Emergency Pill: इमरजेंसी पिल पर दिखेगी नई चेतावनी, महीने में दो बार से ज्यादा न लें, बगैर पर्चे के नहीं मिलेगी
इमरजेंसी पिल गर्भधारण रोकने की आपातकालीन दवा है जो असुरक्षित यौन संबंध के बाद 72 घंटे के भीतर लेने पर असरदार है। इसमें मुख्य हार्मोन लेवोनोर्गेस्ट्रेल होता है। हालांकि यह नियमित गर्भनिरोधक का विकल्प नहीं है।
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आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियों के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर स्वास्थ्य नियामकों ने चिंता जताई है। केंद्र सरकार के औषधि तकनीक सलाहकार बोर्ड (डीटीएबी) ने सिफारिश की है कि लेवोनोर्गेस्ट्रेल आधारित इमरजेंसी पिल के पैकेट पर स्पष्ट चेतावनी लिखी जाए कि इसे महीने में दो बार से अधिक इस्तेमाल न किया जाए।
बोर्ड ने यह भी तय किया कि दवा के पैकेट और जानकारी पत्रक में यह चेतावनी प्रमुखता से दी जाए कि यह गोली एचआईवी या अन्य यौन संचारित संक्रमण से सुरक्षा नहीं देती। सुरक्षित यौन संबंध के लिए अन्य गर्भनिरोधक उपाय अपनाने की सलाह भी दी जाएगी।
अलीगढ़ के मोहन लाल गौतम महिला जिला अस्पताल के प्रसूति विभाग की डॉ. चंचल वार्ष्णेय बताती हैं कि पिछले कुछ वर्षों में महानगरों के साथ छोटे शहरों में युवाओं के बीच इमरजेंसी पिल का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। कई बार इसे नियमित गर्भनिरोधक के विकल्प के रूप में लिया जाता है, जबकि यह केवल आपात स्थिति में गर्भधारण रोकने के लिए बनाई गई दवा है। बार-बार इमरजेंसी पिल लेने से हार्मोनल असंतुलन, अनियमित मासिक धर्म और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए नियमित गर्भनिरोधक के लिए डॉक्टर से सलाह लेकर सुरक्षित विकल्प अपनाने की जरूरत है।
नई दिल्ली स्थित भागीरथ पैलेस में दवा व्यापारी महेंद्र कुमार बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में फार्मेसियों में इमरजेंसी पिल की बिक्री तेजी से बढ़ी है। हालांकि दुकान पर दवा तो मिल जाती है लेकिन विक्रेता उसके बारे में सलाह नहीं देता और न ही खरीदने वाला सलाह लेना चाहता है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के अनुसार, भारत में आपातकालीन गर्भनिरोधक गोली (ईसीपी) के इस्तेमाल पर जागरूकता बीते 2010 से 2021 के बीच बढ़कर लगभग 48% तक पहुंची है। नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ के जरिए प्रकाशित अध्ययनों से पता चलता है कि ईसीपी का उपयोग करने वालों में बार-बार उपयोग करना आम बात है जो विभिन्न अध्ययनों में 12% से 69% तक होता है।
शेड्यूल-के शामिल करने का सुझाव, बगैर पर्चा नहीं मिलेगी
इमरजेंसी पिल गर्भधारण रोकने की आपातकालीन दवा है जो असुरक्षित यौन संबंध के बाद 72 घंटे के भीतर लेने पर असरदार है। इसमें मुख्य हार्मोन लेवोनोर्गेस्ट्रेल होता है। हालांकि यह नियमित गर्भनिरोधक का विकल्प नहीं है। इसलिए बैठक में यह भी सुझाव दिया गया कि 0.75 मिग्रा और 1.5 मिग्रा लेवोनोर्गेस्ट्रेल टैबलेट को ड्रग्स रूल्स 1945 के शेड्यूल-के में शामिल किया जाए। इससे इन गोलियों की बिक्री और उपयोग से जुड़े नियम अधिक स्पष्ट होंगे। भारत में शेड्यूल दवाएं विशेष नियमों के तहत बेची और उपयोग में लाई जाती हैं।
सभी राज्यों को आदेश जल्द
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने पुष्टि करते बताया कि बीते 16 फरवरी को भारत की स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. सुनीता शर्मा की अध्यक्षता में हुई बोर्ड बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई। बोर्ड से सिफारिश मिली है जिसके आधार पर जल्द ही राज्यों के लिए आदेश जारी होंगे।