AMU: वीसी नियुक्ति पर याचिका खारिज होने पर पूर्व छात्रों ने जताई खुशी, याची वकीलों से राय ले बनाएंगे रणनीति
हाईकोर्ट इलाहबाद ने एएमयू वीसी प्रोफेसर नईमा खातून की नियुक्ति को वैध ठहराया है। इस फैसले पर याची प्रो. एमयू रब्बानी ने कहा कि जैसे कि उन्होंने निर्णय पैरा 73 से 75 तक इस बात को इंगित किया है कि प्रो. मोहम्मद गुलरेज जो कार्यवाहक कुलपति थे। उनको उस बैठक की अध्यक्षता नहीं करनी चाहिए थी, क्योंकि उनकी पत्नी कुलपति की उम्मीदवार थीं।
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एएमयू की पहली महिला कुलपति प्रो. नईमा खातून बनी रहेंगी। हाईकोर्ट इलाहाबाद ने उनकी नियुक्ति को दी जाने वाली सभी याचिकाएं खारिज कर दी है। अब इस मामले में जहां कुलपति पैनल में शामिल रहे और याचिकाकर्ता प्रो. एमयू रब्बानी ने आगे की रणनीति तैयार करने की बात कही है।
उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के निर्णय का सम्मान करते हैं। कोर्ट ने कुलपति की नियुक्ति को यथावत रखा है, लेकिन हमारे वकीलों द्वारा उठाए गए कई बिंदुओं पर सहमति जताई है। जैसे कि उन्होंने निर्णय पैरा 73 से 75 तक इस बात को इंगित किया है कि प्रो. मोहम्मद गुलरेज जो कार्यवाहक कुलपति थे। उनको उस बैठक की अध्यक्षता नहीं करनी चाहिए थी, क्योंकि उनकी पत्नी कुलपति की उम्मीदवार थीं। हम अपने वकीलों से राय करेंगे उनसे मशविरा करके आगे की रणनीति तैयार करेंगे।
मुझे हमेशा भारत की न्यायपालिका की स्वतंत्रता, गरिमा और निष्पक्षता पर पूरा विश्वास रहा है। यह निर्णय केवल मेरे व्यक्तिगत स्तर पर न्याय नहीं है, बल्कि हमारे उच्च शिक्षा संस्थानों की संस्थागत प्रक्रियाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों की पुष्टि भी है। मैं यूनिवर्सिटी की सेवा पूरी निष्ठा, पारदर्शिता और समावेशी शैक्षणिक उत्कृष्टता के संकल्प के साथ करती रहूंगी। आशा करती हूं कि यह निर्णय हम सभी के लिए एक प्रेरणा बने। - प्रो. नईमा खातून, कुलपति, एएमयू
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एएमयू की पहली महिला कुलपति प्रो. नईमा खातून की हाईकोर्ट में जीत महिला सशक्तीकरण को दर्शाता है। कुलपति ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय महिला अब किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। -मोहम्मद नदीम अंसारी, पूर्व उपाध्यक्ष, छात्रसंघ, एएमयू
हाईकोर्ट ने कुलपति के बारे में जो फैसला दिया गया है, वह सराहनीय है। इससे महिला सशक्तीकरण को भी बढ़ावा मिलेगा। अब जरूरत इस बात की है कि यूनिवर्सिटी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की कोशिश की जाए।-जानिब हसन, छात्रनेता, एएमयू
यह सिर्फ प्रो. नईमा खातून की जीत नहीं बल्कि देश की तमाम मुस्लिम महिलाओं की जीत है। अलीग बिरादरी को उनसे काफी उम्मीदें हैं कि यूनिवर्सिटी में जिस तरह पहली महिला कुलपति बनकर आईं। अपने कार्य से भी एक इतिहास बनाएंगी। - गुलजार अहमद, पूर्व सीनियर हाॅल, एनआरएससी
प्रो. नईमा खातून यूनिवर्सिटी के 100 वर्ष के इतिहास में पहली महिला कुलपति बनी हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनकी नियुक्ति को वैध ठहराया है। सर सैयद अहमद खान का सपना था कि वह महिलाओं को शिक्षा हासिल कराई जाए। - बाबा फरीद आजाद, पूर्व छात्र, एएमयू