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अलीगढ़ की बसें: जाम हैं इमरजेंसी गेट, ईंट के सहारे ब्रेक-कल्च, एक्सपायर सिलिंडर, बिखरा तारों का जाल

Thu, 18 Dec 2025 11:40 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Thu, 18 Dec 2025 11:40 AM IST
सार

कुछ रोडवेज बसों में चालक की सीट पर क्लच पैडल के पास ईंट रखी मिली। जानकारी करने पर पता चला कि चालकों की सीट और क्लच व ब्रेक पैडल तक चालकों के पैर ठीक से नहीं पहुंच पाते। सीटें एडजेस्ट नहीं हो पाती है। लगातार पैर की एडी को उन्हें उठाकर रखना पड़ता है। ऐसे में उन्होंने ईंट का जुगाड़ ढूंढ निकाला।

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Aligarh buses invite accidents
ईंट के सहारे ब्रेक और क्लच, दूसरे चित्र में एक्सपायर आग बुझाने के सिलिंडर - फोटो : संवाद

विस्तार

अगर कभी जरूरत पड़ी तो बस का इमरजेंसी द्वार खोलना आसान नहीं होगा। क्योंकि कहीं लॉक लगाया गया है तो कहीं जंक लगने से बेकार हो गया है। क्योंकि कभी खोला नहीं जाता तो जाम भी हो गया है। इतना ही नहीं चालक की सीट के पास पूरा केबिल का जाल बन गया है जो भी बड़ा खतरा है। आए दिन स्पार्किंग होने की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं। यमुना एक्सप्रेस-वे पर हुए हादसे के बाद भी अधिकारी सतर्क नहीं हुए हैं। यात्रियों की सुरक्षा को लेकर मुकम्मल इंतजाम नहीं हो रहे हैं।

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उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की अलग-अलग मार्गों पर चल रही यात्री बसों में न तो सुरक्षा के प्रबंध हैं और न ही अन्य सुविधाएं। जबकि हर रोज जिले के हजारों लोग रोडवेज बसों से सफर करते हैं। रोडवेज की खस्ताहाल बसें सुविधाजनक सफर को मुश्किल भरा बना रही हैं। इन बसों में दिए गए आपातकालीन द्वार ( इमरजेंसी गेट ) कभी नहीं खुलते।
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मसूदाबाद व सारसाैल बस स्टैंड पर खड़ी 20 से अधिक बसों की बुधवार को की गई पड़ताल में यही निष्कर्ष निकलकर सामने आया। रोडवेज कर्मियों से ही बसों के इमरजेंसी गेट खुलवाने का प्रयास किया गया, लेकिन वे खुले ही नहीं। केवल एक बस का इमरजेंसी गेट खुल पाया। जाहिर है, कभी जरूरत पड़ी तो रोडवेज बसों के आपातकालीन द्वार धोखा दे देंगे। सबसे खास बात है कि इनमें से सिर्फ चार बसों में ही इमरजेंसी गेट सही हालत में मिले जो आसानी से खोलने पर खुल गए। जबकि 16 बसों में किसी में लाॅक लगा मिला तो तो किसी में जुगाड़ से इमरजेंसी का गेट बंद कर रखा गया था। जिन्हें खोलना आसान नहीं था। रोडवेज कर्मियों ने तर्क दिया कि कई साल से न खुलने के कारण ये जाम हो गए हैं। बस सर्विस के दौरान भी इमरजेंसी गेट खोल व बंदकर नहीं देखे जाते।

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कोहरे को लेकर सभी वर्कशाॅप प्रभारियों को निर्देशित किया गया है कि सभी डिपो की बसों को जांच के लिए वर्कशॉप में भेजा जाए। जहां से शीशे, दरवाजे, इमरजेंसी गेट खराब मिलें उन्हें तत्काल ठीक कराया जाए। चालक-परिचालकों को गेट खोलने की ट्रेनिंगं दी जाती है।- सत्येंद्र वर्मा, क्षेत्रीय प्रबंधक रोडवेज

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चालक सीट के पास तारों का बिखरा जाल

रोडवेज बसों में चालक की सीट के पास तारों का जाल फैला हुआ था। इनके स्पार्किंग हुई तो बस को आग का गोला बनते देर नहीं लगेगी। इमरजेंसी द्वार पहले से ही बंद है, मथुरा जैसे हादसा होने पर बचाव क्या स्थिति होगी, इसकी कल्पना ही डराती है। ये हाल तो तब है कि बसों में आग लगने की कई घटनाएं हो चुकी है। नवंबर माह में जट्टारी में रोडवेज की सीएनजी बस में शार्ट सर्किट से पूरी बस में धुआं भर गया था। मई माह में अकराबाद टोल के पास बिल्हौर से पानीपत जा रही निजी बस में आग लग गई थी।
नहीं खुलता बस का इमरजेंसी गेट व खुला वायरिंग का जालजुगाड़ पर टिका क्लच
कुछ रोडवेज बसों में चालक की सीट पर क्लच पैडल के पास ईंट रखी मिली। जानकारी करने पर पता चला कि चालकों की सीट और क्लच व ब्रेक पैडल तक चालकों के पैर ठीक से नहीं पहुंच पाते। सीटें एडजेस्ट नहीं हो पाती है। लगातार पैर की एडी को उन्हें उठाकर रखना पड़ता है। ऐसे में उन्होंने ईंट का जुगाड़ ढूंढ निकाला। इससे उनके पैर की एडी और पंजे की पहुंच आसानी से कल्च तक हो जाती है। लेकिन यह जुगाड़ फेल भी हो सकता है, ईंट सरक कर ब्रेक के पास तक पहुंची को ब्रेक लगाने में समस्या हो सकती है।

आग बुझाने के सिलिंडर भी हो गए हैं एक्सपायर
कहने के लिए तो रोडवेज बसों में आग बुझाने के सिलिंडर भी रखे गए हैं, लेकिन उनमें अधिकांश एक्सपायर हो चुके हैं। पड़ताल में एक बस में रखे सिलिंडर को देखा गया तो उसकी हालत यह थी कि जरूरत पड़ने पर यह काम भी आएगा या नहीं, इस पर संश्य है।

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