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Aligarh News: 14 बार लिखे पत्र, फिर भी नहीं लगी सुध, हो गया हादसा

Fri, 16 Oct 2026 03:16 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 16 Oct 2026 03:16 AM IST
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Letters were written 14 times, yet no
गिरासू हालत में ​जीजीआईसी का लिंटर। संवाद - फोटो : samvad
राजकीय कन्या इंटर कॉलेज अतरौली में बुधवार को कक्षा की छत का प्लास्टर गिरने से चार छात्राओं के घायल होने का मामला महज हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही का नतीजा है। प्रधानाचार्य माधवी शर्मा ने 2024 से अब तक 14 बार जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय को पत्र लिखकर भवन के जर्जर होने और हादसे की आशंका जताई थी, लेकिन मरम्मत के लिए बजट जारी नहीं हुआ।
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बुधवार को कक्षा छह में गणित का पेपर चल रहा था तभी लिंटर का प्लास्टर गिर पड़ा था, जिसमें चार छात्राएं घायल हो गई थीं। उनकी हालत ठीक है। हादसे के बाद भी कॉलेज में बृहस्पतिवार को मरम्मत कार्य शुरू नहीं हो सका। कॉलेज में पांच जगहों से लिंटर का प्लास्टर कभी भी गिरने की हालत में है। बिजली के बोर्ड में पहले ही आग लग चुकी है और आधे कॉलेज में बिजली की सप्लाई ठप है।
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प्रधानाचार्य द्वारा डीआईओएस कार्यालय में 25 जून 2024, 13 जनवरी 2025, 24 अप्रैल 2025, 27 अगस्त 2025, 28 अगस्त 2025, आठ सितंबर 2025 और 2026 में 16 मई, नौ जुलाई, सात जुलाई, 11 अगस्त, 20 जुलाई और 9 सितंबर में पत्र रिसीव कराए गए।
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कॉलेज में पढ़ते है 850 विद्यार्थी
पत्र में प्रधानाचार्य ने लिखा कि कॉलेज में करीब 850 छात्राएं अध्यनरत हैं। विद्यालय में वर्तमान में 11 शिक्षण कक्षाएं संचालित हो रही हैं। इनमें से कुछ कक्षाओं की छत क्षतिग्रस्त हो रही है। विद्यालय की बिजली वायरिंग की व्यवस्था अत्यंत खराब है। कई कक्षाओं की खिड़कियां, दरवाजे तथा मुख्य गेट टूटे हुए हैं, जिसके कारण बंदर कक्षाओं में आकर नुकसान करते हैं। भवन की जीर्णोद्धार, बिजली वायरिंग, छत, खिड़की, दरवाजे, मुख्य गेट की मरम्मत, शिक्षण स्टाफ, स्वीपर की तैनाती और पंखे लगवाने की मांग की थी।


- हम पूर्व में पत्र लिखकर मरम्मत कराने के लिए बजट की मांग कर चुके हैं। बजट मिलने के बाद ही मरम्मत कार्य हो सकता है। - माधवी शर्मा, प्रधानाचार्य।

- अगर प्रधानाचार्य ने 14 बार पत्र भेजे हैं, तो वे पत्रों की पावती रसीद कार्यालय में उपलब्ध करा दें। इस संबंध में डीआईओएस कार्यालय में प्रधानाचार्य द्वारा भेजा गया कोई भी पत्र उपलब्ध नहीं है। - डॉ. पूरन सिंह, डीआईओएस।
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