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बंगाल के युवक ने जालसाजी से बनवाया पासपोर्ट, सवालों के घेरे में पुलिस व एलआईयू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Updated Tue, 24 Jul 2018 07:17 PM IST
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पासपोर्ट
- फोटो : amar ujala
पश्चिमी बंगाल के रहने वाले मुइनुद्दीन ने मूल निवास के फर्जी प्रमाणपत्र लगाकर आगरा में अपना पासपोर्ट बनवा लिया। वो यहां छीपीटोला में किराए पर रह रहा था।
उसके मकान मालिक को पता चला तो उन्होंने रकाबगंज थाना में जालसाजी का केस दर्ज करा दिया। पुलिस ने मुइनुद्दीन को गिरफ्तार कर मंगलवार को कोर्ट के सामने पेश किया। वहां से उसे जेल भेज दिया गया।
मुइनुद्दीन दस साल पहले आगरा आया था। वो खुद को कोलकाता का निवासी बताता था। हालांकि पुलिस का मानना है कि उसने झूठ बोला। कोलकाता में उसने जो पता बताया, उसे तस्दीक कराया जा रहा है।
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उसके मकान मालिक को पता चला तो उन्होंने रकाबगंज थाना में जालसाजी का केस दर्ज करा दिया। पुलिस ने मुइनुद्दीन को गिरफ्तार कर मंगलवार को कोर्ट के सामने पेश किया। वहां से उसे जेल भेज दिया गया।
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मुइनुद्दीन दस साल पहले आगरा आया था। वो खुद को कोलकाता का निवासी बताता था। हालांकि पुलिस का मानना है कि उसने झूठ बोला। कोलकाता में उसने जो पता बताया, उसे तस्दीक कराया जा रहा है।
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जूता फैक्ट्री में करता था काम
वो छीपीटोला में ही एक जूता फैक्ट्री में कारीगर के रूप में काम कर रहा था। छीपीटोला के ही कटरा गड़रियान में सुरेश कुमार के घर किराए पर रहा। उसने पहली जालसाजी तो आधार कार्ड बनवाने में की।
अपना आधार कार्ड गोपाल के नाम से बनवाया। इसके बाद उसने सुरेश के घर को अपना घर बताते हुए पासपोर्ट के लिए मुइनुद्दीन के नाम से ही आवेदन किया। उसके नाम पासपोर्ट जारी भी कर दिया गया। यह उस तक पहुंचना शेष रह गया था।
इसी बीच सुरेश को उसकी जालसाजी का पता चल गया। सुरेश ने उसके खिलाफ रकाबगंज थाना में तहरीर दे दी। सीओ सदर उदयराज सिंह ने बताया कि मुइनुद्दीन को गिरफ्तार कर लिया गया।
अपना आधार कार्ड गोपाल के नाम से बनवाया। इसके बाद उसने सुरेश के घर को अपना घर बताते हुए पासपोर्ट के लिए मुइनुद्दीन के नाम से ही आवेदन किया। उसके नाम पासपोर्ट जारी भी कर दिया गया। यह उस तक पहुंचना शेष रह गया था।
इसी बीच सुरेश को उसकी जालसाजी का पता चल गया। सुरेश ने उसके खिलाफ रकाबगंज थाना में तहरीर दे दी। सीओ सदर उदयराज सिंह ने बताया कि मुइनुद्दीन को गिरफ्तार कर लिया गया।
फर्जी नाम से बनवाए आधार, पासपोर्ट
पहले फर्जी नाम से आधार कार्ड बना और फिर पासपोर्ट भी बन गया। इससे थाना रकाबगंज पुलिस और एलआईयू पर भी सवाल उठ रहे हैं। वो यहां का रहने वाला नहीं था। फिर भी उसका पता तसदीक किया गया।
जाहिर है उसने पैसे के दम पर जांच अधिकारी को खरीद लिया होगा। इसके बिना उसकी जालसाजी का सच छुप पाना मुमकिन नहीं था। अगर यही हाल रहा तो कोई आतंकी भी पासपोर्ट बनवा सकता है, क्योंकि जांच के नाम पर तो कुछ हो ही नहीं रहा।
पहले भी सामने आ चुके हैं मामले
यह पहला मौका नहीं है जब ऐसा खेल हुआ है। इससे पहले एत्माद्दौला की फातिमा उर्फ लीची का पासपोर्ट भी बन गया था, जबकि वो बांग्लादेश की रहने वाली है। उसे नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने जाली करेंसी चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
एत्माद्दौला क्षेत्र में बांग्लादेशी नागरिकों के आधार कार्ड बन जाने की बात भी सामने आ चुकी है। सवाल यह भी है कि पुलिस कुछ देखती क्यों नहीं है। किराएदारों के सत्यापन के लिए तमाम बातें कहीं जा रही हैं लेकिन होता कुछ नहीं।
जाहिर है उसने पैसे के दम पर जांच अधिकारी को खरीद लिया होगा। इसके बिना उसकी जालसाजी का सच छुप पाना मुमकिन नहीं था। अगर यही हाल रहा तो कोई आतंकी भी पासपोर्ट बनवा सकता है, क्योंकि जांच के नाम पर तो कुछ हो ही नहीं रहा।
पहले भी सामने आ चुके हैं मामले
यह पहला मौका नहीं है जब ऐसा खेल हुआ है। इससे पहले एत्माद्दौला की फातिमा उर्फ लीची का पासपोर्ट भी बन गया था, जबकि वो बांग्लादेश की रहने वाली है। उसे नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने जाली करेंसी चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
एत्माद्दौला क्षेत्र में बांग्लादेशी नागरिकों के आधार कार्ड बन जाने की बात भी सामने आ चुकी है। सवाल यह भी है कि पुलिस कुछ देखती क्यों नहीं है। किराएदारों के सत्यापन के लिए तमाम बातें कहीं जा रही हैं लेकिन होता कुछ नहीं।