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'निर्भया' के दोषियों को अपने हाथों से फांसी देना चाहती हैं ये महिलाएं, खून से पत्र लिख की मांग
Sat, 14 Dec 2019 09:37 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sat, 14 Dec 2019 09:37 AM IST
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कलक्ट्रेट में नारेबाजी करतीं महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा में अखिल भारत हिंदू महासभा ने निर्भया हत्याकांड के दोषियों को जल्द फांसी पर लटकाने की मांग की है। महासभा की महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष मीना दिवाकर ने जल्लाद न मिलने पर खुद जल्लाद की जिम्मेदारी निभाने का प्रस्ताव दिया है। इसके लिए उन्होंने राष्ट्रपति के नाम खून से खत भी लिखा है।
महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में शुक्रवार को महासभा के कार्यकर्ता कलक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने अपने खून से राष्ट्रपति के नाम खत लिखा। इसमें उन्होंने मांग की है कि निर्भया हत्याकांड के दोषियों को फांसी देने के लिए यदि जल्लाद नहीं मिल पा रहा है तो वो स्वयं इन दोषियों को फांसी पर लटकाने के लिए जल्लाद बनने को तैयार हैं। वो भी निशुल्क।
महासभा के जिलाध्यक्ष रौनक ठाकुर ने कहा कि ऐसे लोगों को तत्काल फांसी पर लटका देना चाहिए। अगर जल्लाद की जरूरत है तो हिंदू महासभा की मातृशक्ति हमेशा तैयार है। इस संबंध में महासभा की ओर से एडीएम सिटी डा. प्रभाकांत अवस्थी को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भी दिया गया।
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महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में शुक्रवार को महासभा के कार्यकर्ता कलक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने अपने खून से राष्ट्रपति के नाम खत लिखा। इसमें उन्होंने मांग की है कि निर्भया हत्याकांड के दोषियों को फांसी देने के लिए यदि जल्लाद नहीं मिल पा रहा है तो वो स्वयं इन दोषियों को फांसी पर लटकाने के लिए जल्लाद बनने को तैयार हैं। वो भी निशुल्क।
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महासभा के जिलाध्यक्ष रौनक ठाकुर ने कहा कि ऐसे लोगों को तत्काल फांसी पर लटका देना चाहिए। अगर जल्लाद की जरूरत है तो हिंदू महासभा की मातृशक्ति हमेशा तैयार है। इस संबंध में महासभा की ओर से एडीएम सिटी डा. प्रभाकांत अवस्थी को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भी दिया गया।
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nirbhaya case
- फोटो : सोशल मीडिया
16 दिसंबर, साल 2012 में राजधानी दिल्ली में हुए निर्भया कांड के दोषियों को देने फांसी की प्रक्रिया तेज हो गई है। हालांकि एक दोषी विनय शर्मा की दो याचिकाएं राष्ट्रपति के पास लंबित हैं, वहीं दोषी अक्षय कुमार की पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 17 दिसंबर को सुनवाई होनी है।
गौरतलब है कि पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी थी। उससे पहले 5 मई, साल 2017 को इस मामले की सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने चारों दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रखी थी।
गौरतलब है कि पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी थी। उससे पहले 5 मई, साल 2017 को इस मामले की सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने चारों दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रखी थी।