आयुर्वेद की डिग्री और कर रहे थे गुर्दे, पथरी के आपरेशन, डॉक्टरों ने कहा हो सख्त कार्रवाई
आगरा के स्वास्थ्य विभाग ने शाहगंज स्थित डा. एससी राय मेमोरियल एंड चेरीटेबिल पॉली क्लीनिक पर छापा मारकर ओपीडी बंद करा दी है। इसके
संचालक सुफल राय खुद को बीएएमएस, एमएस (एसटीडी) जनरल सर्जन बताकर गुर्दे, पथरी समेत कई गंभीर रोगों के आपरेशन करने के विशेषज्ञ बने हुए
थे। पर्चे पर भी यही लिखा हुआ था, लेकिन डिग्री नहीं दिखा पाए। नोटिस देकर चिकित्सकीय प्रमाणपत्र तलब किए हैं।
टीम मंगलवार की दोपहर साढ़े बारह बजे यहां पहुंची तो मरीजों की भारी भीड़ थी। रजिस्टर में 88वां नंबर चल रहा था। कमरों में बायोमेडिकल वेस्ट पड़ा
था। खून से सने ग्लब्स और गॉज भी मिले। संचालक सुफल राय के पर्र्चे पर गुर्दा, पथरी, मूत्र नली, चर्म, यौन, बवासीर, साइनस, भगंदर समेत कई गंभीर
बीमारियों का स्थायी इलाज करने की विशेषज्ञता लिखी थी। बेड और बेहोशी के डाक्टर की फीस भी अंकित थी।
सुफल राय ने खुद को जनरल सर्जन बताया। टीम ने जब इनकी डिग्री और प्रमाणपत्र मांगे तो दिखा नहीं पाए। मेडिकल स्टोर भी संचालित मिला। क्लीनिक आयुर्वेद विभाग में पंजीकृत बताई। इलाज एलोपैथी से किया जा रहा था। अपंजीकृत अस्पताल के नोडल प्रभारी डा. नंदन सिंह ने बताया कि ओपीडी बंद कराते हुए प्रमाणपत्र तलब किए हैं। पूर्व में भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से खिलाफ मुकदमा दर्ज है। इनकी एक क्लीनिक फिरोजाबाद में भी बताई गई है, जांच कराई जा रही है।
बाप-बेटे एक क्लीनिक में रहे थे इलाज
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शाहगंज में आनंद क्लीनिक एवं डेंटल केयर पर छापा मारा। यह डा. एमडी आनंदानी के नाम से आयुर्वेद विभाग में पंजीकृत
था। इसी में उनका बेटा डा. एके आनंद दांतों के मरीजों का इलाज कर रहा था। इसका पंजीकरण नहीं था। इसकी केबिन बंद कराते हुए दोनों की ओपीडी
पर रोक लगा दी है। टीम ने दोनों से चिकित्सकीय प्रमाणपत्र, पंजीकरण एवं अन्य विभागों की एनओसी मांगी है।
आयुर्वेद क्लीनिक का लाइसेंस निरस्त
आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्साधिकारी ने कमला नगर स्थित डा. प्रदीप तिवारी की क्लीनिक का लाइसेंस निरस्त कर दिया है। बताया गया कि संचालक डा.
तिवारी ने अपनी क्लीनिक का लाइसेंस सरेंडर कर दिया है। इसके चलते लाइसेंस निरस्त किया गया है।
एलोपैथी में बीएएमएस, एमएस (एसटीडी) कोई डिग्री नहीं होती। ऐसे लोग आपरेशन कर मरीजों की जान से खेल रहे हैं, सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
डा. रविंद्र मोहन पचौरी, अध्यक्ष आईएमए
- बीएएमएस, एमएस (एसटीडी) लिखा है, मतलब वह एमएस के स्टूडेंट हैं। ये पर्चे पर लिखी बीमारियों से संबंधित आपरेशन नहीं कर सकते। इसकी जांच
कराई जाएगी।
डा. नरेंद्र कुमार, आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्साधिकारी