हुए। शहर की गलियों से लेकर प्रमुख चौराहों तक स्वयंसेवक घोष की धुन के साथ कदमताल करते नजर आए। मार्गों पर बनाए गए तोरणद्वारों पर लोगों ने उनका स्वागत किया। नौरंगाबाद में माताओं ने स्वागत गीत गाए और स्वयंसेवकों पर फूल बरसाए। पूरे आयोजन में शताब्दी वर्ष को लेकर उत्साह दिखाई दिया।
शाखाओं को नियमित करने पर जोर
विभाग प्रचारक गोविंद ने कहा कि संघ के स्वयंसेवक भारत माता की सेवा में निरंतर जुटे रहते हैं। शताब्दी वर्ष के बाद भी यह कार्य जारी रहेगा। उन्होंने शाखाओं को नियमित करने और प्रत्येक परिवार से स्वयंसेवक तैयार करने का लक्ष्य रखने की बात कही। विभाग कार्यवाह योगेश आर्य ने कहा कि संघ की स्थापना 1925 में विजयादशमी के दिन हुई थी। तब से संगठन व्यक्ति निर्माण के साथ राष्ट्र निर्माण के कार्य में जुटा है।
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गोंडा मार्ग स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में विभाग प्रचार प्रमुख भूपेंद्र शर्मा ने संघ को देशभक्ति की पाठशाला बताते हुए कहा कि यहां बालकों में देशभक्ति के संस्कार विकसित करने पर जोर दिया जाता है। इस दौरान धीरज सिंह, रतन कुमार मित्र, राजनारायण सिंह, डॉ. सुनील चौहान, महानगर प्रचारक रामजी, प्रमोद भारद्वाज, आनंद कुमार, दयाल शर्मा, हिमांशु शर्मा, ललित कुमार आदि ने विचार रखे। घोष की धुनों की व्यवस्था प्रीतम सिंह, रोहित केला, दिनेश आचार्य, प्रणव उपाध्याय, दक्ष शर्मा और उमाशंकर सहित अन्य ने संभाली।
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कई मार्गों पर पुष्पवर्षा हुई तो नौरंगाबाद में आरती उतारी गई। पथ संचलन की तैयारियां करीब एक महीने से चल रही थीं। मंगलवार सुबह लगभग 7:30 बजे अधिकांश स्थानों से संचलन शुरू हुए। शहर की गलियों से लेकर प्रमुख चौराहों तक स्वयंसेवक घोष की धुन के साथ कदमताल करते नजर आए। मार्गों पर बनाए गए तोरणद्वारों पर लोगों ने उनका स्वागत किया। नौरंगाबाद में माताओं ने स्वागत गीत गाए और स्वयंसेवकों पर फूल बरसाए। पूरे आयोजन में शताब्दी वर्ष को लेकर उत्साह दिखाई दिया।
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शाखाओं को नियमित करने पर जोर
विभाग प्रचारक गोविंद ने कहा कि संघ के स्वयंसेवक भारत माता की सेवा में निरंतर जुटे रहते हैं। शताब्दी वर्ष के बाद भी यह कार्य जारी रहेगा। उन्होंने शाखाओं को नियमित करने और प्रत्येक परिवार से स्वयंसेवक तैयार करने का लक्ष्य रखने की बात कही। विभाग कार्यवाह योगेश आर्य ने कहा कि संघ की स्थापना 1925 में विजयादशमी के दिन हुई थी। तब से संगठन व्यक्ति निर्माण के साथ राष्ट्र निर्माण के कार्य में जुटा है।
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गोंडा मार्ग स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में विभाग प्रचार प्रमुख भूपेंद्र शर्मा ने संघ को देशभक्ति की पाठशाला बताते हुए कहा कि यहां बालकों में देशभक्ति के संस्कार विकसित करने पर जोर दिया जाता है। इस दौरान धीरज सिंह, रतन कुमार मित्र, राजनारायण सिंह, डॉ. सुनील चौहान, महानगर प्रचारक रामजी, प्रमोद भारद्वाज, आनंद कुमार, दयाल शर्मा, हिमांशु शर्मा, ललित कुमार आदि ने विचार रखे। घोष की धुनों की व्यवस्था प्रीतम सिंह, रोहित केला, दिनेश आचार्य, प्रणव उपाध्याय, दक्ष शर्मा और उमाशंकर सहित अन्य ने संभाली।