सरकारी अस्पताल खुद बीमार: रात में हुई ब्लीडिंग, नहीं मिला डॉक्टर, महिला ने तोड़ दिया दम, नवजात की हालत नाजुक
महिला को तेज ब्लीडिंग हो रही थी और उसकी लगातार हालत खराब हो रही थी। वहां डाक्टरों को ढूंढा गया, तो पता चला कि रात के समय कोई डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं रहता। इससे आनन फानन महिला को लेकर परिजन रात करीब एक बजे अलीगढ़ जिला महिला चिकित्सालय पहुंचे। जहां हालत खराब देख जेएन मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया। मेडिकल कॉलेज पहुंचते-पहुंचते महिला ने दम तोड़ दिया।
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अलीगढ़ में अतरौली का सरकारी अस्पताल खुद बीमार है। अतरौली नगर के अवंतीबाई चौराहा स्थित सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। वार्ड में भर्ती एक महिला की रात के समय ब्लीडिंग होने से हालत बिगड़ गई, मगर उसे उपचार देने के लिए अस्पताल में डाक्टर ही मौजूद नहीं थे। स्टाफ ने देर रात महिला को अलीगढ़ रेफर कर दिया, जहां पहुंचते-पहुंचते उसने दम तोड़ दिया। वहीं नवजात बच्चे की हालत खराब है, उसका उपचार अलीगढ़ के अस्पताल में चल रहा है।
रात में नहीं रहता कोई डॉक्टर
गांव औरेनी दलपतपुर निवासी गजेंद्र सिंह की शादी 24 वर्षीय अनीता देवी के साथ 22 फरवरी 2022 को हुई थी। गर्भवती होने के बाद अनीता देवी को प्रसव के लिए अतरौली सीएचसी में भर्ती कराया गया । यहां रात करीब 10 बजे अनीता देवी ने बेटे को जन्म दिया। अनीता के देवर राजकुमार ने बताया कि रात करीब 11 बजे ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ ने नवजात बच्चे की हालत खराब बताई। बच्चे को देखने के लिए उस वक्त अस्पताल में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था।
स्टाफ ने उसे बच्चे को अलीगढ़ रेफर कर दिया। बच्चे को अलीगढ भर्ती कराकर परिवार के लोग जब सीएचसी पहुंचे, तो वहां महिला को तेज ब्लीडिंग हो रही थी और उसकी लगातार हालत खराब हो रही थी। वहां डाक्टरों को ढूंढा गया, तो पता चला कि रात के समय कोई डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं रहता। इससे आनन फानन महिला को लेकर परिजन रात करीब एक बजे अलीगढ़ जिला महिला चिकित्सालय पहुंचे। जहां हालत खराब देख जेएन मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया। मेडिकल कॉलेज पहुंचते-पहुंचते महिला ने दम तोड़ दिया। इससे परिवार में कोहराम मच गया।
जनता को मरते नहीं देख सकते, देंगे धरना
उन्होंने कहा कि एक ही परिसर में 100 शैया युक्त संयुक्त चिकित्सालय व सीएचसी संचालित होने के बाद भी मरीजों को उपचार नहीं मिल रहा, तो इससे बड़ी बदहाली क्या होगी? उन्होंने आरोप लगाया कि यदि अस्पताल में डाक्टर मौजूद होते, तो महिला को तत्काल उपचार मिल जाता और उसकी जान बच सकती थी। मंडल की सबसे बड़ी अधिकारी अपर स्वास्थ्य निदेशक से शिकायत के बाद भी इस अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं नहीं सुधर रहीं और आपातकालीन सेवाएं शुरू नहीं हो सकीं। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी है कि इलाज के अभाव में जनता को ऐसे मरते नहीं देख सकते। यदि अस्पताल में आपातकाली सेवाएं शुरू कर 24 घंटे डाक्टरों के रहने का ड्यूटी शिड्यूल नहीं बना, तो अस्पताल में धरना प्रदर्शन करेंगे।
बिना महिला चिकित्सक के ही चल रहा लेबर रूम
सीएचसी में एक भी महिला चिकित्सक की तैनाती नहीं है। इसके बाद भी गर्भवती महिलाओं को भर्ती कर निचले स्तर के स्टाफ से प्रसव कराए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रसूताओं के लिए जोखिम भरा है।
सीएचसी में महिला चिकित्सक की तैनाती नहीं है। अन्य अनुभवती स्टाफ प्रसव बेहद सावधानी से कराता है। अत्यधिक ब्लीडिंग होने पर प्रसूता को मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था जहां उसकी मौत हुई है। इलाज में लापरवाही की बात गलत है। रात के समय मैं खुद ड्यूटी पर था लेकिन मुझे इस बारे में स्टाफ ने क्यों नहीं बताया उनसे जबाव तलब किया जाएगा।- डॉ. खालिद, सीएचसी प्रभारी