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Aligarh News: 113 साल की परंपरा, 20 दस्तरखान और 40 हजार लोग

Sun, 18 Oct 2026 02:59 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 18 Oct 2026 02:59 AM IST
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A 113-year-old tradition, 20 communal dining spreads (dastarkhans), and 40,000 people
सर सैयद डे पर हॉस्टल में खाना खाते छात्र। संवाद
शेरवानी-पायजामे में सजे छात्र, सफेद सलवार-कमीज और दुपट्टे में छात्राएं, कतारों में सजे दस्तरखान और उन पर परोसे जाते लजीज पकवान। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में सर सैयद डे पर 113 साल पुरानी दावत की परंपरा एक बार फिर पूरे शान-ओ-शौकत के साथ निभाई गई।
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यूनिवर्सिटी के 20 हॉलों में दस्तरखान सजे और करीब 40 हजार विद्यार्थियों, शिक्षकों व मेहमानों ने दावत का लुत्फ उठाया। गोश्त के कोरमे से लेकर बिरयानी, पुलाव, रोटी और शाही टुकड़े तक का बड़े पैमाने पर इंतजाम किया गया।
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सर सैयद डे पर सामूहिक दावत की परंपरा वर्ष 1913-14 में शुरू हुई थी। शुरुआती दौर में एसएस हॉल में कई हॉलों के विद्यार्थी एक साथ बैठकर खाना खाते थे। वर्ष 2000 के बाद विद्यार्थियों और हॉलों की संख्या बढ़ने के कारण दावत की व्यवस्था अलग-अलग हॉलों में शुरू हो गई। अब हर हॉल में विद्यार्थियों और मेहमानों के लिए दस्तरखान सजाए जाते हैं।
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दावत के आंकड़े एक नजर में

परंपरा की शुरुआत : वर्ष 1913-14

दस्तरखान : 20 हॉलों में

कुल लोग : करीब 40 हजार, जिनमें मेहमान भी शामिल

यूनिवर्सिटी में विद्यार्थी : करीब 27 हजार

बकरे : करीब 800

बिरयानी : करीब 40 क्विंटल

पुलाव : करीब 35 क्विंटल

रोटी : करीब 15 क्विंटल

शाही टुकड़ा : करीब 40 क्विंटल
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