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शहीद पति के सम्मान के लिए खुद ही फावड़ा लेकर जुट गई ये वीरांगना
दिनेश वशिष्ठ/अमर उजाला शिकोहाबाद (फिरोजाबाद)
Updated Mon, 03 Jul 2017 03:23 PM IST
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वीर सिंह (इनसेट)
- फोटो : अमर उजाला
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देश की सेवा करते समय पंपौर में आतंकी हमले में शहीद हुआ नगला केवल निवासी वीर सिंह की शहादत को 25 जून को एक वर्ष हो गया। अभी तक शहीद की समाधि नहीं बन सकी। शासन-प्रशासन से नाउम्मीद शहीद की पत्नी प्रीता देवी ने समाधि निर्माण खुद ही शुरू कर दिया है।
नगला केवल निवासी वीर सैनिक वीर सिंह शहीद हो गये थे। एक साल बाद भी न तो समाधि स्थल बना और न ही शहीद द्वार। इतना ही नहीं अभी तक शहीद के दरवाजे तक विद्युत के खंभे भी नहीं गाड़े गए हैं और न ही सड़क निर्माण कराया गया है। शहीद की उपेक्षा से आहत पत्नी प्रीता देवी ने 24 जून से परिवार के साथ मिलकर समाधि स्थल के निर्माण में खुद ही जुट गई हैं। वह सुबह से शाम तक स्वयं ईंट, बालू और सीमेंट लेकर समाधि बनाने में लगी रहती हैं। इस दौरान चिनाई का कार्य एक राजमिस्त्री से करा रहीं हैं। बाकी उनके बच्चे और वे खुद काम कर रही हैं।
वीर सिंह का पार्थिव शरीर आने के बाद ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से समाधि स्थल शहीद द्वार, सड़क और शहीद के घर तक पोल लगवाकर बिजली पहुंचाने की मांग की थी। मौके पर पहुंचे जिला पंचायत अध्यक्ष ने जिला पंचायत की तरफ से शहीद द्वार बनवाने का आश्वासन दिया था। सालभर बाद भी द्वार नहीं बन सका है। वहीं प्रशासन द्वारा शहीद के घर तक जाने के लिए सड़क निर्माण और बिजली की व्यवस्था के लिए आश्वासन दिया था वो भी पूरा नहीं हुआ है।
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शहीद वीर सिंह की पत्नी प्रीता देवी को इस बात का दर्द है कि उनके पति देश के लिए शहीद हो गए लेकिन उनके सम्मान के लिए बातें करने वाले नेताओं और अधिकारियों ने इसकी सुध तक नहीं ली। उन्होंने इतनी जरूरत भी नहीं समझी कि शहीद की समाधि बना दी जाती। एक साल तक वह अपने पति की चिता की राख को ईंटों और पन्नी से ढके रही। इंतजार करती रहीं कि शायद नेताओं और अधिकारियों को इस स्थान पर समाधि बनाने की सुध आ जाए।
सभी की सहमति से प्रशासन ने अंतिम संस्कार के लिए जिस स्थान को चुना था, उस स्थान पर एक साल बाद भी समाधि नहीं बनाई गई। वेदना के साथ प्रीता देवी ने कहा कि अधिकारी और नेता ने हमें तवज्जो नहीं दी जबकि हम कई बार अधिकारियों के पास भी गए। ऐसा मालूम होता है कि शहीद का समाधि स्थल हमें ही बनवाना है तो एक साल इंतजार क्यों करते...।
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नगला केवल निवासी वीर सैनिक वीर सिंह शहीद हो गये थे। एक साल बाद भी न तो समाधि स्थल बना और न ही शहीद द्वार। इतना ही नहीं अभी तक शहीद के दरवाजे तक विद्युत के खंभे भी नहीं गाड़े गए हैं और न ही सड़क निर्माण कराया गया है। शहीद की उपेक्षा से आहत पत्नी प्रीता देवी ने 24 जून से परिवार के साथ मिलकर समाधि स्थल के निर्माण में खुद ही जुट गई हैं। वह सुबह से शाम तक स्वयं ईंट, बालू और सीमेंट लेकर समाधि बनाने में लगी रहती हैं। इस दौरान चिनाई का कार्य एक राजमिस्त्री से करा रहीं हैं। बाकी उनके बच्चे और वे खुद काम कर रही हैं।
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वीर सिंह का पार्थिव शरीर आने के बाद ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से समाधि स्थल शहीद द्वार, सड़क और शहीद के घर तक पोल लगवाकर बिजली पहुंचाने की मांग की थी। मौके पर पहुंचे जिला पंचायत अध्यक्ष ने जिला पंचायत की तरफ से शहीद द्वार बनवाने का आश्वासन दिया था। सालभर बाद भी द्वार नहीं बन सका है। वहीं प्रशासन द्वारा शहीद के घर तक जाने के लिए सड़क निर्माण और बिजली की व्यवस्था के लिए आश्वासन दिया था वो भी पूरा नहीं हुआ है।
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शहीद वीर सिंह की पत्नी प्रीता देवी को इस बात का दर्द है कि उनके पति देश के लिए शहीद हो गए लेकिन उनके सम्मान के लिए बातें करने वाले नेताओं और अधिकारियों ने इसकी सुध तक नहीं ली। उन्होंने इतनी जरूरत भी नहीं समझी कि शहीद की समाधि बना दी जाती। एक साल तक वह अपने पति की चिता की राख को ईंटों और पन्नी से ढके रही। इंतजार करती रहीं कि शायद नेताओं और अधिकारियों को इस स्थान पर समाधि बनाने की सुध आ जाए।
सभी की सहमति से प्रशासन ने अंतिम संस्कार के लिए जिस स्थान को चुना था, उस स्थान पर एक साल बाद भी समाधि नहीं बनाई गई। वेदना के साथ प्रीता देवी ने कहा कि अधिकारी और नेता ने हमें तवज्जो नहीं दी जबकि हम कई बार अधिकारियों के पास भी गए। ऐसा मालूम होता है कि शहीद का समाधि स्थल हमें ही बनवाना है तो एक साल इंतजार क्यों करते...।