{"_id":"6-17035","slug":"Aligarh-17035-6","type":"story","status":"publish","title_hn":"आखिरी चाय भी साथ नहीं पीने दी...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आखिरी चाय भी साथ नहीं पीने दी...
Aligarh
Updated Wed, 29 Jan 2014 05:44 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अलीगढ़। एडीए के जिस एमआईजी 87 में रिटायर्ड रीडर दंपति के घर मंगलवार सुबह-सुबह हत्यायुक्त लूट की घटना को अंजाम दिया गया। उसे देख और सुनकर पॉश कॉलोनी में रहने वाले लोग दहशत में आ गए। हां, रीडर दंपति की दिनचर्या को सुन-समझकर एक बात जरूर हर मुंह से निकल रही थी कि कमबख्तों ने आखिरी बार साथ चाय भी नहीं पीने दी। खुद आनंद प्रकाश को इस बात का बेहद मलाल था। उनके चेहरे के हाव-भाव बता रहे थे कि वह सांध्य प्रभा को अपने हाथ की बनी आखिरी चाय भी नहीं पिला पाया। दूसरी बात शुरू से ही हर व्यक्ति नौकरानी को शक के दायरे में ले रहा था। वजह थी उसका अचानक गायब होना और घर के नक्शे व टाइमिंग की बारीकी से समझ होना।
कुछ इस तरह है नक्शा-टाइमिंग
नौकरानी को पता है कि आनंद प्रकाश के मकान में रहने वाले किरायेदार का मकान मालिक के हिस्से से कोई वास्ता नहीं है। आनंद प्रकाश के हिस्से में प्रवेश के लिए सीधे बैठक में घुसो और वहां से पूरे घर में घूम सकते हैं। नीचे बने बाथरूम साइड से झीना ऊपर जाता है, जहां रसोई के सहारे का दरवाजा मुख्य घर में खुलता है। बस अंदर घुसने पर सबसे पहले झीने से नीचे आकर रसोई के बराबर वाला दरवाजा बंद किया गया। ताकि अगर ऊपर से कोई आए तो दरवाजा बंद होने पर देख न सके। दूसरी बात नौकरानी को यह भी पता था कि सुबह सात बजे आनंद प्रकाश छत पर नहाने चले जाते हैं। एक घंटे का समय लगता है। इस बीच घटना को अंजाम दिया जा सकता है।
कुछ इस तरह रहा घटनाक्रम
आनंद प्रकाश के अनुसार घर में कीर्ती सफाई के लिए सुबह आती है, जबकि उसकी मां रेखा दोपहर में खाना बनाने आती है। रेखा पिछले आठ साल से घर में काम कर रही है। सुबह जब नहाते समय डोर बैल सुनाई दी तो आनंद ने समझा कि कीर्ती आई होगी, क्योंकि उसके आने का वक्त हो गया था। इसके बाद जब नीचे आने पर अंदर से दरवाजा नहीं खुला तो उनके मन में किसी तरह का बुरा खयाल नहीं था। बस यही समझ रहे थे कि कीर्ती चली गई है और सांध्य प्रभा दरवाजा लगाकर भूल गई होंगी। मगर किरायेदार के बच्चे की मदद से जब दरवाजा खुलवाया तो आंखें फटी रह गईं। आनंद हर रोज सुबह की चाय खुद बनाया करते थे। नहाने के बाद नीचे आकर वह सीधे चाय बनाने जा रहे थे। इसके बाद न वह चाय पी पा रहे थे और न दवा खा पा रहे थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
कुछ इस तरह है नक्शा-टाइमिंग
नौकरानी को पता है कि आनंद प्रकाश के मकान में रहने वाले किरायेदार का मकान मालिक के हिस्से से कोई वास्ता नहीं है। आनंद प्रकाश के हिस्से में प्रवेश के लिए सीधे बैठक में घुसो और वहां से पूरे घर में घूम सकते हैं। नीचे बने बाथरूम साइड से झीना ऊपर जाता है, जहां रसोई के सहारे का दरवाजा मुख्य घर में खुलता है। बस अंदर घुसने पर सबसे पहले झीने से नीचे आकर रसोई के बराबर वाला दरवाजा बंद किया गया। ताकि अगर ऊपर से कोई आए तो दरवाजा बंद होने पर देख न सके। दूसरी बात नौकरानी को यह भी पता था कि सुबह सात बजे आनंद प्रकाश छत पर नहाने चले जाते हैं। एक घंटे का समय लगता है। इस बीच घटना को अंजाम दिया जा सकता है।
विज्ञापन
कुछ इस तरह रहा घटनाक्रम
आनंद प्रकाश के अनुसार घर में कीर्ती सफाई के लिए सुबह आती है, जबकि उसकी मां रेखा दोपहर में खाना बनाने आती है। रेखा पिछले आठ साल से घर में काम कर रही है। सुबह जब नहाते समय डोर बैल सुनाई दी तो आनंद ने समझा कि कीर्ती आई होगी, क्योंकि उसके आने का वक्त हो गया था। इसके बाद जब नीचे आने पर अंदर से दरवाजा नहीं खुला तो उनके मन में किसी तरह का बुरा खयाल नहीं था। बस यही समझ रहे थे कि कीर्ती चली गई है और सांध्य प्रभा दरवाजा लगाकर भूल गई होंगी। मगर किरायेदार के बच्चे की मदद से जब दरवाजा खुलवाया तो आंखें फटी रह गईं। आनंद हर रोज सुबह की चाय खुद बनाया करते थे। नहाने के बाद नीचे आकर वह सीधे चाय बनाने जा रहे थे। इसके बाद न वह चाय पी पा रहे थे और न दवा खा पा रहे थे।
विज्ञापन