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वृंदावन कुंभ में बोले संत- उत्तराखंड सरकार कोरोना के नाम पर संतों की परंपरा और आस्था से छेड़खानी न करे

Mon, 01 Mar 2021 12:05 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा-वृंदावन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा-वृंदावन Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 01 Mar 2021 12:05 AM IST
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vrindavan saints warns uttarakhand government over Corona Guidelines for haridwar kumbh
वृंदावन: बैठक में मौजूद संत - फोटो : अमर उजाला

वृंदावन में आयोजित कुंभ पूर्व वैष्णव बैठक के पहले शाही स्नान के बाद अखाड़ा परिषद के प्रमुख संतों ने हरिद्वार में लगने वाले महाकुंभ की तैयारियों को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। पहले शाही स्नान में यमुना में शुद्ध जल उपलब्ध न होने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि कोरोना बीमारी से ज्यादा खतरनाक यमुना का जल है। वहीं, उत्तराखंड सरकार से कोरोना के नाम पर संतों की परंपरा और आस्था से छेड़खानी न करने की बात कही। 

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अखिल भारतीय श्रीपंच निर्मोही अनी अखाड़ा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र दास ने कहा है कि वृंदावन कुंभ बैठक के सभी शाही स्नान और शोभायात्रा के बाद हरिद्वार में कुंभ मेला लगेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार कोरोना के नाम पर संतों की परंपरा, सनातन धर्म और आस्था के साथ छेड़खानी न करे। जैसे माघ मेला और कुंभ बैठक शांति पूर्वक चल रही है, उसी अनुरूप हरिद्वार कुंभ में मेला की व्यवस्थाएं होनी चाहिए। 
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'यमुना का हाल देख मन दुखी हुआ'
उन्होंने कहा कि वृंदावन कुंभ में वैष्णव समाज और वैष्णव साधु-संतों की भावनाओं को समझते हुए व्यवस्थाएं की गई हैं। लेकिन यमुना के जल को देखकर मन दुखी हुआ है। वर्तमान में कोरोना जैसी बीमारी से ज्यादा यमुना जी का जल खतरनाक है। यमुना में एनसीआर और दिल्ली से प्रदूषित जल आ रहा है। 

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उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मथुरा आए तो जल की शुद्धता ठीक थी लेकिन अब फिर से जल प्रदूषित हो गया है। जिस यमुना-गंगा में डुबकी लगाने से अपने जीवन को कृतार्थ करते हैं वह हमारे लिए पूज्यनीय है। लेकिन गटरों के प्रदूषित जल के मिलने से आचमन व स्नान करने से बीमार होने का भी खतरा बना हुआ है। 

महंत रामजी दास ने बताया कि कुंभ का अर्थ अमृत से है। लेकिन यमुना जी जल में कलियुग का प्रभाव दिखाई दे रहा है। जोकि मानव जाति के लिए ठीक नहीं हैं। मंत्री नरेंद्र दास महाराज ने कहा कि यमुना के शुद्धीकरण के लिए कठोर कानून बनाने की आवश्यकता है। बालकेश्वर हनुमान मंदिर लखनऊ से अशोक दास, चित्रकूट धाम से संतदास महाराज, अरविंद मिश्रा, आचार्य संजय कृष्ण शास्त्री आदि थे।
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