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World Disability Day: हुनरमंद बचपन दे रहा दिव्यांगता को मात, कोई नृत्य तो कोई गायन में है उस्ताद
Tue, 03 Dec 2019 12:54 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी
Published by: मुकेश कुमार
Updated Tue, 03 Dec 2019 12:54 AM IST
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दिव्यांग बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
मैनपुरी के आवास विकास स्थित एक्सीलरेटेड लर्निंग कैंप में मूक बधिर बच्चों की खामोशी भले ही दिव्यांगता का अहसास कराती है, लेकिन उनका हुनर इसे पीछे छोड़ देता है। कैंप में 50 बच्चे पढ़ रहे हैं। मूक बधिर छात्राओं का एक ग्रुप नृत्य में पारंगत है। तो किसी को गायन में महारत हासिल है।
इस ग्रुप में शामिल डिंपल, माधुरी, निशा और शालिनी बोल नहीं सकती हैं। लेकिन जब वे नृत्य प्रस्तुत करती हैं तो हर कोई उनकी प्रतिभा का कायल हो जाता है। अब तक आयोजित हुए कई कार्यक्रमों में इस ग्रुप को पुरस्कृत भी किया जा चुका है।
दृष्टिबाधित छात्रा शिवा गुप्ता के कंठ में जैसे सरस्वती का वास है। शिवा का भजनों को प्रस्तुत करने का तरीका ऐसा है कि हर कोई भाव विभोर हो जाता है। अन्य बच्चों को भी वह गायन की प्रतिभा सिखा रहा है।
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इस ग्रुप में शामिल डिंपल, माधुरी, निशा और शालिनी बोल नहीं सकती हैं। लेकिन जब वे नृत्य प्रस्तुत करती हैं तो हर कोई उनकी प्रतिभा का कायल हो जाता है। अब तक आयोजित हुए कई कार्यक्रमों में इस ग्रुप को पुरस्कृत भी किया जा चुका है।
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दृष्टिबाधित छात्रा शिवा गुप्ता के कंठ में जैसे सरस्वती का वास है। शिवा का भजनों को प्रस्तुत करने का तरीका ऐसा है कि हर कोई भाव विभोर हो जाता है। अन्य बच्चों को भी वह गायन की प्रतिभा सिखा रहा है।
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यहां हर बच्चे की अपनी एक अलग खासियत है, जो इन्हें औरों से अलग बनाती है। नौ माह तक ये बच्चे एक्सीलरेटेड लर्निंग कैंप में जिंदगी जीने का हुनर सीखते हैं। कैंप के शिक्षक विवेकेंद्र मोहन दीक्षित बताते हैं कि इन बच्चों में हुनर छिपा है। बस जरूरत है तो उसे तराशने की।
शिक्षा के प्रति भी अनोखी ललक
कैंप में रहने वाले बच्चे केवल कला और हुनर के प्रति ही नहीं बल्कि शिक्षा के प्रति भी गंभीर है। उनमें हर पल कुछ पढ़ने और सीखने की ललक रहती है। सुबह अखबार पढ़ने से लेकर, अन्य पढ़ाई लिखाई में भी वे पूरी मेहनत करते हैं। बड़े बच्चे छोटे बच्चों को भी समझने में मदद करते हैं।
शिक्षा के प्रति भी अनोखी ललक
कैंप में रहने वाले बच्चे केवल कला और हुनर के प्रति ही नहीं बल्कि शिक्षा के प्रति भी गंभीर है। उनमें हर पल कुछ पढ़ने और सीखने की ललक रहती है। सुबह अखबार पढ़ने से लेकर, अन्य पढ़ाई लिखाई में भी वे पूरी मेहनत करते हैं। बड़े बच्चे छोटे बच्चों को भी समझने में मदद करते हैं।