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पांच तरह के केमिकल और धातु से बनता है चाइनीज मांझा
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साधारण सा धागा किसी की जान भी ले सकता है यह बात सुनने में भले ही विश्वसनीय न लगे, लेकिन यह हकीकत है। प्रतिबंधित चाइनीज मांझा लोगों की जान भी ले रहा है।
रसायन विज्ञान के शिक्षक डॉ. एसपी सिंह कहते हैं कि चाइनीज मांझे को विशेष तौर पर तैयार किया जाता है। चाइनीज मांझे को बनाने में कुल पांच प्रकार के केमिकल और अन्य धातुओं का प्रयोग किया जाता है। इनमें सीसा, वजरम नामक औद्योगिक गौंद, मैदा फलौर, एल्युमीनियम आक्साइड और जिरकोनिया आक्साइड का प्रयोग होता है। इन सभी चीजों के मिक्स होने पर तेज धार वाला चाइनीज मांझा तैयार होता है।
इसके अलावा चाइनीज मांझे को जिस मैटलिक पाउडर से तैयार किया जाता है, उसकी वजह से मांझे में बिजली का प्रवाह बड़ी आसानी से हो जाता है। पतंग कटने के बाद मांझे के बिजली के तारों पर गिरने से न केवल आपूर्ति प्रभावित होती है बल्कि पतंग उड़ाने वाले को भी कई बार बिजली का झटका लग जाता है। इसके अलावा कांच के चूरे से राहगीर जख्मी हो जाते हैं।
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पक्षियों के लिए है काल
अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के वाइल्ड लाइफ साइंस डिपार्टमेंट के प्रोफेसर अफीफुउल्ला कहते हैं कि चाइनीज मांझा आसमान में उड़ान भर रहे परिंदों के लिए फांसी का फंदा है। अक्सर वह इसकी चपेट में आते हैं। कभी उनके पंख कट जाते हैं तो कभी बुरी तरह जख्मी हो जाते हैं। इस मांझे के इस्तेमाल से पक्षियों की मौत का आंकड़ा अभी उपलब्ध नहीं है, लेकिन इतना तय है कि सैकड़ों पक्षी प्रतिवर्ष अपनी जान गंवा देते हैं।
शांति समिति की बैठक में उठा था मुद्दा
इस दुर्घटना को लेकर अपर जिलाधिकारी नगर राकेश कुमार मालपाणी बताते हैं कि पिछले दिनों शांति समिति की बैठक में कोतवाली में यह मुद्दा उठा था। उस समय शहर के सभी थानेदार व मजिस्ट्रेटों को कहा गया था कि अपने अपने क्षेत्र में चाइनीज मांझे को लेकर विशेष निगरानी रखें।
पर्यावरण कानून के तहत मांझा प्रतिबंधित
एनजीटी के निर्देश पर यूपी सहित प्रदेश के कई राज्यों में चाइनीज मांझा प्रतिबंधित है। यूपी में वर्ष 2017 में इस पर प्रतिबंध लगा और तय किया गया कि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत इस मामले में पांच साल तक की सजा का प्रावधान होगा। इसके बाद लगातार जिलों से रिपोर्ट तलब की जाती हैं। पिछले दिनों अलीगढ़ जिले से इस मामले में किसी दुर्घटना या कार्रवाई को लेकर रिपोर्ट निल भेजी गई है।
इकलौती बेटी और बीवी को लेकर परिवार परेशान
सासनी गेट इलाके में हुई दुर्घटना के बाद परिवार सोमवीर की इकलौती बेटी व पत्नी को लेकर परेशान है। मजदूरी कर परिवार का निर्वहन करने वाले सोमवीर के जाने के बाद अब उसकी बेटी व पत्नी किसके सहारे रहेंगी। अब तक सोमवीर की मां भी खुद मजदूरी करती आ रही है।
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रसायन विज्ञान के शिक्षक डॉ. एसपी सिंह कहते हैं कि चाइनीज मांझे को विशेष तौर पर तैयार किया जाता है। चाइनीज मांझे को बनाने में कुल पांच प्रकार के केमिकल और अन्य धातुओं का प्रयोग किया जाता है। इनमें सीसा, वजरम नामक औद्योगिक गौंद, मैदा फलौर, एल्युमीनियम आक्साइड और जिरकोनिया आक्साइड का प्रयोग होता है। इन सभी चीजों के मिक्स होने पर तेज धार वाला चाइनीज मांझा तैयार होता है।
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इसके अलावा चाइनीज मांझे को जिस मैटलिक पाउडर से तैयार किया जाता है, उसकी वजह से मांझे में बिजली का प्रवाह बड़ी आसानी से हो जाता है। पतंग कटने के बाद मांझे के बिजली के तारों पर गिरने से न केवल आपूर्ति प्रभावित होती है बल्कि पतंग उड़ाने वाले को भी कई बार बिजली का झटका लग जाता है। इसके अलावा कांच के चूरे से राहगीर जख्मी हो जाते हैं।
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पक्षियों के लिए है काल
अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के वाइल्ड लाइफ साइंस डिपार्टमेंट के प्रोफेसर अफीफुउल्ला कहते हैं कि चाइनीज मांझा आसमान में उड़ान भर रहे परिंदों के लिए फांसी का फंदा है। अक्सर वह इसकी चपेट में आते हैं। कभी उनके पंख कट जाते हैं तो कभी बुरी तरह जख्मी हो जाते हैं। इस मांझे के इस्तेमाल से पक्षियों की मौत का आंकड़ा अभी उपलब्ध नहीं है, लेकिन इतना तय है कि सैकड़ों पक्षी प्रतिवर्ष अपनी जान गंवा देते हैं।
शांति समिति की बैठक में उठा था मुद्दा
इस दुर्घटना को लेकर अपर जिलाधिकारी नगर राकेश कुमार मालपाणी बताते हैं कि पिछले दिनों शांति समिति की बैठक में कोतवाली में यह मुद्दा उठा था। उस समय शहर के सभी थानेदार व मजिस्ट्रेटों को कहा गया था कि अपने अपने क्षेत्र में चाइनीज मांझे को लेकर विशेष निगरानी रखें।
पर्यावरण कानून के तहत मांझा प्रतिबंधित
एनजीटी के निर्देश पर यूपी सहित प्रदेश के कई राज्यों में चाइनीज मांझा प्रतिबंधित है। यूपी में वर्ष 2017 में इस पर प्रतिबंध लगा और तय किया गया कि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत इस मामले में पांच साल तक की सजा का प्रावधान होगा। इसके बाद लगातार जिलों से रिपोर्ट तलब की जाती हैं। पिछले दिनों अलीगढ़ जिले से इस मामले में किसी दुर्घटना या कार्रवाई को लेकर रिपोर्ट निल भेजी गई है।
इकलौती बेटी और बीवी को लेकर परिवार परेशान
सासनी गेट इलाके में हुई दुर्घटना के बाद परिवार सोमवीर की इकलौती बेटी व पत्नी को लेकर परेशान है। मजदूरी कर परिवार का निर्वहन करने वाले सोमवीर के जाने के बाद अब उसकी बेटी व पत्नी किसके सहारे रहेंगी। अब तक सोमवीर की मां भी खुद मजदूरी करती आ रही है।