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सीएम साहब... नहीं बदले एसएन के हालात
अमर उजाला ब्यूरो, अागरा
Updated Thu, 17 Mar 2016 02:09 AM IST
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एसएन मेडिकल
- फोटो : demo
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एसएन मेडिकल कालेज को एम्स सरीखा बनाने के लिए भले केंद्र से लेकर प्रदेश सरकार तक प्रयासरत हो, खुद सीएम निरीक्षण कर चुके हों, फिर भी यहां के हालत नहीं बदले हैं। मरीजों के साथ चिकित्सकों का अमानवीय चेहरा कई बार समाने आ चुका है। वहीं मरीजों को बाहर से दवाएं लेनी पड़ती हैं।
चार घंटे तक बेहोश पड़ा रहा युवक
घड़ी वाली बिल्डिंग में सुबह नौ बजे से चार घंटे तक एक युवक बेहोश पड़ा रहा। सिर में चोट होने के कारण खून बह रहा था। सीढ़ियों के पास पड़े इस घायल के पास से डाक्टर और नर्सिंग स्टाफ गुजरता रहा, लेकिन किसी ने इसे देखने की जहमत नहीं उठाई। प्राचार्य डा. एसके गर्ग ने बताया कि उसके साथ कोई परिजन नहीं था। जानकारी के बाद पुलिस के जरिये इमरजेंसी में भर्ती करा दिया है।
दो साल से कमरे में बंद ब्रेकी थेरेपी मशीन
कैंसर रोग विभाग में दो साल से बंद ब्रेकी थेरेपी मशीन कैंसर ट्यूमर तक सटीक दवा पहुंचाने के काम आती है। सामाजिक संस्था हेल्प आगरा ने एक बार ठीक भी करा दिया था, लेकिन इससे इलाज शुरू नहीं हुआ। संस्था अध्यक्ष मुकेश जैन ने बताया कि कई मशीन शुरू करने की विनती कर चुके हैं। प्राचार्य ने बताया कि इसका एक खराब उपकरण दिल्ली सही होने भेजा है।
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दवा को बजट नहीं, किल्लत बढ़ी
मरीजों को कम दवाएं मिल रहीं हैं। इस वित्तीय वर्ष में करीब चार करोड़ रुपये दवा, लैब के लिए केमिकल और आक्सीजन के लिए मंजूर किए। ये बीते महीने खत्म हो चुका है। औसतन यहां रोजाना 1500 मरीजों की ओपीडी रहती है। कालेज ने बजट मांगा, लेकिन शासन ने नामंजूर कर दिया।
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चार घंटे तक बेहोश पड़ा रहा युवक
घड़ी वाली बिल्डिंग में सुबह नौ बजे से चार घंटे तक एक युवक बेहोश पड़ा रहा। सिर में चोट होने के कारण खून बह रहा था। सीढ़ियों के पास पड़े इस घायल के पास से डाक्टर और नर्सिंग स्टाफ गुजरता रहा, लेकिन किसी ने इसे देखने की जहमत नहीं उठाई। प्राचार्य डा. एसके गर्ग ने बताया कि उसके साथ कोई परिजन नहीं था। जानकारी के बाद पुलिस के जरिये इमरजेंसी में भर्ती करा दिया है।
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दो साल से कमरे में बंद ब्रेकी थेरेपी मशीन
कैंसर रोग विभाग में दो साल से बंद ब्रेकी थेरेपी मशीन कैंसर ट्यूमर तक सटीक दवा पहुंचाने के काम आती है। सामाजिक संस्था हेल्प आगरा ने एक बार ठीक भी करा दिया था, लेकिन इससे इलाज शुरू नहीं हुआ। संस्था अध्यक्ष मुकेश जैन ने बताया कि कई मशीन शुरू करने की विनती कर चुके हैं। प्राचार्य ने बताया कि इसका एक खराब उपकरण दिल्ली सही होने भेजा है।
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दवा को बजट नहीं, किल्लत बढ़ी
मरीजों को कम दवाएं मिल रहीं हैं। इस वित्तीय वर्ष में करीब चार करोड़ रुपये दवा, लैब के लिए केमिकल और आक्सीजन के लिए मंजूर किए। ये बीते महीने खत्म हो चुका है। औसतन यहां रोजाना 1500 मरीजों की ओपीडी रहती है। कालेज ने बजट मांगा, लेकिन शासन ने नामंजूर कर दिया।