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विश्व संग्रहालय दिवस 2024: शाहजहां की वो प्लेट, जिसमें जहरीला खाना रखते ही बदल जाता था रंग; फिर टूट जाती थी
Sat, 18 May 2024 10:18 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 18 May 2024 10:18 AM IST
सार
मुगल बादशाह शाहजहां को जिस प्लेट में खाना दिया जाता था, वो बेहद खास थी। इस प्लेट में यदि जहरीला खाना परोसा जाता तो ये रंग बदलती है। इतना ही नहीं बाद में ये टूट भी जाती है। ये प्लेट म्यूजियम में रखी हुई है।
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ज़हरीला खाना डालते ही टूट जाती थी शाहजहां की प्लेट...
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आगरा का जैसा अनूठा ताजमहल है वैसा ही अनूठा उसका म्यूजियम भी। ताजमहल परिसर के जल महल में बने म्यूजियम में मुगल काल की कई दुर्लभ चीजें रखी हुई हैं। इसमें खास तौर पर वह प्लेट है, जिसमें जहरीला खाना रखते ही यह रंग बदल देती है।
1906 में हुई थी लॉर्ड कर्जन के कहने पर ताज महल के मुख्य प्रवेश द्वार के पश्चिम की ओर दो षटकोणीय कमरों में ताज म्यूजियम स्थापित किया गया था। बाद में इसे जलमहल में शिफ्ट कर दिया गया। इसमें ताजमहल और आसपास का नक्शा है।
मुगल काल की पांडुलिपियों, सरकारी फरमानों, सुलेख के नमूने (कुरान की आयतें लिखने की शैली), हथियार, बर्तन, योजनाएं और ताज परिसर के चित्र, पेंटिंग, जड़ाऊ काम, आगरा किले के दो संगमरमर के स्तंभ रखे हैं।
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1906 में हुई थी लॉर्ड कर्जन के कहने पर ताज महल के मुख्य प्रवेश द्वार के पश्चिम की ओर दो षटकोणीय कमरों में ताज म्यूजियम स्थापित किया गया था। बाद में इसे जलमहल में शिफ्ट कर दिया गया। इसमें ताजमहल और आसपास का नक्शा है।
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मुगल काल की पांडुलिपियों, सरकारी फरमानों, सुलेख के नमूने (कुरान की आयतें लिखने की शैली), हथियार, बर्तन, योजनाएं और ताज परिसर के चित्र, पेंटिंग, जड़ाऊ काम, आगरा किले के दो संगमरमर के स्तंभ रखे हैं।
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1612 की चहल मजलिस की पांडुलिपि
ताज म्यूजियम में वर्ष 1612 की चेहल मजलिस की एक पांडुलिपि है, जिस पर 4 फरवरी 1628 की रॉयल मुगल सील के तहत सम्राट शाहजहां के हस्ताक्षर हैं। ब्रिटिश कलाकार डैनियल के वर्ष 1795 में बनाए गए ताजमहल के दो चित्र यहां रखे गए हैं। ताजगंज के मकबरे के बगीचे में फलों की नीलामी का विवरण दर्ज करने वाला मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय के काल का जनरल पेरोन का एक आदेश भी प्रदर्शित किया गया है।
ताज म्यूजियम में वर्ष 1612 की चेहल मजलिस की एक पांडुलिपि है, जिस पर 4 फरवरी 1628 की रॉयल मुगल सील के तहत सम्राट शाहजहां के हस्ताक्षर हैं। ब्रिटिश कलाकार डैनियल के वर्ष 1795 में बनाए गए ताजमहल के दो चित्र यहां रखे गए हैं। ताजगंज के मकबरे के बगीचे में फलों की नीलामी का विवरण दर्ज करने वाला मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय के काल का जनरल पेरोन का एक आदेश भी प्रदर्शित किया गया है।
म्यूजियम अपग्रेड किए
अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ राजकुमार पटेल ने बताया कि ताजमहल और फतेहपुर सीकरी के दोनों म्यूजियम अपग्रेड किए गए हैं। पर्यटक यहां आकर मुगल इतिहास के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी ले सकते हैं। विश्व संग्रहालय दिवस पर नए रंग रूप में हमने दोनों म्यूजियम को जनता के सामने प्रस्तुत किया है।
अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ राजकुमार पटेल ने बताया कि ताजमहल और फतेहपुर सीकरी के दोनों म्यूजियम अपग्रेड किए गए हैं। पर्यटक यहां आकर मुगल इतिहास के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी ले सकते हैं। विश्व संग्रहालय दिवस पर नए रंग रूप में हमने दोनों म्यूजियम को जनता के सामने प्रस्तुत किया है।
अधूरा है छत्रपति शिवाजी म्यूजियम का काम
ताजमहल पूर्वी गेट स्थित मुगल म्यूजियम का नाम बदलकर छत्रपति शिवाजी म्यूजियम रख दिया गया लेकिन साल 2016 में पूरा होने के लक्ष्य के बाद भी 8 साल बाद भी अधूरा पड़ा है। 5 साल से प्रदेश सरकार ने शिवाजी म्यूजियम के लिए कोई बजट नहीं दिया। यह देश का पहला म्यूजियम था जिसे प्री कास्ट तकनीक के जरिए एक साल में ही पूरा करने का प्रदेश सरकार का विचार था लेकिन सरकार बदलते ही इसका काम रोक दिया गया। इस पर 100 करोड़ रुपये अब तक खर्च हो चुके हैं।
ताजमहल पूर्वी गेट स्थित मुगल म्यूजियम का नाम बदलकर छत्रपति शिवाजी म्यूजियम रख दिया गया लेकिन साल 2016 में पूरा होने के लक्ष्य के बाद भी 8 साल बाद भी अधूरा पड़ा है। 5 साल से प्रदेश सरकार ने शिवाजी म्यूजियम के लिए कोई बजट नहीं दिया। यह देश का पहला म्यूजियम था जिसे प्री कास्ट तकनीक के जरिए एक साल में ही पूरा करने का प्रदेश सरकार का विचार था लेकिन सरकार बदलते ही इसका काम रोक दिया गया। इस पर 100 करोड़ रुपये अब तक खर्च हो चुके हैं।