{"_id":"5aa830e94f1c1bab758b543e","slug":"4-5-mw-amu-present-in-solar-energy-production","type":"story","status":"publish","title_hn":"4.5 मेगावाट : सौर ऊर्जा उत्पादन में एएमयू ने पेश की मिसाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
4.5 मेगावाट : सौर ऊर्जा उत्पादन में एएमयू ने पेश की मिसाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला अलीगढ़
Updated Wed, 14 Mar 2018 01:53 AM IST
विज्ञापन
एएमयू का तीन मेगावाट का सोलर एनर्जी प्लांट जो फोटो वोल्टिक तकनीकी पर काम करता है।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अंतरराष्ट्रीय सौर गठजोड़ (आईएसए) के सम्मेलन में बीते शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी फोटो वोल्टिक सेल तकनीक से बिजली उत्पादन का हिस्सा बढ़ाने का आह्वान किया। गौरतलब है कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में दिसंबर 2017 में चालू हुआ तीन मेगावाट का सोलर प्लांट इसी फोटो वोल्टिक सेल तकनीक पर बनाया गया है। देश के किसी भी शिक्षण संस्थान में लगा ये सबसे बड़ा सोलर एनर्जी प्लांट है। यह लगभग डेढ़ साल के वक्त में 20 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है।
एएमयू के इलेक्ट्रिसिटी डिपार्टमेंट के मेंबर इंचार्ज डॉ. मोहम्मद रेहान ने बताया कि एएमयू के हार्स राइडिंग ग्राउंड में इसकी स्थापना की गई है। यहां पर वेदर मानीटरिंग सिस्टम से मौसम का पूर्वानुमान लगाया जाता है। जिससे सौर ऊर्जा उत्पादन का प्रतिदिन का लक्ष्य तय होता है। आसमानी बिजली से पूरे प्लांट को कोई नुकसान न हो, इसके लिए दो लाइटिंग एमेस्टर उपकरण भी लगाए गए हैं जो आसमानी बिजली को सीधे जमीन के अंदर उतार देते हैं।
प्लांट को चलाने के लिए एएमयू के इलेक्ट्रिकल विभाग के कर्मचारी और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के कुछ इंजीनियर यहां तैनात रहते हैं। 33 केवीए का एक ट्रांसफार्मर, इनवर्टर और दूसरे उपकरण भी यहां मौजूद हैं। बिजली बनाने के बाद उसे कैंपस में इस्तेमाल करते हैं। इस प्लांट के अलावा एएमयू परिसर में अलग-अलग स्थानों पर लगे सोलर प्लांट से लगभग डेढ़ मेगावाट का उत्पादन होता है। इस तरह से एएमयू में वर्तमान में लगभग साढ़े चार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है, जो एएमयू की कुल बिजली की खपत का लगभग 35 फीसदी है।
विज्ञापन
बहरहाल, एएमयू के इस प्लांट को छोड़ दें तो सरकारी स्तर पर वर्तमान में कोई दूसरा बड़ा सोलर प्लांट नहीं है। प्राइवेट स्कूलों, ऑटो सर्विस, कारखानों से लेकर दुकानों और घरों तक अब सोलर एनर्जी के छोटे-छोटे प्लांट लग रहे हैं। यूपी नेडा के अधिकारी की मानें तो वर्तमान में अलीगढ़ जिले में एएमयू को मिला कर लगभग पौने पांच मेगावाट बिजली का उत्पादन सौर ऊर्जा से हो रहा है।
एएमयू का सोलर प्लांट एक नजर में
23 लाइनों में लगे हैं 10480 सोलर मॉडयूल प्लेट
3 मेगावाट का उत्पादन कर रहा 20 करोड़ से बना प्लांट
वेदर मानीटरिंग सिस्टम और लाइटिंग एमेस्टर भी लगा है
एक गीगावाट क्या है..?
एक हजार वाट से बनता है एक किलोवाट
एक हजार किलोवाट से बनता है एक मेगावाट
एक हजार मेगावाट से बनता है एक गीगावाट
न्यूट्रीनों से ऊर्जा उत्पादन में भी एएमयू कर रहा मदद
एएमयू के 64वें दीक्षांत समारोह में जापान के नोबेल पुरस्कार विजेता भौतिक विज्ञानी तकाकी कजिता को मानद उपाधि दी गई थी। जापान के सहयोग से ही दक्षिण भारत के कर्नाटक में एक लैब में न्यूट्रीनों से ऊर्जा उत्पादन के लिए शोध जारी है। न्यूट्रीनों की खोज के लिए ही जापानी वैज्ञानिक को नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया था। अब एएमयू के भौतिक विज्ञानी दक्षिण भारत स्थापित इस लैब में काम कर रहे हैं। एएमयू के सेवानिवृत्त भौतिक विज्ञानी प्रो. वसी हैदर कहते हैं न्यूट्रीनो से ऊर्जा उत्पादन शुरू होने के बाद ऊर्जा क्षेत्र में बहुत बड़ा बदलाव होगा। ये ऊर्जा उत्पादन में क्रांति पैदा करेगा और दुनिया इससे रोशन हो जाएगी क्योंकि सूर्य अक्षुण्ण ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत है।
एएमयू इको क्लब के तत्वावधान में ऊर्जा संरक्षण अभियान का शुभारंभ किया गया है। इसका उद्देश्य एएमयू के छात्रावासों में छात्रों को जागरूक कर बिजली की बर्बादी रोकना एवं धन की बचत कर उपयोगी कार्य में इस्तेमाल करना है। मंगलवार को एएमयू वीमेंस कॉलेज परिसर में जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। इससे पूर्व स्ट्रेची हॉल में आयोजन किया गया था। कुलपति के निर्देश पर सभी छात्रावासों में ऊर्जा संरक्षण कक्ष भी स्थापित किये जा रहे हैं। एमआईसी इलेक्ट्रीसिटी मो. रेहान एवं यूजीसी एकेडमिक स्टॉफ कॉलेज की डॉ. फायजा अब्बासी आदि छात्र-छात्राओं को ऊर्जा संरक्षण के तरीके बता रहे हैं। क्लब के अध्यक्ष डॉ. मो. अरशद बारी, सचिव फुरकान अहमद, मो. अनस आदि मौजूद थे। उल्लेखनीय है कि पिछले कुलपति जमीरउद्दीन शाह के जमाने से ही एएमयू में ऊर्जा संरक्षण एवं सौर ऊर्जा पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि एएमयू का सालाना बिजली बिल 30 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। बिजली बिल के भारी भरकम खर्च को रोकने के लिए करोड़ाें की लागत से सोलर प्लांट लगाए गए हैं।
1-वर्ष 1993 में अतरौली के कल्यानपुर गांव में लगाया गया 100 किलोवाट का सौर ऊर्जा प्लांट वर्ष 2016 में नीलाम हो गया। इसकी नीलामी 20 लाख रुपये में हुई थी। प्रायोगिक तौर पर लगा ये प्लांट 20 वर्ष की अवधि के लिए था।
2-शहर में प्राइवेट स्कूलों, ऑटो सर्विस और कारखानों में सोलर प्लांट लग रहे हैं जो बिजली उत्पादन कर रहे हैं। सरकारी स्तर पर एएमयू के प्लांट को छोड़ कर कोई बड़ा प्लांट नहीं है।
3- सपा सरकार में तत्कालीन बिजली विभाग के मुख्य अभियंता बीएस गंगवार ने सौर ऊर्जा मेला लगवाया था, जिसमें सरकारी विभागों में ऐसे प्लांट लगाने की बात तय हुई थी।
4-बिजली घरों, सरकारी कार्यालयों में सौर ऊर्जा प्लांट आवश्यक रूप से लगवाने की प्रक्रिया जारी है, कलेक्ट्रेट, विकास भवन और आयकर भवन में इसकी स्थापना जल्द होगी।
5-शहर के बीचोंबीच देव मोटर्स ने 50 किलोवाट का सोलर प्लांट एक बेहतरीन प्रयास है, जिसमें दो साल से बिजली बन रही है। ये प्लांट पूरे शो रूम को बिजली दे रहा है।
विज्ञापन
एएमयू के इलेक्ट्रिसिटी डिपार्टमेंट के मेंबर इंचार्ज डॉ. मोहम्मद रेहान ने बताया कि एएमयू के हार्स राइडिंग ग्राउंड में इसकी स्थापना की गई है। यहां पर वेदर मानीटरिंग सिस्टम से मौसम का पूर्वानुमान लगाया जाता है। जिससे सौर ऊर्जा उत्पादन का प्रतिदिन का लक्ष्य तय होता है। आसमानी बिजली से पूरे प्लांट को कोई नुकसान न हो, इसके लिए दो लाइटिंग एमेस्टर उपकरण भी लगाए गए हैं जो आसमानी बिजली को सीधे जमीन के अंदर उतार देते हैं।
विज्ञापन
प्लांट को चलाने के लिए एएमयू के इलेक्ट्रिकल विभाग के कर्मचारी और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के कुछ इंजीनियर यहां तैनात रहते हैं। 33 केवीए का एक ट्रांसफार्मर, इनवर्टर और दूसरे उपकरण भी यहां मौजूद हैं। बिजली बनाने के बाद उसे कैंपस में इस्तेमाल करते हैं। इस प्लांट के अलावा एएमयू परिसर में अलग-अलग स्थानों पर लगे सोलर प्लांट से लगभग डेढ़ मेगावाट का उत्पादन होता है। इस तरह से एएमयू में वर्तमान में लगभग साढ़े चार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है, जो एएमयू की कुल बिजली की खपत का लगभग 35 फीसदी है।
विज्ञापन
बहरहाल, एएमयू के इस प्लांट को छोड़ दें तो सरकारी स्तर पर वर्तमान में कोई दूसरा बड़ा सोलर प्लांट नहीं है। प्राइवेट स्कूलों, ऑटो सर्विस, कारखानों से लेकर दुकानों और घरों तक अब सोलर एनर्जी के छोटे-छोटे प्लांट लग रहे हैं। यूपी नेडा के अधिकारी की मानें तो वर्तमान में अलीगढ़ जिले में एएमयू को मिला कर लगभग पौने पांच मेगावाट बिजली का उत्पादन सौर ऊर्जा से हो रहा है।
एएमयू का सोलर प्लांट एक नजर में
23 लाइनों में लगे हैं 10480 सोलर मॉडयूल प्लेट
3 मेगावाट का उत्पादन कर रहा 20 करोड़ से बना प्लांट
वेदर मानीटरिंग सिस्टम और लाइटिंग एमेस्टर भी लगा है
एक गीगावाट क्या है..?
एक हजार वाट से बनता है एक किलोवाट
एक हजार किलोवाट से बनता है एक मेगावाट
एक हजार मेगावाट से बनता है एक गीगावाट
न्यूट्रीनों से ऊर्जा उत्पादन में भी एएमयू कर रहा मदद
एएमयू के 64वें दीक्षांत समारोह में जापान के नोबेल पुरस्कार विजेता भौतिक विज्ञानी तकाकी कजिता को मानद उपाधि दी गई थी। जापान के सहयोग से ही दक्षिण भारत के कर्नाटक में एक लैब में न्यूट्रीनों से ऊर्जा उत्पादन के लिए शोध जारी है। न्यूट्रीनों की खोज के लिए ही जापानी वैज्ञानिक को नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया था। अब एएमयू के भौतिक विज्ञानी दक्षिण भारत स्थापित इस लैब में काम कर रहे हैं। एएमयू के सेवानिवृत्त भौतिक विज्ञानी प्रो. वसी हैदर कहते हैं न्यूट्रीनो से ऊर्जा उत्पादन शुरू होने के बाद ऊर्जा क्षेत्र में बहुत बड़ा बदलाव होगा। ये ऊर्जा उत्पादन में क्रांति पैदा करेगा और दुनिया इससे रोशन हो जाएगी क्योंकि सूर्य अक्षुण्ण ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत है।
एएमयू इको क्लब के तत्वावधान में ऊर्जा संरक्षण अभियान का शुभारंभ किया गया है। इसका उद्देश्य एएमयू के छात्रावासों में छात्रों को जागरूक कर बिजली की बर्बादी रोकना एवं धन की बचत कर उपयोगी कार्य में इस्तेमाल करना है। मंगलवार को एएमयू वीमेंस कॉलेज परिसर में जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। इससे पूर्व स्ट्रेची हॉल में आयोजन किया गया था। कुलपति के निर्देश पर सभी छात्रावासों में ऊर्जा संरक्षण कक्ष भी स्थापित किये जा रहे हैं। एमआईसी इलेक्ट्रीसिटी मो. रेहान एवं यूजीसी एकेडमिक स्टॉफ कॉलेज की डॉ. फायजा अब्बासी आदि छात्र-छात्राओं को ऊर्जा संरक्षण के तरीके बता रहे हैं। क्लब के अध्यक्ष डॉ. मो. अरशद बारी, सचिव फुरकान अहमद, मो. अनस आदि मौजूद थे। उल्लेखनीय है कि पिछले कुलपति जमीरउद्दीन शाह के जमाने से ही एएमयू में ऊर्जा संरक्षण एवं सौर ऊर्जा पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि एएमयू का सालाना बिजली बिल 30 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। बिजली बिल के भारी भरकम खर्च को रोकने के लिए करोड़ाें की लागत से सोलर प्लांट लगाए गए हैं।
1-वर्ष 1993 में अतरौली के कल्यानपुर गांव में लगाया गया 100 किलोवाट का सौर ऊर्जा प्लांट वर्ष 2016 में नीलाम हो गया। इसकी नीलामी 20 लाख रुपये में हुई थी। प्रायोगिक तौर पर लगा ये प्लांट 20 वर्ष की अवधि के लिए था।
2-शहर में प्राइवेट स्कूलों, ऑटो सर्विस और कारखानों में सोलर प्लांट लग रहे हैं जो बिजली उत्पादन कर रहे हैं। सरकारी स्तर पर एएमयू के प्लांट को छोड़ कर कोई बड़ा प्लांट नहीं है।
3- सपा सरकार में तत्कालीन बिजली विभाग के मुख्य अभियंता बीएस गंगवार ने सौर ऊर्जा मेला लगवाया था, जिसमें सरकारी विभागों में ऐसे प्लांट लगाने की बात तय हुई थी।
4-बिजली घरों, सरकारी कार्यालयों में सौर ऊर्जा प्लांट आवश्यक रूप से लगवाने की प्रक्रिया जारी है, कलेक्ट्रेट, विकास भवन और आयकर भवन में इसकी स्थापना जल्द होगी।
5-शहर के बीचोंबीच देव मोटर्स ने 50 किलोवाट का सोलर प्लांट एक बेहतरीन प्रयास है, जिसमें दो साल से बिजली बन रही है। ये प्लांट पूरे शो रूम को बिजली दे रहा है।