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अतीत का अलीगढ़ 14: अलीगढ़ का नाम कभी रामगढ़ और साबितगढ़ भी हुआ करता था, कोल को अंग्रेज मानते थे 'हैंडसम' टाउन

Sun, 10 Dec 2023 10:23 AM IST
चमन शर्मा कुमार अतुल, अमर उजाला, अलीगढ़
कुमार अतुल, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Sun, 10 Dec 2023 10:23 AM IST
सार

राज्य सरकार ने एक शासनादेश के जरिए प्रदेश के सभी जिलों के लिए नया जिला गजेटियर तैयार करने का आदेश दिया है। उसके लिए कमेटियों का गठन किया जा रहा है। अलीगढ़ का अंतिम गजेटियर 1909 में तैयार किया गया था। लगभग 400 पेजों की इस पुस्तक में लगभग 114 साल पुराने अलीगढ़ के भूगोल, नदियों, प्रशासनिक व्यवस्था, सिंचाई व ड्रेनेज सिस्टम, पुलिस व्यवस्था आदि के बारे में विस्तार से वर्णन है। इस संबंध में अतीत का अलीगढ़ नाम से एक समाचार श्रृंखला शुरू की जा रही है। उम्मीद है कि पुराने अलीगढ़ के बारे में जानकारी पाठकों को रुचिकर लगेगी। कृपया अपनी राय से हमें अवगत कराएं।

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Aligarh was once named Ramgarh and Sabitgarh
अतीत का अलीगढ़ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अलीगढ़ जिले के नाम पर एक बार फिर काफी चर्चा हो रही है। अलीगढ़ नगर निगम ने बीते दिनों एक प्रस्ताव पारित करके शासन के पास जिले के नाम हरिगढ़ करने का सुझाव भेजा है। दरअसल महान संगीतज्ञ तानसेन के गुरु हरिदास की भूमि होने की वजह से एक वर्ग जिले का नाम हरिगढ़ रखने के पक्ष में है। लेकिन जिले का नाम हरिगढ़ कभी नहीं रहा। अलबत्ता, कुछ समय के लिए अलीगढ़ को रामगढ़ भी कहा जाता था । 

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मुख्यतः अलीगढ़ को लंबे समय तक कोल ही कहा जाता था। दरअसल, नज्फ खान के दौर में कोल क्षेत्र के पास एक किले का निर्माण कराया गया। इस किले का नाम अलीगढ़ रखा गया। इसी किले के नाम से जिले का नाम अलीगढ़ पड़ा। कुछ समय के लिए कोल क्षेत्र को साबितगढ़ भी कहा जाने लगा था। बाद में जिले के तौर पर अलीगढ़ और तहसील के रूप में कोल सर्वमान्य और सर्वस्वीकार्य हो गया। अंग्रेजी शासन काल के बंदोबस्त के अनुसार अलीगढ़ जिला मेरठ कमिश्नरी का हिस्सा था।
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कोल को 'हैंडसम' टाउन मानते थे अंग्रेज
ब्रिटिश काल के दस्तावेज बताते हैं कि अंग्रेज कोल को आमतौर पर एक हैंडसम (खूबसूरत) टाउन मानते थे। इसका जिक्र उन्होंने लिखित रूप से बाकायदा अपनी प्रशासनिक रिपोर्टों में किया है। उन्होंने लिखा है कि कोल काफी अच्छे स्थान पर बसा है। कोल का मध्यस्थान ऊंचाई वाली जगह स्थित पुराने किले के द्वार के पास था। यहीं पर खूबसूरत साबित खां की मस्जिद का निर्माण कराया गया था। 
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बाद में म्युनिसिपल प्रशासन ने इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में दुकानों का निर्माण कराया था। इस केंद्रीय स्थान से उत्तर पूर्व को जानी वाली चौड़ी सड़क रेलवे स्टेशन को जाती थी। दूसरी सड़क खैर के लिए जाती थी। गंगा के किनारे रामघाट से मथुरा जाने वाली सड़क का व्यावसायिक रूप से ज्यादा महत्वपूर्ण थी। मुख्य बाजार जाने वाली सड़क रेलवे स्टेशन होते हुए ग्रैंड ट्रंक रोड से मिल जाती थी।

1871 और 1874 की बारिश में जलमग्न हो गया था अलीगढ़

मौजूदा समय में मानसून सीजन में शहर को सबसे ज्यादा दर्द जलभराव ही देता है। अलीगढ़ में जलभराव की समस्या काफी पुरानी है।1871 और 1874 में शहर में भारी बारिश हुई थी। इसके असर से पूरे शहर में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई थी। आम लोगों को काफी दुश्वारियों का सामना करना पड़ा था। लेकिन अंग्रेज मानते थे कि इस समस्या का समाधान निकाला जा सकता है। मौजूदा प्रशासन भी चाहे तो अंग्रेजों के समाधान की मदद ले सकता है। शहर के आवासीय घर ज्यादातर पक्की ईंटों से बने थे। मिट्टी के घरों की संख्या भी ज्यादा थी।

कोल में थे 101 मोहल्ले
कोल टाउन में मोहल्लों की संख्या 101 थी। टाउन का बड़ा हिस्सा सरायों से बदली रिहायसों में तब्दील हुआ था। दिल्ली, मथुरा, आगरा, रुहेलखंड आदि स्थानों पर आनेजाने वाले राहगीरों के लिए यह इलाका विश्राम स्थल अथवा सराय के तौर पर मशहूर था। इनके नाम भी बाबू की सराय, हाकिम की सराय जैसे थे। उत्तरी हिस्से के बाजार का नाम मियां गंज था। एक अंग्रेज अफसर के नाम पर इसी से सटे बाजार का नाम पेरोनगंज रखा गया था। जिले के पहले अंग्रेज कलेक्टर क्लाउड रसेल के नाम पर एक बाजार का नाम रसेलगंज रखा गया था। अंग्रेजों की प्रतिस्पर्धा में हाकिम असद अली ने अपने नाम की एक सराय बनवाई थी। प्रशासनिक रिपोर्ट तैयार करने में अंग्रेजों ने ईमानदारी बरती और साफ लिखा कि पेरोन और डी बोइन नामक अफसरों ने शहर के विकास के लिए कुछ भी नहीं किया। दोनों अफसरों की कोठियां टाउन के बाहर साहिब बाग में थीं।
जारी...
स्रोत- अलीगढ़ का गजेटियर (1878-1909)

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