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UP: शस्त्र लाइसेंस के पोर्टल में छेड़छाड़, कंप्यूटर ऑपरेटर पर मुकदमा; इस तरह किया फर्जीवाड़ा
Sat, 26 Jul 2025 09:01 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 26 Jul 2025 09:01 AM IST
सार
शस्त्र लाइसेंस के पोर्टल के लाॅगिन आईडी और पासवर्ड की मदद से दूसरे जनपद के शस्त्र धारक का नाम और पता बदल दिया। कंप्यूटर ऑपरेटर पंकज को नामजद किया है।
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FIR Demo
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आगरा कलेक्ट्रेट स्थित आयुध कार्यालय के एलिस पोर्टल में छेड़छाड़ कर शस्त्र लाइसेंस धारक का नाम परिवर्तित करने के मामले में थाना नाई की मंडी में मुकदमा दर्ज कराया गया है। इसमें कंप्यूटर ऑपरेटर पंकज को नामजद किया है। उसने बिना अनुमति के नाम और पते में बदलाव किया। इसके लिए लाॅगिन आईडी और पासवर्ड का अवैध रूप से इस्तेमाल किया। जांच के दाैरान हुई पूछताछ में छेड़छाड़ करना भी कबूल किया है।
कलेक्ट्रेट स्थित आयुध कार्यालय के सहायक प्रशांत कुमार ने थाना नाई की मंडी में तहरीर दी थी। उन्होंने कहा कि लाइसेंस नवीनीकरण का ब्योरा एलिस पोर्टल पर दर्ज किया जाता है। पिछले दिनों नेटवर्क की समस्या आने पर वह एनआईसी के कंप्यूटर का भी सहयोग लिया करते थे।
एनआईसी में नूरी दरवाजा, एमएम गेट निवासी कंप्यूटर ऑपरेटर पंकज भी उनके बराबर में बैठा करता था। वह वर्ष 2013 से कार्यालय में कार्यरत है। पूर्व में शस्त्र लाइसेंस की ऑनलाइन फीडिंग का कार्य भी पंकज ने किया था। इसलिए उन्हें एनडीएएल पोर्टल की जानकारी थी।
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प्रशांत कुमार ने केस में लिखा कि 15 अप्रैल को वह अवकाश पर गए थे। तभी उन्हें पता चला कि बाहर के लाइसेंस में छेड़छाड़ की गई है। लाइसेंस धारकों के नाम और पते में परिवर्तन कर दिया गया। एलिस पोर्टल पर शस्त्र लाइसेंस धारक ओमप्रकाश के स्थान पर अर्जन सिंह का नाम और पता कर दिया गया है।
जनपद के बाहर के लाइसेंस के विवरण में साइट खोलकर एडिटिंग कर दी गई है। यह लाइसेंस ऊधमपुर, जम्मू कश्मीर का बना हुआ था। इसका आगरा में कोई नवीनीकरण नहीं हुआ था। इसका पंजीकरण भी नहीं हुआ था। इसमें एडिटिंग किया जाना अवैधानिक है।
इस संबंध में कोई आवेदन भी प्राप्त नहीं हुआ था। इसके बावजूद लाइसेंस के संबंध में पोर्टल पर परिवर्तन किया गया। यह तभी हो सकता है, जब पोर्टल की शासकीय आईडी और पासवर्ड को प्राप्त कर लिया जाता है। पंकज ने बिना किसी आदेश के परिवर्तन किया। इस बारे में पूछताछ करने पर उन्होंने परिवर्तन करने की बात स्वीकार कर ली। इस मामले में अभी जांच जारी है। और भी मामले सामने आ सकते हैं। इनमें शस्त्रों के डेटा में छेड़छाड़ की गई हो।
पहले भी सामने आया शस्त्र लाइसेंस का फर्जीवाड़ा
यह कोई पहला मामला नहीं है जब शस्त्र लाइसेंस का फर्जीवाड़ा सामने आया है। पहले भी फर्जी शस्त्र और लाइसेंस के मामले में मुकदमा दर्ज हुआ था। तब एसटीएफ ने जांच की थी। निरीक्षक ने केस दर्ज कराया था। आरोपियों ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। एक आरोपी आयुध कार्यालय का सेवानिवृत्त बाबू भी हैं।
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कलेक्ट्रेट स्थित आयुध कार्यालय के सहायक प्रशांत कुमार ने थाना नाई की मंडी में तहरीर दी थी। उन्होंने कहा कि लाइसेंस नवीनीकरण का ब्योरा एलिस पोर्टल पर दर्ज किया जाता है। पिछले दिनों नेटवर्क की समस्या आने पर वह एनआईसी के कंप्यूटर का भी सहयोग लिया करते थे।
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एनआईसी में नूरी दरवाजा, एमएम गेट निवासी कंप्यूटर ऑपरेटर पंकज भी उनके बराबर में बैठा करता था। वह वर्ष 2013 से कार्यालय में कार्यरत है। पूर्व में शस्त्र लाइसेंस की ऑनलाइन फीडिंग का कार्य भी पंकज ने किया था। इसलिए उन्हें एनडीएएल पोर्टल की जानकारी थी।
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प्रशांत कुमार ने केस में लिखा कि 15 अप्रैल को वह अवकाश पर गए थे। तभी उन्हें पता चला कि बाहर के लाइसेंस में छेड़छाड़ की गई है। लाइसेंस धारकों के नाम और पते में परिवर्तन कर दिया गया। एलिस पोर्टल पर शस्त्र लाइसेंस धारक ओमप्रकाश के स्थान पर अर्जन सिंह का नाम और पता कर दिया गया है।
जनपद के बाहर के लाइसेंस के विवरण में साइट खोलकर एडिटिंग कर दी गई है। यह लाइसेंस ऊधमपुर, जम्मू कश्मीर का बना हुआ था। इसका आगरा में कोई नवीनीकरण नहीं हुआ था। इसका पंजीकरण भी नहीं हुआ था। इसमें एडिटिंग किया जाना अवैधानिक है।
इस संबंध में कोई आवेदन भी प्राप्त नहीं हुआ था। इसके बावजूद लाइसेंस के संबंध में पोर्टल पर परिवर्तन किया गया। यह तभी हो सकता है, जब पोर्टल की शासकीय आईडी और पासवर्ड को प्राप्त कर लिया जाता है। पंकज ने बिना किसी आदेश के परिवर्तन किया। इस बारे में पूछताछ करने पर उन्होंने परिवर्तन करने की बात स्वीकार कर ली। इस मामले में अभी जांच जारी है। और भी मामले सामने आ सकते हैं। इनमें शस्त्रों के डेटा में छेड़छाड़ की गई हो।
पहले भी सामने आया शस्त्र लाइसेंस का फर्जीवाड़ा
यह कोई पहला मामला नहीं है जब शस्त्र लाइसेंस का फर्जीवाड़ा सामने आया है। पहले भी फर्जी शस्त्र और लाइसेंस के मामले में मुकदमा दर्ज हुआ था। तब एसटीएफ ने जांच की थी। निरीक्षक ने केस दर्ज कराया था। आरोपियों ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। एक आरोपी आयुध कार्यालय का सेवानिवृत्त बाबू भी हैं।