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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   35 kg of books, sold at the flea Massab

मास्साब ने कबाड़ी के यहां बेच डालीं 35 किलो किताबें

Sun, 25 Sep 2016 01:28 AM IST
अमर उजाला, अलीगढ़
अमर उजाला, अलीगढ़ Updated Sun, 25 Sep 2016 01:28 AM IST
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 एक तरफ जहां सरकार शिक्षा के नाम पर अरबों रुपये खर्च कर रही है। वहीं दूसरी ओर महज चंद रुपयों के लिए कुछ अध्यापकों की करतूतों से पूरा समाज शर्मसार हो रहा है और शिक्षा अभियान को पलीता लग रहा है। शनिवार को कस्बा छेरत के एक कबाड़ी के यहां एक प्राइमरी स्कूल का मास्टर नौनिहालों को मिलने वाली किताबें रद्दी के भाव बेच गया। इन किताबों को बीएसए के निर्देश पर बीईओ ने इस दुकान से बरामद किया है। अब इस अध्यापक की तलाश की जा रही है।
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सर्व शिक्षा अभियान के तहत कक्षा आठ तक के परिषदीय स्कूलों के बच्चों को निशुल्क पाठ्य पुस्तकों का वितरण होता है। इसका उद्देश्य बच्चों को अच्छी शिक्षा देना है, लेकिन कुछ अध्यापकों की करतूत कुछ और ही चीज बयां करती हैं।
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शनिवार को बीएसए धीरेंद्र कुमार को यह जानकारी मिली छेरत के एक कबाड़ी की दुकान पर 35 किलो किताबें रद्दी के भाव बेची गई हैं। यह वही किताबें हैं, जिन्हें कि बच्चों को पढ़ने के लिए निशुल्क वितरित किया जाना था। इस पर बीएसए ने बीईओ जवां अनिल कुमार को वहां भेजा तो बीईओ ने इस कबाड़ी की दुकान से यह किताबें बरामद की। पूछताछ में पता चला कि निकटवर्ती गांव धौर्रा माफी के एक परिषदीय स्कूल का मास्टर यह किताबें केवल 350 रुपये में बेचकर गया है।
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बीईओ ने इसकी सूचना बीएसए को दे दी। बाद में जब बीईओ गांव धौर्रा माफी गए तब तक स्कूल बंद हो चुका था। उन्होंने वहां ग्रामीणों से भी पूछताछ की, लेकिन इस अध्यापक का पता नहीं चल सका। बीएसए धीरेंद्र कुमार का कहना है कि सोमवार को स्कूल खुलने पर दोनों स्कूलों के स्टॉफ का कबाड़ी से आमना-सामना कराया जाएगा, तब यह स्पष्ट होगा कि यह किस अध्यापक की करतूत है।   
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