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विश्वविद्यालय : परीक्षा विभाग में पडे़ ताले, सत्यापन ठप
अमर उजाला आगरा
Updated Sat, 23 Jul 2016 01:51 AM IST
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काली सूची में शामिल 17 कालेज भी बने सेंटर
- फोटो : अमर उजाला
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बीए, बीएससी सेक्शन नहीं खुला, छात्रों ने किया हंगामा
मार्कशीट-डिग्री के लिए जूझ रहे डा. बीआरए विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए एक और मुसीबत खड़ी हो गई है। परीक्षा विभाग के अधिकांश पटलों से कर्मचारी गायब हैं, तो बीए, बीएससी सेक्शन खुला ही नहीं। समस्या लेकर दूरदराज से आए छात्रों ने सेक्शन में ताले देख जमकर हंगामा किया। नारेबाजी करते हुए कुलसचिव कार्यालय पर भी प्रदर्शन किया। अधिकारियों की गैरहाजिरी में उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। मजबूरन छात्रों को मायूस लौटना पड़ा। परीक्षा विभाग के बीए-बीएससी सेक्शन में ताले लगे होने से मार्कशीट का सत्यापन, प्रोविजनल मार्कशीट-डिग्री जैसे कार्य भी बंद हो गए।
कर्मचारी बोले, पानी टपकने से शार्ट सर्किट
ताला बंद कर कर्मचारी कुलसचिव कार्यालय पर धरने पर बैठ गए। कर्मचारियों का कहना है कि बीते दिनों बरसात में छत से पानी टपका, इससे केबिल में शार्ट सर्किट हो गया है। बिजली की सप्लाई बंद है, गर्मी में काम करना संभव नहीं। कर्मचारी अध्यक्ष अखिलेश चौधरी का कहना है कि निर्माण कार्य होने से आए दिन विभाग की छत से प्लास्टर गिरता है। अगर, विभागों में समुचित व्यवस्थाएं नहीं की गईं तो कर्मचारी कार्य का बहिष्कार करेंगे।
परीक्षा विभाग की गैलरी का प्लास्टर गिरा
परीक्षा विभाग की गैलरी का दोपहर में प्लास्टर गिर पड़ा। यहां से गुजर रहे कुछ छात्रों को चोट आई। तेज आवाज सुनकर परीक्षा विभाग के कर्मचारी सहम गए। बता दें कि यहां निर्माण कार्य चल रहा है। पहले भी कर्मचारी चोटिल हो चुके हैं।
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पांच घंटे में जांचनी होंगी 200 कापियां
मूल्यांकन तेजी से निपटाने के लिए परीक्षकों को निर्देश
राज्यपाल की फटकार लगने के बाद डा. बीआरए विश्वविद्यालय ने तेजी से मूल्यांकन निपटाने के लिए गुणवत्ता से समझौता कर लिया है। अब परीक्षकों को दिन में 200 कापियां जांचने को दी जा रही है। इससे पहले ये संख्या 150 थी। मूल्यांकन का समय सुबह दस से चार बजे तक का है। इसमें एक घंटे का लंच ब्रेक भी है। इसके अलावा अवार्ड शीट भरने, कापियों की नंबरिंग करने और जमा करने का समय निकाल दिया जाए तो एक कापी जांचने के लिए लगभग दो मिनट का समय मिल रहा है।
छलेसर कैंपस में बदहाली
छलेसर कैंपस के मूल्यांकन सेंटर पर बदहाली से परीक्षक परेशान है। यहां रोजाना सफाई न होने से कमरों में ही कचरा पड़ा रहता है। पानी और बिजली तक की समुचित व्यवस्था नहीं है।
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मार्कशीट-डिग्री के लिए जूझ रहे डा. बीआरए विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए एक और मुसीबत खड़ी हो गई है। परीक्षा विभाग के अधिकांश पटलों से कर्मचारी गायब हैं, तो बीए, बीएससी सेक्शन खुला ही नहीं। समस्या लेकर दूरदराज से आए छात्रों ने सेक्शन में ताले देख जमकर हंगामा किया। नारेबाजी करते हुए कुलसचिव कार्यालय पर भी प्रदर्शन किया। अधिकारियों की गैरहाजिरी में उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। मजबूरन छात्रों को मायूस लौटना पड़ा। परीक्षा विभाग के बीए-बीएससी सेक्शन में ताले लगे होने से मार्कशीट का सत्यापन, प्रोविजनल मार्कशीट-डिग्री जैसे कार्य भी बंद हो गए।
कर्मचारी बोले, पानी टपकने से शार्ट सर्किट
ताला बंद कर कर्मचारी कुलसचिव कार्यालय पर धरने पर बैठ गए। कर्मचारियों का कहना है कि बीते दिनों बरसात में छत से पानी टपका, इससे केबिल में शार्ट सर्किट हो गया है। बिजली की सप्लाई बंद है, गर्मी में काम करना संभव नहीं। कर्मचारी अध्यक्ष अखिलेश चौधरी का कहना है कि निर्माण कार्य होने से आए दिन विभाग की छत से प्लास्टर गिरता है। अगर, विभागों में समुचित व्यवस्थाएं नहीं की गईं तो कर्मचारी कार्य का बहिष्कार करेंगे।
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परीक्षा विभाग की गैलरी का प्लास्टर गिरा
परीक्षा विभाग की गैलरी का दोपहर में प्लास्टर गिर पड़ा। यहां से गुजर रहे कुछ छात्रों को चोट आई। तेज आवाज सुनकर परीक्षा विभाग के कर्मचारी सहम गए। बता दें कि यहां निर्माण कार्य चल रहा है। पहले भी कर्मचारी चोटिल हो चुके हैं।
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पांच घंटे में जांचनी होंगी 200 कापियां
मूल्यांकन तेजी से निपटाने के लिए परीक्षकों को निर्देश
राज्यपाल की फटकार लगने के बाद डा. बीआरए विश्वविद्यालय ने तेजी से मूल्यांकन निपटाने के लिए गुणवत्ता से समझौता कर लिया है। अब परीक्षकों को दिन में 200 कापियां जांचने को दी जा रही है। इससे पहले ये संख्या 150 थी। मूल्यांकन का समय सुबह दस से चार बजे तक का है। इसमें एक घंटे का लंच ब्रेक भी है। इसके अलावा अवार्ड शीट भरने, कापियों की नंबरिंग करने और जमा करने का समय निकाल दिया जाए तो एक कापी जांचने के लिए लगभग दो मिनट का समय मिल रहा है।
छलेसर कैंपस में बदहाली
छलेसर कैंपस के मूल्यांकन सेंटर पर बदहाली से परीक्षक परेशान है। यहां रोजाना सफाई न होने से कमरों में ही कचरा पड़ा रहता है। पानी और बिजली तक की समुचित व्यवस्था नहीं है।