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Aligarh News: आलू बुवाई के पीक सीजन में डीएपी के लिए तरसे किसान
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चंडौस का क्षेत्रीय सहकारी समिति का बंद गोदाम। संवाद
- फोटो : samvad
आलू की बुवाई का पीक सीजन चल रहा है। समितियों पर ताला लटका हुआ है। डीएपी नहीं मिलने से किसान दर-दर भटक रहे हैं। बाजार में डीएपी महंगे दामों में मिल रहा है और लगेज अलग से थोपा जा रहा है। किसानों का कहना है कि समय से आलू की बुवाई नहीं होने पर उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ सकता है।
डीएपी खाद की समस्या करीब एक पखवाड़े से नियमित वेतन की मांग को लेकर सहकारी समितियों के सचिवों के लखनऊ में धरने पर बैठने के कारण उत्पन्न हुई है। अतरौली तहसील के तीन ब्लॉकों अतरौली में आठ, बिजौली में आठ और गंगीरी में 16 समितियां हैं। ये 32 सहकारी समितियां पिछले एक सप्ताह से बंद हैं। इनसे करीब एक लाख किसान जुड़े हैं। सचिव हरिराज सिंह, हाकिम सिंह, दयाशंकर शर्मा, कच्छी सिंह वर्मा ने बताया कि प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर लखनऊ में अनिश्चितकालीन धरना चल रहा है। नियमित वेतनमान को लेकर सरकार से ठोस आश्वासन मिलने तक धरना जारी रह सकता है। कुंवरपुर के प्रताप सिंह कुंतल, मानेंद्र सिंह, अमर पाल सिंह आदि किसानों का आरोप है कि निजी दुकानदार डीएपी के साथ लगेज के नाम पर कीटनाशक या कोई वस्तु जबरन थोप रहे हैं। इधर एक सप्ताह के बाद सोमवार को पीसीएफ केंद्र पर मात्र 360 बोरा डीएपी आई, जो किसानों के लिए ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुई। देवेंद्र गुप्ता, जगवीर सिंह, नरेंद्र सिंह आदि किसानों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि समितियों पर वैकल्पिक व्यवस्था कर तत्काल खाद वितरण शुरू कराया जाए और निजी दुकानों पर हो रही कालाबाजारी पर रोक लगाई जाए।
खैर में सवा लाख बोरी की जरूरत
खैर तहसील क्षेत्र में करीब 65 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि है। यदि प्रति हेक्टेयर औसतन दो कट्टे डीएपी की जरूरत मानी जाए तो पूरे क्षेत्र के किसानों को लगभग 1.30 लाख कट्टे खाद की आवश्यकता होगी। खैर की सहकारी समिति के कर्मचारी दीवान सिंह ने बताया कि हड़ताल जारी रहेगी। बामोती गांव निवासी किसान दिनेश शर्मा और श्यामसुंदर का कहना है कि खाद महंगी मिलने से खेती की लागत बढ़ रही है। समय पर डीएपी नहीं मिलने से फसलों की बुवाई और शुरुआती विकास पर भी असर पड़ने की आशंका है। इफ्को केंद्र पर भी कर्मचारियों की हड़ताल का असर पड़ रहा है।
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चंडौस में 13 दिन से डीएपी नहीं
चंडौस क्षेत्रीय सहकारी समिति के गोदाम पर 13 दिन से खाद के लिए किसान भटक रहे हैं। आलू और रबी फसल की बुवाई चल रही है। किसानों को जरूरत के हिसाब से खाद नहीं मिल पा रहा है, जिससे किसानों में रोष व्याप्त है। किसानों का कहना है कि अगर यही हालत रहे तो उत्पादन और गुणवत्ता पर असर पड़ेगा। सहकारी समिति के अध्यक्ष इंद्रदेव शर्मा का कहना है कि, खाद की लगातार मांग भेजी जा रही है,लेकिन पिछले 13 दिनों से खाद आ नहीं रहा है। अकराबाद में किसानों को डीएपी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। किसानों का आरोप है कि दुकानदार मजबूरी में मनमाने दाम पर खाद बेच रहे हैं।
बाजार में खाद सात सौ रुपये तक महंगी
छर्रा में डीएपी नहीं मिलने से किसान दर-दर भटकने को मजबूर कर दिया। किसानों का कहना है कि बाजार में सुबह या रात में किसानों को चोरी-छिपे डीएपी सरकारी मूल्य से लगभग पांच से सात सौ रुपये की तेजी पर मिल रही है। गभाना की सहकारी समिति सोमना नंबर एक और दो पर एक सप्ताह से हड़ताल के कारण खाद का वितरण ठप पड़ा है। सचिव अतुल कुमार ने बताया कि एनपीके 450 और टीएसपी के 360 बोरे उपलब्ध हैं।
किसानों का दर्द
पांच दिन से समिति पर जा रहे हैं, वहां ताला लटका मिलता है। आलू बोने का समय निकल रहा है। बाजार में महंगाई है। सतवीर चौधरी, नहल।
सरकार को जल्दी ही किसानों की सुध लेनी चाहिए। अगर इस हफ्ते बुवाई नहीं हुई तो पैदावार आधी रह जाएगी। - विजय सिंह, रजातऊ
-सरकारी मूल्य 1350 रुपये है लेकिन समिति सचिवों की हड़ताल के चलते किसानों को काला में खरीदना पड़ रहा है। - जगदीश रावत, गालिबपुर
-किसान सुबह जल्दी और देर रात में खाद खरीद कर ला रहा है। किसानों मजबूरी का दुकानदार लाभ उठा रहे हैं। -दाताराम, पुरानी इस्माइलपुर
-बीस बीघा खेत में गेहूं की बुवाई होनी है। पर डीएपी नहीं मिलने से फसल देर हो रही है। प्रशासन को ध्यान देना चाहिए। - किशन सिंह हैदर नगर
-सहकारी समितियां बंद पड़ी हैं। किसानों को गेहूं, लाह, आलू और मटर की बुवाई के लिए डीएपी की आवश्यकता है। - बबलू सिंह,रोहिना सिंहपुर
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डीएपी खाद की समस्या करीब एक पखवाड़े से नियमित वेतन की मांग को लेकर सहकारी समितियों के सचिवों के लखनऊ में धरने पर बैठने के कारण उत्पन्न हुई है। अतरौली तहसील के तीन ब्लॉकों अतरौली में आठ, बिजौली में आठ और गंगीरी में 16 समितियां हैं। ये 32 सहकारी समितियां पिछले एक सप्ताह से बंद हैं। इनसे करीब एक लाख किसान जुड़े हैं। सचिव हरिराज सिंह, हाकिम सिंह, दयाशंकर शर्मा, कच्छी सिंह वर्मा ने बताया कि प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर लखनऊ में अनिश्चितकालीन धरना चल रहा है। नियमित वेतनमान को लेकर सरकार से ठोस आश्वासन मिलने तक धरना जारी रह सकता है। कुंवरपुर के प्रताप सिंह कुंतल, मानेंद्र सिंह, अमर पाल सिंह आदि किसानों का आरोप है कि निजी दुकानदार डीएपी के साथ लगेज के नाम पर कीटनाशक या कोई वस्तु जबरन थोप रहे हैं। इधर एक सप्ताह के बाद सोमवार को पीसीएफ केंद्र पर मात्र 360 बोरा डीएपी आई, जो किसानों के लिए ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुई। देवेंद्र गुप्ता, जगवीर सिंह, नरेंद्र सिंह आदि किसानों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि समितियों पर वैकल्पिक व्यवस्था कर तत्काल खाद वितरण शुरू कराया जाए और निजी दुकानों पर हो रही कालाबाजारी पर रोक लगाई जाए।
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खैर में सवा लाख बोरी की जरूरत
खैर तहसील क्षेत्र में करीब 65 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि है। यदि प्रति हेक्टेयर औसतन दो कट्टे डीएपी की जरूरत मानी जाए तो पूरे क्षेत्र के किसानों को लगभग 1.30 लाख कट्टे खाद की आवश्यकता होगी। खैर की सहकारी समिति के कर्मचारी दीवान सिंह ने बताया कि हड़ताल जारी रहेगी। बामोती गांव निवासी किसान दिनेश शर्मा और श्यामसुंदर का कहना है कि खाद महंगी मिलने से खेती की लागत बढ़ रही है। समय पर डीएपी नहीं मिलने से फसलों की बुवाई और शुरुआती विकास पर भी असर पड़ने की आशंका है। इफ्को केंद्र पर भी कर्मचारियों की हड़ताल का असर पड़ रहा है।
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चंडौस में 13 दिन से डीएपी नहीं
चंडौस क्षेत्रीय सहकारी समिति के गोदाम पर 13 दिन से खाद के लिए किसान भटक रहे हैं। आलू और रबी फसल की बुवाई चल रही है। किसानों को जरूरत के हिसाब से खाद नहीं मिल पा रहा है, जिससे किसानों में रोष व्याप्त है। किसानों का कहना है कि अगर यही हालत रहे तो उत्पादन और गुणवत्ता पर असर पड़ेगा। सहकारी समिति के अध्यक्ष इंद्रदेव शर्मा का कहना है कि, खाद की लगातार मांग भेजी जा रही है,लेकिन पिछले 13 दिनों से खाद आ नहीं रहा है। अकराबाद में किसानों को डीएपी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। किसानों का आरोप है कि दुकानदार मजबूरी में मनमाने दाम पर खाद बेच रहे हैं।
बाजार में खाद सात सौ रुपये तक महंगी
छर्रा में डीएपी नहीं मिलने से किसान दर-दर भटकने को मजबूर कर दिया। किसानों का कहना है कि बाजार में सुबह या रात में किसानों को चोरी-छिपे डीएपी सरकारी मूल्य से लगभग पांच से सात सौ रुपये की तेजी पर मिल रही है। गभाना की सहकारी समिति सोमना नंबर एक और दो पर एक सप्ताह से हड़ताल के कारण खाद का वितरण ठप पड़ा है। सचिव अतुल कुमार ने बताया कि एनपीके 450 और टीएसपी के 360 बोरे उपलब्ध हैं।
किसानों का दर्द
पांच दिन से समिति पर जा रहे हैं, वहां ताला लटका मिलता है। आलू बोने का समय निकल रहा है। बाजार में महंगाई है। सतवीर चौधरी, नहल।
सरकार को जल्दी ही किसानों की सुध लेनी चाहिए। अगर इस हफ्ते बुवाई नहीं हुई तो पैदावार आधी रह जाएगी। - विजय सिंह, रजातऊ
-सरकारी मूल्य 1350 रुपये है लेकिन समिति सचिवों की हड़ताल के चलते किसानों को काला में खरीदना पड़ रहा है। - जगदीश रावत, गालिबपुर
-किसान सुबह जल्दी और देर रात में खाद खरीद कर ला रहा है। किसानों मजबूरी का दुकानदार लाभ उठा रहे हैं। -दाताराम, पुरानी इस्माइलपुर
-बीस बीघा खेत में गेहूं की बुवाई होनी है। पर डीएपी नहीं मिलने से फसल देर हो रही है। प्रशासन को ध्यान देना चाहिए। - किशन सिंह हैदर नगर
-सहकारी समितियां बंद पड़ी हैं। किसानों को गेहूं, लाह, आलू और मटर की बुवाई के लिए डीएपी की आवश्यकता है। - बबलू सिंह,रोहिना सिंहपुर