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Aligarh News: नगर निगम की बड़ी कार्रवाई, 100 करोड़ की संपत्ति से हटाए अवैध कब्जे

Tue, 30 Jun 2026 01:57 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 30 Jun 2026 01:57 AM IST
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Major crackdown by the Municipal Corporation: illegal encroachments removed from property worth 100 crore.
नगर निगम क्वार्टर से कब्जा हटवाने पहुंचे नगर निगम के अधिकारी।  - फोटो : samvad
नगर निगम ने सोमवार को दशकों पुराने अवैध कब्जों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दोदपुर स्थित सिविल लाइंस थाने के पीछे निगम के बने 42 सरकारी आवासों को कब्जामुक्त करा लिया। इन मकानों की कुल अनुमानित कीमत करीब 100 करोड़ रुपये है और इन पर वर्षों से अवैध कब्जा था।
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नगर निगम, जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने सुबह से शुरू हुए अभियान में अवैध कब्जाधारियों से मकान खाली कराए और नगर निगम ने आवासों पर अपना कब्जा ले लिया। हालांकि, कार्रवाई के दौरान कई परिवारों ने नगर निगम कार्रवाई का विरोध करते हुए दावा किया कि उन्होंने आवासों को फ्रीहोल्ड करा लिया था। लोगों ने भावुक होकर अपना सामान बाहर निकाला और कार्रवाई पर आपत्ति भी जताई। इस दावे पर नगर निगम के अफसरों का कहना है कि संबंधित भूमि और आवास निगम के स्वामित्व में हैं तथा पूरी कार्रवाई नियमानुसार की गई है।
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नगर निगम की टीम भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और माइक से लगातार घोषणा कर लोगों से मकान खाली करने को कहा। इसके बाद लोगों ने अपना सामान निकालना शुरू किया और एक-एक कर सभी 42 आवास खाली करा दिए गए। नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा भी दोपहर में स्वयं मौके पर पहुंचे और कार्रवाई का निरीक्षण किया।
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नगर आयुक्त ने नगर निगम, पुलिस व जिला प्रशासन की टीम की हौसलाअफजाई करते हुए कहा आज ही सभी अवैध अतिक्रमण को हटाकर सभी आवास में नगर निगम का ताला लगाया जाएगा, जो भी व्यक्ति इस कार्रवाई में बाधा डालने की कोशिश करेगा उसके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई तत्काल की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी आवासों का पूरा रिकॉर्ड और वीडियोग्राफी कराई जाए तथा खाली कराए गए भवनों पर नगर निगम का ताला लगाया जाए।


उन्होंने कहा कि सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्जा किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और कार्रवाई में बाधा डालने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नगर आयुक्त के अनुसार दोदपुर स्थित सरकारी आवासों पर वर्षों से अनाधिकृत रूप से लोग रह रहे थे।


दिसंबर 2025 से ऐसे कब्जाधारियों को नोटिस जारी किए गए। इसके बाद व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर भी दिया गया। मार्च 2026 तक मकान खाली करने के लिए पर्याप्त समय दिया गया, लेकिन कब्जाधारियों ने आवास खाली नहीं किए। इसके बाद नियमानुसार प्रवर्तन कार्रवाई की गई। अभियान के दौरान सहायक नगर आयुक्त वीर सिंह, एसीएम दिग्विजय सिंह, संपत्ति लिपिक विजय गुप्ता, नगर निगम, पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम मौजूद रही। देर शाम तक नगर निगम ने सभी 42 सरकारी आवास खाली करा लेने का दावा किया है।



राजस्व अभिलेखों में नजूल की भूमि के रूप में दर्ज
नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने बताया कि दोदपुर क्षेत्र के ग्राम भमोला छावनी के गाटा संख्या 78 और 87 की नजूल भूमि है। राजस्व अभिलेखों में नोन जैड़ए खेत संख्या-7 मिलकियत शाही के तहत अंकित है। उक्त नजूल भूमि पर अत्यधिक पूर्व में नगर निगम द्वारा अपने कर्मचारियों एवं अधिकारियों के लिए, आवासों का निर्माण कराया गया था।


नजूल नीति में क्षेत्रफल 9036 वर्ग मीटर भूमि को नगर निगम, द्वारा बैनामा 26 सितंबर 2009 के माध्यम से फ्रीहोल्ड कराकर जिलाधिकारी, अलीगढ़ से क्रय की गई। यह भूमि तब से नगर निगम के स्वामित्व की भूमि है। इस भूमि पर बने 40-45 सरकारी आवासों पर अवैध कब्जा था, जिन्हें अब हटाया गया है। नगर निगम के अनेक सरकारी आवासों पर वर्षों से बिना किसी वैध अनुमति के अनाधिकृत रूप से लोग रह रहे थे।


इन सभी कब्जाधारकों को कई बार लिखित नोटिस जारी किए गए। मौखिक रूप से भी समझाया गया तथा व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर प्रदान किया गया। मार्च 2026 तक लगातार पर्याप्त समय और मोहलत दिए जाने के बावजूद किसी भी अनाधिकृत कब्जाधारक ने आवास खाली नहीं किया। नोटिस जारी किए जाने के कई माह बाद भी इन लोगों द्वारा सरकारी आवास खाली नहीं किए गए, जिसके चलते नगर निगम को प्रवर्तन कार्रवाई करनी पड़ी। उन्होंने बताया कि देर शाम तक सभी 42 सरकारी आवास खाली कराए जा चुके हैं।



कर्मचारियों के लिए आवंटित किए गए आवास
दोदपुर में पुराने समय में नगर निगम ने अपने कर्मचारियों के लिए आवास निर्माण कराकर उनका आवंटन किया था। कर्मचारियों के सेवानिवृत्त हो जाने के बाद भी उन्होंने आवंटन नहीं छोड़ा और आवास पर कब्जा बरकरार रखा। इन आवासों में चोरी-छिपे मरम्मत आदि के साथ ही लिंटर आदि डालने आदि का काम किया गया। जब नगर निगम ने उन्हें खाली कराने को नोटिस जारी किए तो आवासों में रह रहे लोगों ने यह कहकर कि वे पिछली कई पीढ़ियों से यहां रह रहे हैं का विरोध किया। इतना ही नहीं आवास खाली करने की बजाए कुछ लोग नगर निगम के खिलाफ न्यायालय में चले गए।


लोग बोले- मालिकाना हक मिलने पर कराया निर्माण
नगर निगम क्वार्टर के डी -5 में रहने वाले मोहम्मद अबरार खान ने बताया कि वर्ष 1999 में उनके पक्ष में फ्री होल्ड के आदेश हुए थे। मालिकाना हक मिलने पर यहां निर्माण कार्य कराए गए। नगर निगम ने नोटिस दिए तो इसके विरोध में वर्ष 2001 में कोर्ट गए। वर्ष 2004 में कोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ने किराया वसूला।



इसमें नगर निगम की ओर से काउंटर लगा हुआ है। न्यायालय में दो जुलाई की तारीख नियत है। उन्होंने दावा किया कि आवासों को किसी ने खाली नहीं किया है। बस पुलिस-प्रशासन के डर से अपना सामान निकाल कर ले जा रहे हैं। उन्होंने मांग रखी कि हमें कोर्ट के आदेश के आने का इंतजार करने दिया जाए। अधिकारी इससे पहले ही आवास खाली करने का दबाव बना रहे हैं।
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