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AMU: शोध छात्रा पहुंची न्यायालय, दिल्ली हाईकोर्ट ने यूजीसी, एएमयू, मंत्रालय और प्रोफेसर से मांगा जवाब

Thu, 20 Jun 2024 11:32 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Thu, 20 Jun 2024 11:32 AM IST
सार

छात्रा ने आरोप लगाया है कि गाइड की नियुक्ति एक प्रोफेसर की सिफारिश के आधार पर की गई थी, जो वर्तमान में उनके यौन उत्पीड़न के लिए उन पर मुकदमा चल रहा है।आईसीसी ने प्रोफेसर को यौन उत्पीड़न के आरोप से बरी कर दिया था, जिसके बाद छात्रा ने प्राथमिकी दर्ज कराई और अब मामले की सुनवाई अदालत में चल रही है।

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Research student reaches Delhi High Court against appointment of guide
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) की शोध छात्रा के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने यूजीसी, एएमयू, शिक्षा मंत्रालय और प्रोफेसर से जवाब मांगा है। कोर्ट ने नोटिस देकर एक महीने में जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। दरअसल, छात्रा ने गाइड की नियुक्ति के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

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छात्रा के अधिवक्ता हिलाल उद्दीन ने बताया कि छात्रा ने आरोप लगाया है कि गाइड की नियुक्ति एक प्रोफेसर की सिफारिश के आधार पर की गई थी, जो वर्तमान में उनके यौन उत्पीड़न के लिए उन पर मुकदमा चल रहा है। याचिका में कहा गया है कि आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) ने प्रोफेसर को यौन उत्पीड़न के आरोप से बरी कर दिया था जिसके बाद छात्रा ने प्राथमिकी दर्ज कराई और अब मामले की सुनवाई अदालत में चल रही है। इसके बाद एक नए मार्गदर्शक, विशेषकर एक महिला, की नियुक्ति की मांग की गई। 
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याचिका में यह भी कहा गया है कि पिछले साल अगस्त में हुई एक बैठक में एडवांस्ड स्टडीज एंड रिसर्च कमेटी ने एक नए गाइड को नियुक्त किया, जो छात्रा के खिलाफ दायर काउंटर एफआईआर में गवाह है। याचिका में तर्क दिया गया है कि "पीएचडी पर्यवेक्षक की नियुक्ति एएमयू अध्यादेशों के अनुसार एएमयू के संबंधित विभाग के बोर्ड ऑफ स्टडीज (बीओएस) की शक्तियों के भीतर है, न कि सीएएसआर के अधिकार क्षेत्र में, जो एक पूरी तरह से अलग संस्था है"। 
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छात्रा ने यह भी आरोप लगाया है कि उसका शोध का समय "एएमयू अधिकारियों के अनुचित, अन्यायपूर्ण, गैरकानूनी और मनमाने कार्यों" के कारण थीसिस जमा किए बिना 31 दिसंबर, 2023 को समाप्त हो गया। उन्होंने कोर्ट से अपने शोध के समय को सद्भावना के तौर पर कम से कम 10 महीने बढ़ाने का अनुरोध किया है।

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