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पानी के लिए संघर्ष: ताजनगरी के 12 लाख लोग प्यासे; घर से बाल्टी बोतल लेकर निकली महिलाएं; सरकार से मांग रही पानी
Wed, 25 Sep 2024 01:06 PM IST
भूपेन्द्र सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
Published by: भूपेन्द्र सिंह
Updated Wed, 25 Sep 2024 01:06 PM IST
सार
आगरा में पीने के पानी की किल्लत बनी है। लापरवाही सिंचाई विभाग की रही और प्यासे शहर के 12 लाख लोग रहे। बिना विकल्प तलाशे ही पानी रोक दिया।
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घर से बाल्टी बोतल लेकर निकली महिलाएं; सरकार से मांग रही पानी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उत्तर प्रदेश के आगरा में पीने के पानी की किल्लत बनी हुई है। बुधवार को पानी की समस्या पर राजनगर, यमुनापार, लोहामंडी आदि के लोगों ने वाटरवर्क्स पर बाल्टी लेकर प्रदर्शन किया। नारेबाजी करते हुए सरकार से पानी की मांग की।
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बुलंदशहर के पालड़ा में गंगाजल के लिए लगाए गए हेड रेगुलेटर का गेट टूट जाने के कारण पहले छह दिन और अब दो दिन तक आगरा के 12 लाख लोग प्यासे हैं। इसमें सिंचाई विभाग के इंजीनियरों की लापरवाही सामने आई है।
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सिंचाई विभाग के इंजीनियरों ने गेट टूटने के बाद मशीनरी और व्यवस्थाओं को तैयार किए बिना ही पानी रोक दिया। बंधा बनाने के लिए जेवर से पाइलिंग शीट तब मंगवाई गई, जब डीएम और नगर आयुक्त ने प्रमुख सचिव सिंचाई से आगरा में बिगड़ रहे हालात की जानकारी दी।
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बुलंदशहर के पालड़ा में सिंचाई विभाग ने दो बार बंधा बनाया जो दोनों बार पानी के बहाव में बह गया। रेगुलेटर का गेट टूट जाने के बाद भी सिंचाई विभाग के इंजीनियरों ने पानी रोक दिया, पर कोई व्यवस्था नहीं की। मंगलवार को जब पानी नहीं आया तो नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने जलकल विभाग के अधिशासी अभियंता को पालड़ा भेजा। वहां पानी की व्यवस्था न देखकर उन्होंने रिपोर्ट दी।
इसके बाद डीएम और नगर आयुक्त ने प्रमुख सचिव सिंचाई से बात की। उसके बाद सिंचाई विभाग के अधिकारी पालड़ा पहुंचे और जेवर से पाइलिंग शीट मंगवाई गई। जेवर से शीट आने के बाद तब बंधा बनाने का काम शुरू किया गया। इससे पहले छह दिन में गेट लगा सके थे, जबकि पूर्व में महज एक दिन में ही नया गेट लगाया गया है। इस बार इंजीनियरों की लापरवाही से आगरा के लोग आठ दिन से गंगाजल का संकट झेल रहे हैं।
मैंने सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव को पूरी जानकारी दी। इसके बाद हालात में सुधार हुआ है। उम्मीद है कि बुधवार शाम तक गंगाजल आ जाएगा। ऐसा दोबारा न हो, इसके लिए हम व्यवस्था में बदलाव करेंगे। -अंकित खंडेलवाल, नगर आयुक्त
पूरे आठ दिन से क्षेत्र में पानी नहीं आ रहा है। मेरे क्षेत्र में टैँकर भी नहीं भेजे जा रहे। क्षेत्र में जनता गरीब है। केवल पीने का पानी तो खरीद सकती है, पर टैंकर से जरूरत का पानी नहीं खरीद पाएगी। अब धैर्य समाप्त हो चुका है। जनता सड़कों पर उतरने वाली है। - बंटी माहौर, पार्षद
पुराने शहर में पानी का संकट है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों की लापरवाही से 12 लाख लोग परेशानी झेल रहे हैं। प्रदेश सरकार ऐसे लापरवाह इंजीनियरों पर कार्रवाई करे। उनकी गलती से हम सात दिन से पानी के लिए परेशान हैं। -रवि माथुर, पार्षद
पितृपक्ष में पानी नहीं है। तर्पण कैसे करेंगे। सुबह नहा धोकर पूजा पाठ करना भी मुश्किल हो गया। पहली बार ऐसा पितृपक्ष देखा है, जब पानी का इतना बड़ा संकट है। जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। -राजकुमार नागरथ, निवासी, खेरिया मोड़
पड़ोसी भी बिजली बिल के कारण अब पानी देने से इंकार कर रहे हैं। 12 दिनों से पानी नहीं आ रहा। अधिकारी कहते है कि 130 एमएलडी पानी आएगा, तब तीनों मोटरें चलेंगी और पानी घर तक पहुंचेगा। हमारा क्या कसूर है जो संकट झेल रहे हैं। -विकास दीक्षित, ट्रांसयमुना कालोनी