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शिक्षक संघ चुनाव: 64 साल पहले बनी थी 'औटा', सिर्फ डेलीगेट्स करते थे मतदान, जनिए इसके बारे में

Tue, 15 Dec 2020 11:23 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Tue, 15 Dec 2020 11:23 AM IST
सार

  • पिछले चुनाव से ही शिक्षकों ने सीधे मतदान करना शुरू किया
  • औटा के गठन के बाद शिक्षकों ने अपने हितों के लिए संघर्ष शुरू किया

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Shikshak Sangh Election: Know About Auta Teachers Elected
मतदान (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock

विस्तार

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (पहले आगरा विश्वविद्यालय) शिक्षक संघ (औटा) चुनाव की सरगर्मी तेज हो गई है। चुनाव लड़ने के इच्छुक शिक्षक आगरा व अलीगढ़ मंडल के एडेड कॉलेजों में पहुंचकर प्रचार कर रहे हैं। चुनाव की प्रक्रिया 19 व 20  दिसंबर को पूरी होगी। औटा का पदाधिकारी होना शिक्षकों के लिए गर्व की बात होती है। यह करीब 64 वर्ष पुराना संगठन है।
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औटा के संस्थापक सदस्य, फुपुक्टा के पूर्व महामंत्री व पूर्व कुलपति डॉ. जीसी सक्सेना का कहना है कि वर्ष 1956 में औटा की स्थापना डॉ. शीतल प्रसाद की पहल पर हुई थी। यह अधिक सक्रिय नहीं रही। एक-दो वर्ष बाद संगठन का पुनर्गठन किया गया। इसमें आरबीएस कॉलेज के डॉ. जीसी सक्सेना, डॉ. मधुसूदन सिंह, आगरा कॉलेज के डॉ. रामगोपाल सिंह चौहान व डॉ. जेएस गुप्ता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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डॉ. जीसी सक्सेना ने बताया कि उस समय शिक्षक अपने हितों के लिए भी विरोध प्रदर्शन के लिए आगे नहीं आते थे। एक बार जुलूस निकालने की बात आई तो शिक्षकों ने कहा कि वह नारे नहीं लगाएंगे, मौन जुलूस ही निकालेंगे। संगठन के गठन के बाद शिक्षकों के हितों के लिए तमाम संघर्ष किए गए। यूजीसी से ग्रेड मनवाया गया।
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Shikshak Sangh Election: Know About Auta Teachers Elected
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला
औटा के पदाधिकारियों ने फुपुक्टा के गठन में भूमिका निभाई
वर्ष 2000 से 2003 तीन तक औटा के महामंत्री रहे आरबीएस कॉलेज के शिक्षक (सेवानिवृत्त) डॉ. रंजीत सिंह भदौरिया ने बताया कि औटा के गठन के बाद आरबीएस कॉलेज के डॉ. जवाहर सिंह धाकरे, डॉ. बीके सिंह, नरायन कॉलेज शिकोहाबाद के श्रीकृष्ण सिंह चौहान के अलावा डॉ. रामगोपाल शर्मा ने संगठन को काफी मजबूती दी। उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक महासंघ (फुपुक्टा) के गठन में भी औटा के पदाधिकारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


वर्ष 2000 के बाद संविधान बना 
डॉ. रंजीत सिंह भदौरिया ने बताया कि वर्ष 2000 से पहले औटा का लिखित संविधान नहीं था। उन्होंने अपने कार्यकाल में संगठन के तत्कालीन अध्यक्ष डीएस कॉलेज अलीगढ़ के डॉ. रक्षपाल सिंह के साथ मिलकर संविधान तैयार कराया। तब से प्रत्येक तीन वर्ष बाद औटा के चुनाव होने लगे।


उससे पहले चुनाव निर्धारित समय पर नहीं हो रहे थे। औटा के पहले अध्यक्ष डॉ. रामगोपाल सिंह चौहान व महामंत्री डॉ. जेएस गुप्ता थे। दोनों नामित किए गए थे। वर्ष 2017 के चुनाव से पहली बार शिक्षकों ने सीधे मतदान शुरू किया। इसके पहले डेलीगेट्स चुने जाते थे। कुल 104 डेलीगेट्स ही औटा के पदाधिकारियों को चुनते थे।
 

करीब 1500 शिक्षक मतदाता है
औटा के महामंत्री डॉ. निशांत चौहान का कहना है कि विश्वविद्यालय से संबद्ध 39 एडेड कॉलेजों के करीब 1500 शिक्षक मतदाता है।
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