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आत्महत्या : खादी ग्रामोद्योग से सब्सिडी मिली न भुगतान, बैंक कर रही थी परेशान
Sun, 02 Apr 2023 12:07 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 02 Apr 2023 12:07 AM IST
सार
बैंक प्रबंधक व स्टाफ के खिलाफ पत्नी की ओर से गांधीपार्क में तहरीर दी गई है। जिसमें साफ कहा है कि जिस ऋण का भुगतान न करने की बात कही जा रही है, उसकी सब्सिडी व अन्य भुगतान खादी ग्रामोद्योग से नहीं हुए थे। जिसके चलते व्यापार में परेशानी आई और बैंक परेशान करने लगी। इसी से आजिज आकर संजीव ने आत्महत्या कर ली।
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सुसाइड प्रतीकात्मक
विस्तार
खादी ग्रामोद्योग संग व्यापार करने वाले कंदौली खादी ग्रामोद्योग संस्थान के संचालक मंत्री संजीव वार्ष्णेय की आत्महत्या के मामले में परिवार बैंक के खिलाफ आग बबूला है। बैंक प्रबंधक व स्टाफ पर कर्ज को लेकर परेशान करते हुए बेइज्जत करने और घर जब्त कर नीलाम करने की धमकी देने का आरोप है।
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इसी आरोप के तहत बैंक प्रबंधक व स्टाफ के खिलाफ पत्नी की ओर से गांधीपार्क में तहरीर दी गई है। जिसमें साफ कहा है कि जिस ऋण का भुगतान न करने की बात कही जा रही है, उसकी सब्सिडी व अन्य भुगतान खादी ग्रामोद्योग से नहीं हुए थे। जिसके चलते व्यापार में परेशानी आई और बैंक परेशान करने लगी। इसी से आजिज आकर संजीव ने आत्महत्या कर ली।
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गांधीपार्क की बैंक कालोनी प्रीमियर नगर निवासी संजीव वार्ष्णेय की पत्नी मीरा वार्ष्णेय की ओर से सेंट्रल बैंक शाखा के मुख्य प्रबंधक राजीव कुमार व अन्य स्टाफ के खिलाफ तहरीर देकर आरोप लगाया है कि उनके पति ने गांधी ग्रामोद्योग से जुड़कर कारोबार के लिए बैंक से लिमिट ली थी। उस लिमिट से व्यापार कर रहे थे। समय समय पर भुगतान भी कर रहे थे। इसी बीच सब्सिडी व उत्पाद भुगतान का करीब एक करोड़ सोलह लाख रुपया खादी ग्रामोद्योग आयोग व खादी ग्रामोद्योग बोर्ड पर हो गया। वहां से भुगतान न मिल पाने के कारण बैंक की लिमिट समय पर जमा नहीं हो सकी। इस दौरान पति ने हाथरस अड्डे की एक प्रापर्टी 86 लाख रुपये में बेचकर बैंक को काफी भुगतान भी किया। बावजूद इसके बैंक ने उन पर डेढ़ करोड़ का बकाया यथावत बताकर परेशान करना शुरू कर दिया।
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कहने पर जवाब मिला कि वह तो ब्याज भुगतान हुआ है। मूलधन नहीं। बल्कि रिश्वत न मिलने के कारण तरह तरह से दबाव बनाया जाने लगा। 27 मार्च को बैंक प्रबंधक व अन्य स्टाफ ने आकर परिवार के सामने उनकी बेइज्जती की और 31 मार्च को भुगतान न होने पर मकान जब्त कर नीलाम करने की धमकी दी। साथ में नोटिस भी जारी कर दिया। इसी के चलते उन्होंने आत्महत्या कर ली है। इस मामले में बैंक प्रबंधक व अन्य स्टाफ पर कार्रवाई की मांग की है। इंस्पेक्टर गांधीपार्क रविंद्र दुबे के अनुसार तहरीर प्राप्त हो गई है। उसके तथ्यों की जांच के बाद कार्रवाई आदि तय की जाएगी।
ये किया था व्यापार
परिवार के अनुसार 2017 में संजीव कुमार ने कंदौली गांव पर खादी ग्रामोद्योग संस्थान का संचालन शुरू किया। इसमें खादी बोर्ड व आयोग से जुड़कर उत्पाद बिक्री करनी होती है। अपने यहां खादी उत्पाद बनाने होते हैं। इसके लिए बैंक लिमिट की ब्याज व भुगतान पर सब्सिडी का प्रावधान था। कोविड के दौर में कारोबार मंदा होने के कारण व्यापार कमजोर होता चला गया। इस दौरान कुछ भुगतान भी अटक गए और व्यापार बंद करना पड़ गया। बाद में उन्होंने एक स्पेलर भी खोला। मगर वह भी नहीं चल पाया। वर्तमान में एक निजी कंपनी में नौकरी कर रहे थे।
ये है परिवार की स्थिति
घर में पत्नी के अलावा डिप्लोमा छात्र बेटा आर्यव व बीएससी छात्रा बेटी प्रियांशी है। सभी का हाल बेहाल है। सभी एक स्वर में बैंक को दोषी ठहरा रहे हैं। लाखों करोड़ों के व्यापार करने वाले पिता की बैंक कर्ज में डूबने के कारण मौत पर वे सदमे में हैं। आने वाला भविष्य क्या होगा ? इस पर भी वे चिंतित हैं। उद्योग व्यापार मंडल के अनुराग गुप्ता ने परिवार को 25 लाख रुपये मुआवजे की मांग की है।
मेरे ऊपर लगाए गए आरोप निराधार हैं। करीब एक माह से अधिक समय से में उनके घर नहीं गया। कुछ दिन पहले वे खुद ही बैंक आए थे और कहा था कि वे बैंक का भुगतान करने के लिए अपनी कौन सी संपत्ति बेच सकते हैं। क्योंकि उनके दोनों घर व उत्पादन स्थल वाली संपत्ति बैंक में रखी है। इसलिए वह बेच नहीं सकते थे। रहा सवाल वसूली दबाव का तो बैंक की लीगल टीम अपना काम रुटीन में करती है।-राजीव कुमार, मुख्य प्रबंधक, सेंट्रल बैंक बारहद्वारी
नियत समय पर आवेदन न होने से न मिली होगी सब्सिडी : संतोष मिश्रा
इस मामले में खादी ग्रामोद्योग मुख्यालय के मंत्री संतोष कुमार मिश्रा ने बताया कि ऐसे कई संस्थान हमारे साथ जुड़कर व्यापार करते हैं। इन्हें प्रदेश सरकार से खादी ग्रामोद्योग बोर्ड व केंद्र से खादी ग्रामोद्योग आयोग द्वारा सब्सिडी, उत्पाद खरीदने पर भुगतान आदि की व्यवस्था है। इसके लिए हम बीच में नहीं होते। संस्थान के संचालक व्यापारी व सरकार सीधे संवाद करते हैं। अक्सर नियत समय पर पैरोकारी व आवेदन पर सब्सिडी व भुगतान नहीं हो पाते हैं। इस मामले में क्या हुआ होगा, यह तो दस्तावेज देखने के बाद ही बताया जा सकेगा। कई मर्तबा खुद हमारा भुगतान भी समय से आवेदन न करने पर नहीं मिल पाता है। कुछ योजनाओं में ब्याज पर मिलने वाली सब्सिडी भी बंद कर दी गई है। इसमें अब भुगतान मिल पाएगा या नहीं, यह कहना बेहद मुश्किल है।