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कोरोना के खेल मे आंकड़ेबाजी, कोरोना संक्रमित मृतक हुए स्वस्थ्य

Sat, 19 Jun 2021 09:52 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sat, 19 Jun 2021 09:52 PM IST
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Statistics in the game of Corona, Corona infected dead became healthy
कोटला चुंगी चौराहे पर कोरोना की जांच करती स्वास्थ्य विभाग की टीम - फोटो : FIROZABAD
फिरोजाबाद। कोरोना के आंकड़ों में स्वास्थ्य विभाग शासन को भी गुमराह कर रहा है। लापरवाही इतनी नजर आ रही है कि जिनका कोरोना के कारण मौत हो गई उन्हें भी स्वास्थ्य विभाग ने आंकड़ों में स्वस्थ घोषित कर दिया गया है। उन्होंने निर्धारित एक समय बाद होम आइसोलेेशन पूरा दिखाकर कोरोना से ठीक होने वाले आंकड़ों में जोड़ दिया है। यह सिर्फ एक या दो केस नहीं, बल्कि होम आइसोलेशन में मरने वाले अधिकांश संक्रमित मरीजों की रिपोर्ट में यही दिखा फर्जीवाड़ा नजर आ रहा है।
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जनपद में 8676 मरीज कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार 8510 मरीज ठीक हो गए। कुल 135 संक्रमितों के मरने की रिपोर्ट ही शासन द्वारा बनाए गए पोर्टल पर चढ़ाई है। स्वास्थ्य विभाग होम आइसोलेेशन में भर्ती होने वाले कोरोना मरीजों की पल-पल की अपडेट लेने का दावा करता रहा। जबकि होम आइसोलेशन में मृतक हुए कोरोना संक्रमितों की रिपोर्ट में लापरवाही उजागर हो रही है।
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कोरोना की रिपोर्ट आने के बाद जो होम आइसोलेशन में मर गए। उनको 14 दिन बाद स्वास्थ्य विभाग ने होम आइसोलेशन का समय दिखाकर पोर्टल से केस बंद कर दिया है। केस बंद होने का कारण स्वास्थ्य विभाग ने मरीज का मृत होना नहीं दिखाया है। मृतक संख्या के आंकड़ों में भी कोरोना संकमित मृतकों को नहीं जोड़ा है। जब परिजनों ने पोर्टल चेक किया तो होम आइसोलेशन पूरा करके केस को बंद देखा पाया तो चौंक गए।
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केस नंबर एक
प्राथमिक विद्यालय धौरउ में तैनात शिक्षक अनिल कुमार की कोरोना रिपोर्ट 27 अप्रैल को पॉजिटिव आई थी। 29 अप्रैल को शिक्षक की होम आइसोलेशन में मृत्यु हो गई थी। स्वास्थ्य विभाग कागजों में ही मरीज को कोई तकलीफ न होने की बात दिखाता रहा। आठ मई को पोर्टल पर केस बंद कर दिया। इसमें केेस बंद करने का कारण होम आइसोलेशन का पूरा समय दिखा गया है। इसमें मृत्यु का जिक्र नहीं किया है।
केस नंबर दो
- महावीर नगर निवासी 38 वर्षीय युवक की रिपोर्ट 24 अप्रैल की कोरोना पॉजिटिव आई थी। परिवारजनों के मुताबिक युवक की 26 अप्रैल की मृत्यु हो गई थी। स्वास्थ्य विभाग में पांच मई को युवक को स्वस्थ दिखाकर केस को पोर्टल पर बंद कर दिया। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में कोरोना मरीज ठीक हो गया है। जबकि हकीकत में रिपोर्ट के दूसरे दिन ही मरीज की मौत हो चुकी थी।

होम आइसोलेशन में मरीजों की निगरानी की गई थी। हमने टीमें भी अलग से लगाई थी। इसमें शिक्षकों की ड्यूटी लगाई थी। हम चेक कराते हैं कि आखिर स्थिति क्या है। यदि किसी भी स्तर से लापरवाही हुई होगी तो हम संबंधित के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
डॉ. नीता कुलश्रेष्ठ, सीएमओ
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