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प्रो. इरफान को यूनिवर्सिटी का करारा जवाब
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 04 May 2016 01:44 AM IST
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एएमयू
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एएमयू के डीन स्डूडेंट वेलफेयर (डीएसडब्लू) प्रो. अनीस इस्माईल ने प्रख्यात इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब को करारा जवाब दिया है। उन्हाेंने इरफान हबीब के उस बयान को वास्तविकता से परे बताया है, जिसमें उन्होंने एएमयू में छात्राओं से भेदभाव की बात कही थी।
रविवार को एएमयू इंपलाइज यूनियन कार्यालय में एआईएसएफ के कार्यक्रम में प्रो. इरफान ने यह विवादास्पद बयान दिया था। इसके जवाब में मंगलवार को प्रो. इस्माईल ने कहा है कि एएमयू में लड़कियों के साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जाता। कई तरह के आंकड़े पेशकर उन्हाेंने कहा है कि यहां की छात्राएं नया कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। तुलनात्मक रूप से हर साल करीब 10 प्रतिशत छात्राओं की वृद्धि विभिन्न पाठ्यक्रमों में हो रही है। कई विभाग तो ऐसे हैं, जिसमें छात्रों की तुलना में छात्राएं अधिक हैं।
उन्होंने कहा कि लड़कियों के आवासीय समस्याओं को लेकर भी इंतजामिया बेहद गंभीर है। अब्दुल्लाह हॉल, आईजी हॉल तथा बीबी फातिमा हॉल में वेटिंग लिस्ट समाप्त हो चुका है। जबकि एसएन हॉल एवं बेगम सुल्तान हॉल में छात्राओं की वेटिंग लिस्ट छात्रों के मुकाबले बहुत कम है। प्रो. अनीस ने कहा कि छात्र-छात्राओं के आवासीय हॉलों में खाने का समान मीनू अपनाया जाता है। उनके बीच किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाता। अधिकांश छात्राओं के शाकाहारी होने के कारण उनके खानों में छात्रों के मुकाबले कहीं अधिक विभिन्नता पाई जाती है।
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रविवार को एएमयू इंपलाइज यूनियन कार्यालय में एआईएसएफ के कार्यक्रम में प्रो. इरफान ने यह विवादास्पद बयान दिया था। इसके जवाब में मंगलवार को प्रो. इस्माईल ने कहा है कि एएमयू में लड़कियों के साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जाता। कई तरह के आंकड़े पेशकर उन्हाेंने कहा है कि यहां की छात्राएं नया कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। तुलनात्मक रूप से हर साल करीब 10 प्रतिशत छात्राओं की वृद्धि विभिन्न पाठ्यक्रमों में हो रही है। कई विभाग तो ऐसे हैं, जिसमें छात्रों की तुलना में छात्राएं अधिक हैं।
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उन्होंने कहा कि लड़कियों के आवासीय समस्याओं को लेकर भी इंतजामिया बेहद गंभीर है। अब्दुल्लाह हॉल, आईजी हॉल तथा बीबी फातिमा हॉल में वेटिंग लिस्ट समाप्त हो चुका है। जबकि एसएन हॉल एवं बेगम सुल्तान हॉल में छात्राओं की वेटिंग लिस्ट छात्रों के मुकाबले बहुत कम है। प्रो. अनीस ने कहा कि छात्र-छात्राओं के आवासीय हॉलों में खाने का समान मीनू अपनाया जाता है। उनके बीच किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाता। अधिकांश छात्राओं के शाकाहारी होने के कारण उनके खानों में छात्रों के मुकाबले कहीं अधिक विभिन्नता पाई जाती है।
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