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हमारे सांसद: न बड़ी रैलियां कीं, न रोड शो, फिर भी पांच बार जीता लोकसभा चुनाव

Tue, 12 Mar 2019 03:53 PM IST
राजेश सैनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: राजेश सैनी Updated Tue, 12 Mar 2019 03:53 PM IST
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seth achal singh first mp of agra who wins lok sabha elections five time
आगरा के पहले सांसद सेठ अचल सिंह
आजादी के आंदोलन में अंग्रेजों के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले सेठ अचल सिंह ने देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत चुनावी राजनीति में भी ऐसी लकीर खींची, जिसे कोई पार नहीं कर पाया है। 1951 से लेकर 1971 तक सेठ अचल सिंह आगरा लोकसभा सीट पर लगातार पांच बार सांसद चुने गए। वो भी तब, जब न उन्होंने कोई बड़ी रैली की और न ही कोई रोड शो।
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वो नुक्कड़ सभाएं करते थे, लोग पैदल ही आते थे नेताओं को सुनने के लिए। कांग्रेस से जुड़े लोगों का कहना है कि सेठ अचल सिंह नेहरू परिवार के करीबी माने जाते थे। मोती लाल नेहरू उनके परिवार के वकील थे। इस वजह से उनका सीधा संबंध था। विश्वास पात्र भी थे। सेठ अचल सिंह के राजनीतिक विरोधी उन्हें इस बात पर घेरते थे कि वे सांसद चुने जाते हैं लेकिन संसद में कभी कुछ बोलते नहीं है। हालांकि उनके कार्यकाल में शहर में कई अहम कार्य हुए। 
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वर्ष 1951 में उन्होंने लोकसभा का चुनाव लड़ा। तब आगरा लोकसभा सीट को आगरा डिस्ट्रिक्ट (वेस्ट) के नाम से जाना जाता था। उनका मुकाबला कृष्णदत्त पालीवाल से हुआ। कृष्णदत्त पालीवाल को आधे से भी कम वोट मिले। 1957 में भी कृष्षदत्त पालीवाल से मुकाबला हुआ लेकिन जीत सेठजी की हुई।
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तीसरे चुनाव में 1962 में कृष्ण दत्त पालीवाल ने चुनाव नहीं लड़ा था। तब सेठ अचल सिंह का मुकाबला आरपीआई के हाजी हैदर बख्श से हुआ। 1967 में उनका मुकाबला हीरोरानी से हुआ और 1971 में उन्होंने बीकेडी के बाबूराम सिंघल को हराया। 1977 में जनता पार्टी की लहर उठी और जनता पार्टी के शंभू नाथ चतुर्वेदी ने सेठ अचल सिंह को शिकस्त दी।

जवाहर पुल बनवाया था

सेठ अचल सिंह के कार्यकाल में आगरा में स्टेडियम बना और जवाहर पुल का निर्माण हुआ, जिसका उद्घाटन भी पंडित जवाहर लाल नेहरू ने किया। कई सड़कों का भी निर्माण कराया।


सन 1951 का चुनाव 
सेठ अचल सिंह          1021157
कृष्ण दत्त पालीवाल        45882

सन 1957 का चुनाव 

सेठ अचल सिंह       -    110710
कृष्ण दत्त पालीवाल  -    80995

सन 1962 का चुनाव 
सेठ अचल सिंह    -    1.28 लाख
हाजी हैदर बख्श   -    74  हजार
राजनाथ कुंजरू    -    30 हजार

सन 1967 का चुनाव 
सेठ अचल सिंह   -  95.8 हजार       
हीरोरानी            -  66.3 हजार

सन 1971 का चुनाव 
सेठ अचल सिंह     -  1.60 लाख
बाबूलाल सिंघल    -  47.1 हजार

आजादी की खुशी में दिए वोट 

वयोवृद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चिम्मन लाल जैन बताते हैं कि पहले चुनाव में कोई नारा नहीं था। न ही लोग कुछ मांग करते थे। न ही नेताओं ने वादे किए थे। तब आजादी के बाद के पहले चुनाव की खुशी थी। लोग खुश थे कि संविधान लागू होने के बाद अपनी सरकार चुन रहे हैं। उम्मीदवार एक दूसरे पर कोई आरोप नहीं लगाते थे। 

सब अपनी-अपनी बात कहते थे। हर सभा में संविधान लागू होने की बधाई दी जाती थी। उस दौर में आज की तरह संसाधन नहीं थे। नेता नुक्कड़ सभा ज्यादा करते थे। यह भी आसान नहीं थी। लोगों तक संदेश पहुंचाना आसान नहीं था। कार्यकर्ता घर-घर जाते थे। देहात में तो बुग्गी को ही मंच बना दिया जाता था।
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