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स्वास्थ्य विभागः तो क्या घपले-घोटाले से जुड़ा है छापेमारी का तार

Sat, 04 Jul 2020 08:35 PM IST
राजेश सिंह न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़। Published by: राजेश सिंह Updated Sat, 04 Jul 2020 08:35 PM IST
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Health Department: So is the raid wire related to the scam
फाइल फोटो - फोटो : social media
मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में मुख्य विकास अधिकारी अनुनय झा एवं एसीएम द्वितीय की छापेमारी क्या घपले-घोटालों पर से पर्दा उठाने के लिए की गई है? छापेमारी के बाद से स्वास्थ्य विभाग में इस बात की खूब चर्चा है। 
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दरअसल स्वास्थ्य विभाग पिछले कुछ साल से घपला-घोटाला एवं भ्रष्टाचार को लेकर चर्चा में है। अतरौली के 100 बेड संयुक्त अस्पताल एवं पंडित दीनदयाल उपाध्याय चिकित्सालय के लिए उपकरण व सामान की खरीद में करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप लगा था। न्यू डेंटल केयर यूनिट के लिए खरीदे गए चेयर को लेकर भी काफी बदनामी हुई थी।
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उपकरणों की खरीद-बिक्री में सारे नियमों को ताक पर रख दिया गया था। इसकी गूंज लखनऊ तक पहुंची थी। आरोप-प्रत्यारोप में पूर्व सीएमओ डॉ. एमएल अग्रवाल का दूसरे जिले में वरिष्ठ परामर्शदाता के पद पर स्थानांतरण हो चुका है। पंडित दीनदयाल संयुक्त चिकित्सालय की सीएमएस का भी तबादला हो चुका है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अनुपम भास्कर क्रय समिति के अध्यक्ष थे।
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उन पर भी चार्ज लगे थे और राज्यपाल द्वारा दोषी मानते हुए जांच का आदेश दिया गया था। एक अन्य मामले में प्रधान सहायक विनयकांत अग्निहोत्री पर भी गंभीर आरोप लगे थे। डॉ. एमएल अग्रवाल के स्थानांतरण के बाद घपले-घोटाले के मामले दब गए थे। उनके समय में सक्रिय रहने वाले अधिकारी पृष्ठभूमि में चले गए या सीन से गायब हो गए।


डॉ. गीता प्रधान ने भी डॉ. अग्रवाल के समय के सक्रिय अधिकारियों को तरजीह नहीं दी थी। डॉ. गीता प्रधान के बाद डॉ. बीपी सिंह कल्याणी सीएमओ बनकर आए। वह उस समय यहां पहुंचे जब कोरोना संकट शुरू हो गया था। नए सीएमओ के समय में कुछ ऐसे लोग फिर सीन में आए जो डॉ. अग्रवाल के जाने के बाद गायब हो गए थे।


इसका परिणाम यह हुआ कि विभाग में फिर से राजनीति शुरू हो गई। यह भी सवाल उठने लगे कि जिस व्यक्ति के खिलाफ राज्यपाल द्वारा जांच का आदेश दिया गया है, उसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी कैसे दी जा सकती है।


यह सवाल अधिकारियों के फैसले को चुनौती देने जैसा था। अंदर ही अंदर जिला मुख्यालय से लेकर लखनऊ तक पुराने आदेश व लेटर घूमने लगे। इसका असर यह हुआ कि कुछ अधिकारी एवं कर्मचारियों के लिए कोरोना संकट से ज्यादा महत्वपूर्ण व्यक्तिगत लड़ाई हो गई। जब पानी सिर से ऊपर गया तो जिलाधिकारी ने सीडीओ व एसीएम को जांच के लिए भेज दिया।



नतीजा सबके सामने है। जांच के दौरान 14 लैपटॉप, डेंगू किट, कारतूस, कंडोम, नकदी आदि बरामद हुए। अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. वीपी सिंह का कहना है कि यह एक सामान्य विभागीय कार्रवाई है। इसके अच्छे परिणाम सामने आएंगे।
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