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तो ताजमहल को देखने में उजबेकिस्तान से बढ़ जाएंगे दस गुना सैलानी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Updated Fri, 05 Oct 2018 03:42 PM IST
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ताजमहल
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समरकंद और आगरा को सिस्टर सिटी बनाने के करार के बाद ताजमहल के शहर में अपनी विरासत को देखने के लिए उजबेकिस्तानी सैलानियों की संख्या में दस गुना तक इजाफा हो सकता है। आगरा में उजबेकिस्तान के समरकंद से आए बाबर ने मुगल शासन की शुरूआत की थी। मुगलिया दौर में आगरा ने अपना सुनहरा दौर देखा।
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उसी दौर में हुई ताजमहल की तामीर ने दुनिया भर में मुगलिया संस्कृति को रूबरू कराया। उजबेकिस्तान के लोगों में सिस्टर सिटी के करार के बाद आगरा के प्रति भावनात्मक लगाव बढ़ने की उम्मीद पर्यटन उद्योग लगा रहा है। यूएसएसआर के टूटने के बाद उजबेकिस्तान और रूस अलग हो गए। उजबेक सैलानियों की संख्या आगरा में कम है।
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वहीं रूस से जनवरी से अगस्त के बीच आठ महीनों में 3463 सैलानी आए हैं। रूस के सैलानियों की संख्या भी जनवरी से मार्च के बीच ज्यादा रही है। उसके बाद गर्मियों में रशियन पर्यटक कम पहुंचे। उजबेकिस्तान से भारत में सैलानियों की संख्या कम है, जबकि देश से उजबेकिस्तान घूमने जाने वालों की तादात 25 हजार से ज्यादा है।
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भारतीय सैलानियों की संख्या वहां ज्यादा है। सिस्टर सिटी बनने के बाद समरकंद, बुखारा जैसे शहरों के लोगों में आगरा के प्रति रुझान बढ़ेगा और पुराने सिल्क रूट के जरिए कारोबार को भी बढ़ाया जा सकता है।
संवर सकता है चीनी का रोजा
रामबाग के पास चीनी का रोजा स्मारक है, जो नीले रंग के ग्लेज्ड टाइल्स से बना है। ऐसे ही नीले रंग के टाइल्स समरकंद और बुखारा में लगे हैं। सिस्टर सिटी बनने के बाद उजबेकिस्तान के पुरातत्वविदों की मदद से चीनी का रोजा नीले रंग के टाइल्स लगाकर संवारा जा सकता है। चीनी का रोजा में यह टाइल्स पूरी तरह से टूटकर निकल चुके हैं और केवल प्लास्टर से स्मारक की दीवारें ही बची हैं।
‘सोवियत संघ के टूटने से पहले हर दिन कई ग्रुप आगरा आते थे, लेकिन अर्थ व्यवस्था बिगड़ने के बाद सोवियत से टूटे देशों के पर्यटक कम हुए। अब हालात संभले हैं। इसी बीच सिस्टर सिटी की शुरूआत हुई है, जाहिर है, इससे पर्यटक बढ़ेंगे’
शमशुद्दीन
अध्यक्ष, आगरा एप्रूव्ड गाइड एसो.
राष्ट्राध्यक्षों के ताजमहल देखने के बाद अब तक का ट्रेंड यही रहा है कि पर्यटक बढ़े हैं। ऐसे में उजबेक पर्यटकों में ताजमहल के प्रति आकर्षण बढ़ना तय
है। तीन दशक पहले की स्थिति आ सकती है। तत्कालीन सोवियत संघ से पर्यटकों की तादात बेहद ज्यादा थी।
राजीव सक्सेना
महासचिव, टूरिज्म गिल्ड
‘सोवियत संघ के टूटने से पहले हर दिन कई ग्रुप आगरा आते थे, लेकिन अर्थ व्यवस्था बिगड़ने के बाद सोवियत से टूटे देशों के पर्यटक कम हुए। अब हालात संभले हैं। इसी बीच सिस्टर सिटी की शुरूआत हुई है, जाहिर है, इससे पर्यटक बढ़ेंगे’
शमशुद्दीन
अध्यक्ष, आगरा एप्रूव्ड गाइड एसो.
राष्ट्राध्यक्षों के ताजमहल देखने के बाद अब तक का ट्रेंड यही रहा है कि पर्यटक बढ़े हैं। ऐसे में उजबेक पर्यटकों में ताजमहल के प्रति आकर्षण बढ़ना तय
है। तीन दशक पहले की स्थिति आ सकती है। तत्कालीन सोवियत संघ से पर्यटकों की तादात बेहद ज्यादा थी।
राजीव सक्सेना
महासचिव, टूरिज्म गिल्ड