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यही हैं गीता और रामायण की प्रतियां जिनका पीएम ने किया था जिक्र
Thu, 24 Dec 2020 01:53 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
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Published by: अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 24 Dec 2020 01:53 AM IST
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प्रशियन भाषा में अनुवादित रामायण
- फोटो : amar ujala
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एएमयू के शताब्दी वर्ष पर मुख्य अतिथि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मौलाना आजाद लाइब्रेरी में प्राचीन बेशकीमती पांडुलिपि होने की तारीफ की थी। साथ ही कहा था कि ये सब हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं, क्योंकि जहां संग्रहालय में कुरान है, वहीं, रामायण-श्रीमद्भगवत गीता की पांडुलिपि भी है। पीएम मोदी की तारीफ से एएमयू की फिजाओं में खुशियां तैर रही हैं।
एएमयू जनसंपर्क विभाग के एसोसिएट मेंबर इन इंचार्ज डॉ. राहत अबरार के अनुसार, देश के शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद 20 फरवरी 1949 को एएमयू में आयोजित दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए थे। मौलाना आजाद की मृत्यु के बाद एएमयू प्रशासन ने यूनिवर्सिटी की सेंट्रल लाइब्रेरी का नाम उनके नाम पर मौलाना आजाद लाइब्रेरी रखा। इस लाइब्रेरी की नींव 1955 में प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने रखी थी। 1960 में लाइब्रेरी का उन्होंने ही शुभारंभ किया था।
डॉ. राहत ने बताया कि यूनिवर्सिटी में 13.50 लाख से अधिक किताबें हैं। इनमें से 6.50 लाख किताबें मौलाना आजाद लाइब्रेरी में हैं। बाकी दूसरी जगहों पर हैं। लाइब्रेरी में पैगंबर इस्लाम मोहम्मद साहब के दामाद हजरत अली के हाथों हिरन की खाल की झिल्ली पर लिखी गई कुरान शरीफ है। 1829 में अकबर के दरबारी फैजी के हाथों फारसी में अनुवादित गीता भी यहां है। 400 साल पहले नकीब खां ने महाभारत का फारसी में अनुवाद पांडुलिपि भी यहां है। मुगल शासक युद्ध में विशेष प्रकार का कुर्ता पहनते थे, जो रक्षा कवच के रूप में माना जाता था। कुर्ते के दोनों तरफ कुरान की आयतें लिखी होती थीं। यह कुर्ता भी लाइब्रेरी में है। उन्होंने कहा कि खजूर के पेड़ की पत्तियों पर आयुर्वेद, धर्म लिखा है।
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एएमयू जनसंपर्क विभाग के एसोसिएट मेंबर इन इंचार्ज डॉ. राहत अबरार के अनुसार, देश के शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद 20 फरवरी 1949 को एएमयू में आयोजित दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए थे। मौलाना आजाद की मृत्यु के बाद एएमयू प्रशासन ने यूनिवर्सिटी की सेंट्रल लाइब्रेरी का नाम उनके नाम पर मौलाना आजाद लाइब्रेरी रखा। इस लाइब्रेरी की नींव 1955 में प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने रखी थी। 1960 में लाइब्रेरी का उन्होंने ही शुभारंभ किया था।
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डॉ. राहत ने बताया कि यूनिवर्सिटी में 13.50 लाख से अधिक किताबें हैं। इनमें से 6.50 लाख किताबें मौलाना आजाद लाइब्रेरी में हैं। बाकी दूसरी जगहों पर हैं। लाइब्रेरी में पैगंबर इस्लाम मोहम्मद साहब के दामाद हजरत अली के हाथों हिरन की खाल की झिल्ली पर लिखी गई कुरान शरीफ है। 1829 में अकबर के दरबारी फैजी के हाथों फारसी में अनुवादित गीता भी यहां है। 400 साल पहले नकीब खां ने महाभारत का फारसी में अनुवाद पांडुलिपि भी यहां है। मुगल शासक युद्ध में विशेष प्रकार का कुर्ता पहनते थे, जो रक्षा कवच के रूप में माना जाता था। कुर्ते के दोनों तरफ कुरान की आयतें लिखी होती थीं। यह कुर्ता भी लाइब्रेरी में है। उन्होंने कहा कि खजूर के पेड़ की पत्तियों पर आयुर्वेद, धर्म लिखा है।
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प्रशियन भाषा में अनुवादित श्रीमद्भागवत- फोटो : CITY OFFICE