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दशकों से दबा गुबार अब रिसने के कगार पर
Aligarh
Updated Sun, 29 Jul 2012 12:00 PM IST
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अलीगढ़। एएमयू में लगातार कई वर्ष से डेली वेजर के रूप में कार्य कर रहे एक हजार से अधिक कर्मचारियों की वेदना अब मुखर हो रही है। शुक्रवार की रात अवसाद से ग्रस्त होकर एक डेली वेजर द्वारा सल्फास खाने की घटना इसी कड़ी का ताजा क्रम है। यह माना जा रहा है कि भविष्य के प्रति आर्थिक असुरक्षा, बढ़ती महंगाई और पारिवारिक दायित्वों के चलते एएमयू के डेली वेजर्स अपनी स्थिति को लेकर चिंतित हैं। इसे भविष्य में किसी उग्र आंदोलन होने की आशंकाओं से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
एएमयू में एक हजार से भी ज्यादा डेली वेजर्स हैं। इनमें से बहुत से तो एक से दो दशक पुराने हैं। यह डेली वेजर्स एएमयू के किसी नियमित कर्मचारी के बराबर ही काम करते हैं, लेकिन उनकी तुलना में इनका वेतन पांच गुने से भी ज्यादा कम है। साथ ही यह उस प्रकार की सेवा शर्तों का लाभ नहीं पाते हैं, जैसा कि एएमयू के नियमित कर्मचारी पाते हैं। इस विषमता पूर्ण स्थिति से उनमें हीनभावना घर कर जाती है, इसका प्रभाव उनकी कार्यक्षमता और मानसिक स्थिति पर भी पड़ता है।
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-किसी भी कर्मचारी के लिए भविष्य की आर्थिक सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण चीज है। असुरक्षा होने पर कर्मचारी अवसाद में चला जाता है, जिसकी परिणती आत्मघाती कदम के रूप में भी देखी जाती है। कुछ कर्मचारी गलत कदम या भ्रष्टाचारी कार्यप्रणाली अपनाने को भी विवश हो जाते हैं। संस्थान के लिए यह जरूरी है कि वह अपने कर्मचारियों की आर्थिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखे और उनकी सेवा शर्तों को नियमानुसार बनाए।-डा.रामप्रकाश मनोविज्ञानी
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कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन
शुक्रवार की रात एएमयू सुरक्षाकर्मी के आत्महत्या के प्रयास के बाद एएमयू के अन्य डेली वेजर्स भी आंदोलन की मुद्रा में आ गए हैं। शनिवार की शाम को सैकड़ों डेली वेजर्स ने एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लाक पर एकत्रित होकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी रजिस्ट्रार से मिलकर अपनी बात रखना चाहते थे और खुद को नियमित करने की मांग कर रहे थे। एक प्रदर्शनकारी ने बताया कि वह पंद्रह साल से दैनिक वेतन भोगी है। घर में शादी के लिए बेटियां जवान हो गई हैं। मां का इलाज भी करवाना होता है। इसकी ऐवज में जो वेतन मिलता है, वह बेहद कम है। एएमयू इंतजामिया को चाहिए कि वह योग्यता के आधार पर उनका धीरे-धीरे नियमितीकरण कर दे।
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एएमयू में एक हजार से भी ज्यादा डेली वेजर्स हैं। इनमें से बहुत से तो एक से दो दशक पुराने हैं। यह डेली वेजर्स एएमयू के किसी नियमित कर्मचारी के बराबर ही काम करते हैं, लेकिन उनकी तुलना में इनका वेतन पांच गुने से भी ज्यादा कम है। साथ ही यह उस प्रकार की सेवा शर्तों का लाभ नहीं पाते हैं, जैसा कि एएमयू के नियमित कर्मचारी पाते हैं। इस विषमता पूर्ण स्थिति से उनमें हीनभावना घर कर जाती है, इसका प्रभाव उनकी कार्यक्षमता और मानसिक स्थिति पर भी पड़ता है।
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-किसी भी कर्मचारी के लिए भविष्य की आर्थिक सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण चीज है। असुरक्षा होने पर कर्मचारी अवसाद में चला जाता है, जिसकी परिणती आत्मघाती कदम के रूप में भी देखी जाती है। कुछ कर्मचारी गलत कदम या भ्रष्टाचारी कार्यप्रणाली अपनाने को भी विवश हो जाते हैं। संस्थान के लिए यह जरूरी है कि वह अपने कर्मचारियों की आर्थिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखे और उनकी सेवा शर्तों को नियमानुसार बनाए।-डा.रामप्रकाश मनोविज्ञानी
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कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन
शुक्रवार की रात एएमयू सुरक्षाकर्मी के आत्महत्या के प्रयास के बाद एएमयू के अन्य डेली वेजर्स भी आंदोलन की मुद्रा में आ गए हैं। शनिवार की शाम को सैकड़ों डेली वेजर्स ने एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लाक पर एकत्रित होकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी रजिस्ट्रार से मिलकर अपनी बात रखना चाहते थे और खुद को नियमित करने की मांग कर रहे थे। एक प्रदर्शनकारी ने बताया कि वह पंद्रह साल से दैनिक वेतन भोगी है। घर में शादी के लिए बेटियां जवान हो गई हैं। मां का इलाज भी करवाना होता है। इसकी ऐवज में जो वेतन मिलता है, वह बेहद कम है। एएमयू इंतजामिया को चाहिए कि वह योग्यता के आधार पर उनका धीरे-धीरे नियमितीकरण कर दे।