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जाकिर नाईक के संगठन पर बैन के खिलाफ एएमयू में प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूूराे
Updated Sat, 03 Dec 2016 02:15 AM IST
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protest march
- फोटो : Amar Ujala
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इस्लामिक धर्मगुरु डॉ. जाकिर नाईक के एनजीओ इस्लामिक रिसर्च आर्गेनाइजेशन (आईआरओ) पर केंद्र सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के विरोध में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रों ने जुमे की नमाज के बाद विरोध मार्च निकाला। प्रतिबंध को हटाने की मांग करते हुए जाकिर नाईक के समर्थन में नारे लगाए।
छात्रों ने प्रतिबंध को गैर कानूनी करार देते हुए यूनिवर्सिटी की मसजिद से विरोध मार्च की शुरुआत की। इसके बाद मार्च सर सैयद हाल नार्थ, स्टाफ क्लब, यूनिवर्सिटी गेस्ट हाउस होकर बाब-ए-सैयद तक पहुंचा। यहां पर एक सभा में तब्दील हुआ, जिसमें वक्ताओं ने कहा कि डॉ. जाकिर नाईक एक विश्व विख्यात धर्मगुरु हैं।
केंद्र सरकार मुस्लिम संस्थानों और मुस्लिम शख्सियतों के खिलाफ चुन-चुन कर कार्रवाई कर रही है। उन्हें निशाना बना रही है। वक्ताओं ने संचार माध्यमों को भी मुस्लिम विषयों से संबंधित खबरों पर सतर्क और सावधान रहने की जरूरत बतायी।
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वक्ताओं ने कहा कि यह देखा गया है कि बिना पूरी तरह तथ्यों की पड़ताल किए संचार माध्यम मुसलिमों संस्थाओं से जुड़ी खबरों को विकृत रूप से प्रस्तुत करते हैं। जिससे लोगों के मन में गलत छवि बनती है।
इस दौरान सर्वसम्मति से मांग की गई कि आईआरओ पर लगाया गया प्रतिबंध हटाया जाए और केंद्र सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार करे।
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छात्रों ने प्रतिबंध को गैर कानूनी करार देते हुए यूनिवर्सिटी की मसजिद से विरोध मार्च की शुरुआत की। इसके बाद मार्च सर सैयद हाल नार्थ, स्टाफ क्लब, यूनिवर्सिटी गेस्ट हाउस होकर बाब-ए-सैयद तक पहुंचा। यहां पर एक सभा में तब्दील हुआ, जिसमें वक्ताओं ने कहा कि डॉ. जाकिर नाईक एक विश्व विख्यात धर्मगुरु हैं।
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केंद्र सरकार मुस्लिम संस्थानों और मुस्लिम शख्सियतों के खिलाफ चुन-चुन कर कार्रवाई कर रही है। उन्हें निशाना बना रही है। वक्ताओं ने संचार माध्यमों को भी मुस्लिम विषयों से संबंधित खबरों पर सतर्क और सावधान रहने की जरूरत बतायी।
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वक्ताओं ने कहा कि यह देखा गया है कि बिना पूरी तरह तथ्यों की पड़ताल किए संचार माध्यम मुसलिमों संस्थाओं से जुड़ी खबरों को विकृत रूप से प्रस्तुत करते हैं। जिससे लोगों के मन में गलत छवि बनती है।
इस दौरान सर्वसम्मति से मांग की गई कि आईआरओ पर लगाया गया प्रतिबंध हटाया जाए और केंद्र सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार करे।