यूपी चुनाव 2022: अपनी ही पार्टी के दांव से चित हो गए रालोद नेता, मांट से नामांकन हुआ निरस्त
सपा और रालोद गठबंधन के बाद दोनों ही दलों के उम्मीदवारों द्वारा नामांकन किए जाने से मांट विधानसभा क्षेत्र सुर्खियों में बना हुआ है। यहां से रालोद ने पहले योगेश नौहवार को बी फार्म दिया था, जिसके आधार पर उन्होंने नामांकन कर दिया था।
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पिछले दो विधानसभा चुनावों में बसपा के कद्दावर नेता और लगातार आठ बार के विधायक श्याम सुंदर शर्मा को मथुरा के मांट विधानसभा क्षेत्र में तगड़ी टक्कर देने वाले योगेश नौहवार इस बार अपनी पार्टी रालोद के दांव से ही चित हो गए। उनका बी फार्म पार्टी द्वारा निरस्त कर दिए जाने के बाद निर्दलीय के रूप में 10 प्रस्तावक न होने की स्थिति में रिटर्निंग ऑफिसर ने नामांकन निरस्त कर दिया। जिला निर्वाचन अधिकारी नवनीत सिंह चहल ने बताया कि योगेश नौहवार का नामांकन निरस्त हो गया है।
सपा और रालोद गठबंधन के बाद दोनों ही दलों के उम्मीदवारों द्वारा नामांकन किए जाने से मांट विधानसभा क्षेत्र सुर्खियों में बना हुआ है। यहां से रालोद ने पहले योगेश नौहवार को बी फार्म दिया था, जिसके आधार पर उन्होंने नामांकन कर दिया। योगेश पिछले 2017 के विधानसभा चुनाव में 500 से भी कम मतों से हारे थे।
इससे पहले 2012 के चुनाव में भी वह दूसरे स्थान पर रहे थे। लेकिन रालोद से नामांकन के बाद इस बार गठबंधन के बावजूद सपा ने भी डॉ. संजय लाठर को उम्मीदवार बना दिया। इस तरह गठबंधन के उम्मीदवार आमने-सामने हो जाने पर रालोद ने अपना निर्णय बदल दिया।
नहीं हो पाए 10 प्रस्तावक
योगेश नौहवार का बी फार्म निरस्त करते हुए सपा उम्मीदवार संजय लाठर की पत्नी बबीता को सी फार्म देते हुए पार्टी का उम्मीदवार बना दिया। सोमवार को हुई नामांकन पत्रों की जांच में योगेश का नामांकन पार्टी के बदले फैसले के कारण निरस्त हो गया। पार्टी का साथ हटने की स्थिति में उनके नामांकन में 10 प्रस्तावकों का अभाव निरस्तीकरण का कारण बन गया।
इस स्थिति से अब रालोद उम्मीदवार के रूप में मांट से बबीता उम्मीदवार बन गई हैं। हालांकि योगेश शुरू से ही कह रहे थे कि वह चुनाव जरूर लड़ेंगे लेकिन अब योगेश नौहवार का कहना है कि मेरा पर्चा पार्टी ने खारिज करा दिया है। फार्म सी संजय लाठर की पत्नी बबीता को दे दिया, लेकिन मैं जनता के बीच बगैर चुनाव के भी बना रहूंगा।
नामांकन वापसी के बाद संजय का रास्ता साफ
27 जनवरी को नामांकन वापस होना है। ऐसी स्थिति में बबीता अपना नामांकन वापस ले लेंगी और सपा उम्मीदवार के तौर पर मैदान में संजय लाठर ही रह जाएंगे। वह रालोद-सपा गठबंधन के प्रत्याशी रहेंगे।