फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   PM Modi in Aligarh to inaugurate new University know who was Raja Mahendra Pratap Singh

कौन थे राजा महेंद्र प्रताप सिंह: बिना भारतीय पासपोर्ट के 31 साल विदेश में रहे, भारत की पहली निर्वासित सरकार बनाई

Tue, 14 Sep 2021 01:31 PM IST
प्राची प्रियम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: प्राची प्रियम Updated Tue, 14 Sep 2021 01:31 PM IST
सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय का शिलान्यास किया। क्या आप जानते हैं कौन थे राजा महेंद्र प्रताप सिंह जिनके नाम पर बन रहे विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए पीएम मोदी आज अलीगढ़ पहुंचे थे। 

विज्ञापन
PM Modi in Aligarh to inaugurate new University know who was Raja Mahendra Pratap Singh
राजा महेंद्र प्रताप सिंह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय का शिलान्यास किया। उत्तर प्रदेश सरकार ने 2019 में जब राज्य स्तरीय इस विश्वविद्यालय की घोषणा की थी, तब से ही यह चर्चा में है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि राजा महेंद्र प्रताप सिंह कौन थे? जानिए उनसे जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें...

विज्ञापन


मुरसान रियासत के राजा थे, शादी में दो ट्रेनें संगरूर गईं थीं
एक दिसंबर 1886 को जन्मे महेंद्र प्रताप सिंह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हाथरस की मुरसान रियासत के राजा थे। जाट परिवार से ताल्लुक रखने वाले राजा महेंद्र प्रताप सिंह की गिनती अपने क्षेत्र के पढ़े-लिखे लोगों में होती थी। उनका विवाह जिंद रियासत की बलबीर कौर से हुआ था। उनकी बारात के लिए हाथरस से संगरूर के बीच दो विशेष ट्रेनें चलाई गई थीं।
विज्ञापन


विज्ञापन
विज्ञापन



पहली निर्वासित सरकार बनाई, भारतीय पासपोर्ट तक नहीं था
राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने 50 से ज्यादा देशों की यात्रा की थी। इसके बावजूद उनके पास भारतीय पासपोर्ट नहीं था। उन्होंने अफगान सरकार के सहयोग से 1 दिसंबर 1915 को पहली निर्वासित हिंद सरकार का गठन किया था। आजादी का बिगुल बजाते हुए वह 31 साल आठ महीने तक विदेश में रहे। हिंदुस्तान को आजाद कराने का यह देश के बाहर पहला प्रयास था। अंग्रेज सरकार से पासपोर्ट मिलने की बात संभव ही नहीं थी। उनके पास अफगानिस्तान सरकार का पासपोर्ट था।

राजा महेंद्र प्रताप की आत्मकथा 'माय लाइफ स्टोरी' को संपादित करने वाले डॉ. वीर सिंह के मुताबिक, राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने हिंदुस्तान छोड़ने से पहले देहरादून के डीएम कार्यालय के जरिए पासपोर्ट बनवाने का प्रयास किया था, लेकिन एक अखबार में जर्मनी के समर्थन में एक लेख लिखने के कारण पासपोर्ट बनाने में बाधा पैदा हुई थी। इसके बाद राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने समुद्र मार्ग से ब्रिटेन पहुंचने की योजना बनाई। बाद में उन्होंने स्विट्जरलैंड, जर्मनी, सोवियत संघ, जापान, चीन, अफगानिस्तान, ईरान, तुर्की जैसे देशों की यात्रा की। 1946 में वे शर्तों के तहत हिंदुस्तान वापस आ सके।

अटल बिहारी वाजपेयी के खिलाफ लड़ा था चुनाव
1957 के आम चुनाव में तो राजा महेंद्र प्रताप ने अटल बिहारी वाजपेयी को करारी शिकस्त दी थी। इस चुनाव में मथुरा लोकसभा सीट से राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में लगभग 4 लाख 23 हजार 432 वोटर थे। इनमें 55 फीसदी यानी लगभग 2 लाख 34 हजार 190 लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। उस वक्त 55 फीसदी वोट पड़ना बड़ी बात होती थी।

इस चुनाव में जीते निर्दलीय प्रत्याशी राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने भारतीय जन संघ पार्टी के उम्मीदवार अटल बिहारी वाजपेयी की जमानत तक जब्त करा दी थी। नियमानुसार कुल वोटों का 1/6 वोट नहीं मिलने पर जमानत राशि जब्त हो जाती है। अटल बिहारी वाजपेयी को इस चुनाव में 1/6 से भी कम वोट मिले थे, जबकि राजा महेंद्र प्रताप को सर्वाधिक वोट मिले और वह विजयी हुए थे। इसके बाद राजा ने अलीगढ़ संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ा, जिसमें उन्हें जनता का जबरदस्त विरोध सहना पड़ा था।

कांग्रेस के साथ शुरुआत से ही नहीं बनती थी बात
जवाहर लाल नेहरू के प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान उनकी विदेश नीति में जर्मनी और जापान मित्र देश नहीं रहे थे, जबकि राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने इन देशों से मदद मांगकर आजादी की लड़ाई शुरू की थी। ऐसे में राजा महेंद्र प्रताप सिंह को शुरू से ही कांग्रेस में बहुत ज्यादा तरजीह नहीं मिली।

संयुक्त राष्ट्र जैसी परिकल्पना पहले ही कर चुके थे
सन 1945 में संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना हुई थी। इससे पहले ही राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने विश्व शांति के लिए ‘संसार संघ’ की परिकल्पना की थी। उन्होंने प्रेम धर्म और संसार संघ की परिकल्पना के जरिये भारतीय संस्कृति के प्राण तत्व वसुधैव कुटुम्बकम् को साकार करने का प्रयास किया था।  डॉ. अनूप शर्मा ने 23 वर्ष पहले ‘भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में राजा महेंद्र प्रताप की भूमिका’ विषय पर इतिहासकार डॉ. बिशन बहादुर सिंह के निर्देशन में शोध किया था। डॉ. अनूप शर्मा का कहना है, राजा महेंद्र प्रताप के साथ राजनीतिक दलों ने न्याय नहीं किया। उनको जो सम्मान मिलना चाहिए, वह नहीं मिला। राजा महेंद्र प्रताप अपने समय के बड़े क्रांतिकारी, महत्वाकांक्षा रहित राजनीतिज्ञ, महान त्यागी, महादानी, बेजोड़ शिक्षाविद एवं देशभक्त थे।

डॉ. अनूप कहते हैं, राजा महेंद्र प्रताप ने 1916-17 में संसार संघ की परिकल्पना की थी। उनका मानना था कि संसार संघ की परिकल्पना से देश कभी आपस में नहीं लड़ेंगे। सारा विश्व पांच प्रांतों में विभक्त हो, जिसकी एक राजधानी और एक सेना हो। एक न्यायालय व एक कानून हो। संसार संघ की सेना में सभी देशों के सैनिक शामिल हों। किसी भी देश की शक्ति संसार संघ की सेना से अधिक न हो। एक सेना होने से प्रत्येक देश का सैनिकों पर होने वाला व्यय रुक जाएगा और उस धन का उपयोग मानव कल्याण के लिए किया जाएगा।

राजा महेंद्र प्रताप सिंह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्र थे। जब वे यहां पढ़ते थे, तब इस यूनिवर्सिटी को मोहम्मदन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेजिएट स्कूल कहा जाता था। महेंद्र प्रताप ने इस विश्वविद्यालय के विकास के लिए जमीन भी दी थी। उन्होंने 1929 में करीब तीन एकड़ की जमीन दो रुपए सालाना की लीज पर दे दी थी।  यह जमीन मुख्य कैंपस से अलग शहर की ओर है जहां आज आधे हिस्से में सिटी स्कूल चल रहा है और आधा हिस्सा अभी खाली है। राजा महेंद्र प्रताप सिंह के योगदान को यूनिवर्सिटी कैंपस में किस तरह से संजोया गया है, इस बारे में पूछने पर उमर पीरजादा ने बताया, हम लोगों की सेंट्रल लाइब्रेरी, मौलाना आजाद लाइब्रेरी में उनकी बड़ी तस्वीर लगी है, उन पर कई किताबें हम लोगों ने खास तौर पर रखी हैं और समय-समय पर उनके सम्मान में सेमिनार और संगोष्ठियां होती रही हैं।

वृंदावन में भी बनवाया था प्रेम महाविद्यालय
अलीगढ़ के पड़ोसी जिले मथुरा के वृंदावन में स्थित राजा महेंद्र प्रताप सिंह की समाधि अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही है। शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान देने वाले राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने वृंदावन में अपनी जमीन पर प्रेम महाविद्यालय नाम से इंटर कॉलेज बनवाया था। यह महाविद्यालय स्वतंत्रता संग्राम का साक्षी रहा है। इसके सामने यमुना किनारे स्थित उनकी समाधि है, जो अब बदहाल स्थिति में है। यहां के लोगों ने उनके समाधि स्थल को विश्व घाट के रूप में विकसित करने की मांग उठाई है। प्रेम महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. देव प्रकाश शर्मा ने वृंदावन स्थित राजा महेंद्र प्रताप की समाधि की दुर्दशा पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अलीगढ़ में राजा महेंद्र प्रताप के नाम से बनने जा रहे राजकीय विश्वविद्यालय का शिलान्यास करने के लिए आ रहे हैं। लेकिन वृंदावन स्थित राजा साहब की समाधि स्थल की ओर किसी का ध्यान नहीं है। उन्होंने राजा साहब को भारत रत्न की मांग भी उठाई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed