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पूर्व एसडीएम कोल पंकज वर्मा को शो काज नोटिस
Fri, 17 May 2019 01:05 AM IST
राजेश सिंह
आशीष श्रीवास्तव, अमर उजाला, अलीगढ़।
आशीष श्रीवास्तव, अमर उजाला, अलीगढ़।
Published by: राजेश सिंह
Updated Fri, 17 May 2019 01:05 AM IST
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डॉ. पंकज वर्मा
- फोटो : Amar Ujala
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गांव याकूतपुर में ग्राम समाज की करीब आठ करोड़ की 0.630 हेक्टेयर ऊसर भूमि को फर्जी एंट्री के जरिये दो महिलाओं के नाम करने के मामले में पूर्व एसडीएम कोल डॉ. पंकज वर्मा फंस गए हैं। शासन से अनुमति मिलने के बाद डीएम चंद्रभूषण सिंह ने लापरवाही से काम करने के मामले में उन्हें शो काज नोटिस जारी कर दिया है। स्पष्टीकरण के लिए पूर्व एसडीएम को 15 दिन का समय दिया गया है। वर्तमान में पंकज वर्मा नगर मजिस्ट्रेट सहारनपुर पद पर तैनात हैं।
पंकज, स्टेनो और दोनों महिलाओं के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की
वर्ष 2018 के मई महीने में तत्कालीन एसडीएम जोगेंदर सिंह ने मामले की जांच की तो इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। इसके बाद पूर्व एसडीएम कोल पंकज वर्मा, उनके स्टेनो एवं दोनों महिलाओं राजवती पत्नी रामजीलाल एवं सुमन पत्नी गोपाल के नाम मुकदमा दर्ज हो गया। जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में पंकज वर्मा एवं स्टेनो को दोषी मानते हुए चार्जशीट लगा दी। स्टेनो ने हाईकोर्ट से स्टे ले लिया और आदेश करा लिया कि जब तक मामले की सुनवाई पूरी न हो जाये तब तक उसे गिरफ्तार न किया जाय।
एसडीएम के खिलाफ कार्रवाई को शासन से मांगी गई थी अनुमति
चूंकि मामला पीसीएस अफसर स्तर का था तो तत्कालीन एसडीएम कोल डॉ. पंकज वर्मा के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रशासन ने शासन से अनुमति मांगी। संयुक्त सचिव नियुक्ति अनुभाग 3 उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ ने 28 जनवरी 2019 को आदेश जारी करते हुए प्रशासन से एसडीएम से उनका पक्ष सुनने को कहा। एक फरवरी को एडीएम वित्त को सुनवाई के आदेश हो गए। लेकिन आरए स्तर पर मामला अब तक दबाए रखा गया। शिकायत हुई तो डीएम ने 16 मई को आदेश जारी कर एसडीएम को 15 दिन में लिखित में स्पष्टीकरण देने के आदेश दिये हैं।
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पंकज, स्टेनो और दोनों महिलाओं के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की
वर्ष 2018 के मई महीने में तत्कालीन एसडीएम जोगेंदर सिंह ने मामले की जांच की तो इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। इसके बाद पूर्व एसडीएम कोल पंकज वर्मा, उनके स्टेनो एवं दोनों महिलाओं राजवती पत्नी रामजीलाल एवं सुमन पत्नी गोपाल के नाम मुकदमा दर्ज हो गया। जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में पंकज वर्मा एवं स्टेनो को दोषी मानते हुए चार्जशीट लगा दी। स्टेनो ने हाईकोर्ट से स्टे ले लिया और आदेश करा लिया कि जब तक मामले की सुनवाई पूरी न हो जाये तब तक उसे गिरफ्तार न किया जाय।
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एसडीएम के खिलाफ कार्रवाई को शासन से मांगी गई थी अनुमति
चूंकि मामला पीसीएस अफसर स्तर का था तो तत्कालीन एसडीएम कोल डॉ. पंकज वर्मा के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रशासन ने शासन से अनुमति मांगी। संयुक्त सचिव नियुक्ति अनुभाग 3 उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ ने 28 जनवरी 2019 को आदेश जारी करते हुए प्रशासन से एसडीएम से उनका पक्ष सुनने को कहा। एक फरवरी को एडीएम वित्त को सुनवाई के आदेश हो गए। लेकिन आरए स्तर पर मामला अब तक दबाए रखा गया। शिकायत हुई तो डीएम ने 16 मई को आदेश जारी कर एसडीएम को 15 दिन में लिखित में स्पष्टीकरण देने के आदेश दिये हैं।
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