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ताजमहल से प्यार लेकिन ताजनगरी से नहीं, आगरा में इन देशों के पर्यटकों को हो रही ये परेशानी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Updated Fri, 05 Jan 2018 11:56 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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दक्षिण कोरिया, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के सैलानी ताजमहल का दीदार करने तो आगरा आते हैं, लेकिन आगरा में रुकना पसंद नहीं करते।
दिल्ली से सुबह आगरा आकर शाम को वापस लौटने वालों की सबसे ज्यादा संख्या दक्षिण कोरियाई और संयुक्त अरब अमीरात के सैलानियों की है। आगरा में प्रदूषण, गंदगी और जाम की परेशानी और अपनी भाषा के गाइड न मिलने की वजह से इन देशों के सैलानियों की आगरा से दूरी बढ़ी हुई है।
ताजमहल पर बीते साल आठ लाख विदेशी सैलानियों ने टिकट लेकर प्रवेश किया, इनमें से करीब पांच लाख ने आगरा में रात्रि विश्राम किया, लेकिन दो देशों दक्षिण कोरिया और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के एक भी सैलानी ने आगरा के होटलों में नाइट स्टे नहीं किया।
सऊदी अरब के केवल 44 सैलानियों ने नवंबर में ही आगरा में रुकना पसंद किया। बाकी सभी महीनों में उनकी संख्या शून्य रही। आगरा में सबसे कम रुकने वाले पर्यटक सिंगापुर, स्विटजरलैंड, नीदरलैंड के हैं, जबकि भारत से इन तीनों ही देशों में घूमने वाले पर्यटकों की संख्या ज्यादा है।
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दिल्ली से सुबह आगरा आकर शाम को वापस लौटने वालों की सबसे ज्यादा संख्या दक्षिण कोरियाई और संयुक्त अरब अमीरात के सैलानियों की है। आगरा में प्रदूषण, गंदगी और जाम की परेशानी और अपनी भाषा के गाइड न मिलने की वजह से इन देशों के सैलानियों की आगरा से दूरी बढ़ी हुई है।
ताजमहल पर बीते साल आठ लाख विदेशी सैलानियों ने टिकट लेकर प्रवेश किया, इनमें से करीब पांच लाख ने आगरा में रात्रि विश्राम किया, लेकिन दो देशों दक्षिण कोरिया और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के एक भी सैलानी ने आगरा के होटलों में नाइट स्टे नहीं किया।
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सऊदी अरब के केवल 44 सैलानियों ने नवंबर में ही आगरा में रुकना पसंद किया। बाकी सभी महीनों में उनकी संख्या शून्य रही। आगरा में सबसे कम रुकने वाले पर्यटक सिंगापुर, स्विटजरलैंड, नीदरलैंड के हैं, जबकि भारत से इन तीनों ही देशों में घूमने वाले पर्यटकों की संख्या ज्यादा है।
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इन भाषाओं के गाइड नहीं
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- फोटो : अमर उजाला
आगरा में एक दर्जन विदेशी भाषाओं के गाइड ही नहीं हैं, इनमें हिब्रू, कोरियन, चीनी, अरबी, पुर्तगीज, फ्लेमिश भाषाओं के गाइड हैं। ताजमहल को अपनी भाषा में समझने के लिए अधिकांश सैलानियों को गाइड अंग्रेजी में ही समझाते है, जिससे वह भावनात्मक रूप से जुड़ाव महसूस नहीं करते। चीनी भाषा के एकमात्र गाइड भी अब दिल्ली चले गए।
पूर्वी एशियाई देशों में जापान से सैलानियों की तादाद काफी बढ़ रही है। आगरा में जनवरी के महीने में सबसे ज्यादा जापानी पर्यटक ही रुके। एलआईयू की रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी में 9210 जापानी पर्यटकों ने आगरा में रात्रि विश्राम किया।
ग्रुप में चलने के कारण इनकी संख्या ज्यादा रही। वहीं ब्रिटिश पर्यटकों ने नवंबर महीने में ताज का दीदार और आगरा की संस्कृति को देखने में ज्यादा वक्त गुजारा। नवंबर में 7340 ब्रिटिश पर्यटकों ने रात्रि विश्राम किया।
पूर्वी एशियाई देशों में जापान से सैलानियों की तादाद काफी बढ़ रही है। आगरा में जनवरी के महीने में सबसे ज्यादा जापानी पर्यटक ही रुके। एलआईयू की रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी में 9210 जापानी पर्यटकों ने आगरा में रात्रि विश्राम किया।
ग्रुप में चलने के कारण इनकी संख्या ज्यादा रही। वहीं ब्रिटिश पर्यटकों ने नवंबर महीने में ताज का दीदार और आगरा की संस्कृति को देखने में ज्यादा वक्त गुजारा। नवंबर में 7340 ब्रिटिश पर्यटकों ने रात्रि विश्राम किया।
इन देशों के पर्यटकों का नाइट स्टे ज्यादा
अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, जापान, जर्मनी, स्पेन, आस्ट्रेलिया, इटली, ईरान, कनाडा के पर्यटक आगरा में ज्यादा नाइट स्टे कर रहे हैं।
टूरिज्म गिल्ड के महासचिव राजीव सक्सेना के अनुसार पर्यटकों के मिजाज में तेजी से बदलाव आ रहा है। उनकी जरूरतों के मुताबिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं नहीं मिलेंगी तो वह रुकेंगे नहीं।
कभी फ्रांसीसी, स्पेनिश, इजराइली और जर्मन सैलानी आगरा बहुत आते थे, लेकिन उनकी जरूरतों पर ध्यान नहीं दिया गया। नए ट्रेंड के मुताबिक पर्यटन सुविधाएं बढ़ानी होंगी’।
टूरिज्म गिल्ड के महासचिव राजीव सक्सेना के अनुसार पर्यटकों के मिजाज में तेजी से बदलाव आ रहा है। उनकी जरूरतों के मुताबिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं नहीं मिलेंगी तो वह रुकेंगे नहीं।
कभी फ्रांसीसी, स्पेनिश, इजराइली और जर्मन सैलानी आगरा बहुत आते थे, लेकिन उनकी जरूरतों पर ध्यान नहीं दिया गया। नए ट्रेंड के मुताबिक पर्यटन सुविधाएं बढ़ानी होंगी’।