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हरषे बिबुध बिलोकि बराता, बरषहिं सुमन सुमंगल दाता
हरषे बिबुध बिलोकि बराता, बरषहिं सुमन सुमंगल दाता
Updated Tue, 27 Sep 2016 12:16 AM IST
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हरषे बिबुध बिलोकि बराता, बरषहिं सुमन सुमंगल दाता
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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अवधपुरी (रावतपाड़ा) का अद्भुत दृश्य। चारों ओर उल्लास। रघुनंदन के गगनभेदी जयकारे। अपने आराध्य मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की धुन में रमे भक्तों का रेला। दूल्हा बने दुलारे राम और उनके तीनों भाइयों के दर्शन के लिए आतुर हाथों में पुष्प और आरती के थाल के लिए खड़े बच्चे, महिलाएं, बूढ़े और नौजवान। यह नजारा था सोमवार शाम का। लंबे इंतजार के बाद रात करीब 10 बजे राम दिव्य रथ पर विराजमान होते हैं तो चारों ओर जयघोष गूंज उठता है। सिर पर दमकता मुकुट और चेहरे पर अलौकिक मुस्कान बिखेरते राम के दर्शन पाकर बरात में शामिल अयोध्या वासियों का मन शीतल हो जाता है। दूल्हा बने रामलला को अपलक निहारते लोग पुष्पों की वर्षा करते हैं। ढोल, नगाड़े, बैंड की मधुर धुन, करतब दिखाते अखाड़ों और तीन भाई, पिता दशरथ, गुरुजनों और देवी देवताओं के साथ राम की बरात अयोध्या (रावतपाड़ा) से जनकपुरी (बल्केश्वर) के लिए प्रस्थान करती है।
आगरा। उत्तर भारत की ऐतिहासिक रामबरात सोमवार को रावतपाड़ा (अयोध्या नगरी) से निकली। शाम से श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ने लगा था। प्राचीन मन:कामेश्वर महादेव मंदिर की बारहदरी से शृृंगार के बाद दूल्हा बने श्रीराम, भ्राता लखन, भरत और शत्रुघ्न को आरती के बाद रथों पर विराजमान किया गया। सिर पर रत्न जड़ित मुकुट, सूर्य जैसा तेज, अधरों पर मनमोहक मुस्कान के लिए चारों भाइयों के दर्शन कर बारात में शामिल श्रद्धालु निहाल हो गए। पूरे यात्रा मार्ग में कई जगह-जगह पुष्प वर्षा और आरती कर बारात का स्वागत किया गया।
श्रीराम की बरात शाम करीब पांच बजे रावतपाड़ा प्रारंभ हुई। बरात में सबसे आगे रघुवंश की ध्वज पताका लिए अश्वारोही चल रहे थे। इसके बाद विघ्न विनाशक श्री गणेश जी की सवारी थी। इनके पीछे धार्मिक और सामाजिक संदेश देती हुई करीब 120 झांकियां चल रही थीं। करतब दिखाते अखाड़े और शहर के करीब 11 बैंड बरात में मधुर धुन बिखेर रहे थे। रात करीब साढ़े आठ बजे प्रभु राम और उनके तीनों भाइयों को शृृंगार के बाद बारहदरी में लाया गया। यहां चारों स्वरूपों की आरती जिलाधिकारी गौरव दयाल, एसएसपी डा. प्रीतिंदर सिंह, रक्षा संपदा अधिकारी अमित कुमार मिश्रा ने की। आरती के बाद चारों स्वरूप दिव्य रथों पर विराजमान हुए। इस तरह वर यात्रा जनकपुरी के लिए रवाना हुई। मीडिया प्रभारी राहुल गौतम ने बताया कि वर यात्रा सुबह नौ बजे बल्केश्वर में अग्रवन से प्रारंभ होगी। स्वागत के बाद पूरी जनकपुरी का भ्रमण करेगी।
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इस अवसर पर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष जगन प्रसाद गर्ग, रामप्रकाश अग्रवाल, अतुल बंसल, दिनेश बंसल भगवानदास, अजय, विनोद जौहरी, टीएन अग्रवाल, प्रेमकिशन अग्रवाल, मुकेश जौहरी, संतशरण बरूआ, राकेश अग्रवाल, प्रवीन स्वरूप, अनुराग शुक्ला, प्रवीन गर्ग, संजय बंसल, विशन माहेश्वरी, पंकज मोहन शर्मा, मनोज अग्रवाल, अशोक राठी, कृष्ण मुरारी, अमित गर्ग, मनोज माहेश्वरी, राजेश शर्मा सहित सहित अनेक पदाधिकारी मौजूद थे।
रत्न जड़ित मुकुट किए धारण
शृृंगार प्रभारी रवि गोस्वामी व मुकेश अग्रवाल ने बताया मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम और उनके भाई रत्न जड़ित मुकुट धारण कराए गए। राम के मुकुट में सूर्यवंश का प्रतीक सूर्य जगमगा रहा था। मुकुटों में इलेक्ट्रिक वर्क किया गया था। लक्ष्मण शेषावतार होने के कारण उनके मुकुट पर शेषनाग विराजमान थे। भ्राता भरत तथा भ्राता शत्रुघ्न जी के मुकुटों में कमल अपनी अनोखी आभा लिए थे। चारों मुकुटों में हीरा, पन्ना, मोती, माणिक आदि रत्न जड़े थे। राजघरानों से आई कलंगी लगाई गई थीं।
राम बरात का रूट ये
राम बरात अपने परंपरागत मार्ग रावतपाड़ा से प्रारंभ होकर, जौहरी बाजार, दरेसी, कचहरी घाट, बेलनगंज, पथवारी, धूलियागंज, घटिया, फुलट्टी, फव्वारा होते हुए पुन: रावतपाड़ा से 27 सितंबर की सुबह जनकपुरी बने बल्केश्वर पहुंचेगी।
रामलीला में आज
मंगलवार (27 सितम्बर) को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की वर यात्रा बल्केश्वर में अग्रवन से सुबह नौ बजे बजे प्रारंभ होगी जो कि समस्त जनकपुरी क्षेत्र का भ्रमण कर डा. सुदर्शन सिंघल कोल्ड स्टोर पर समाप्त होगी।
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आगरा। उत्तर भारत की ऐतिहासिक रामबरात सोमवार को रावतपाड़ा (अयोध्या नगरी) से निकली। शाम से श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ने लगा था। प्राचीन मन:कामेश्वर महादेव मंदिर की बारहदरी से शृृंगार के बाद दूल्हा बने श्रीराम, भ्राता लखन, भरत और शत्रुघ्न को आरती के बाद रथों पर विराजमान किया गया। सिर पर रत्न जड़ित मुकुट, सूर्य जैसा तेज, अधरों पर मनमोहक मुस्कान के लिए चारों भाइयों के दर्शन कर बारात में शामिल श्रद्धालु निहाल हो गए। पूरे यात्रा मार्ग में कई जगह-जगह पुष्प वर्षा और आरती कर बारात का स्वागत किया गया।
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श्रीराम की बरात शाम करीब पांच बजे रावतपाड़ा प्रारंभ हुई। बरात में सबसे आगे रघुवंश की ध्वज पताका लिए अश्वारोही चल रहे थे। इसके बाद विघ्न विनाशक श्री गणेश जी की सवारी थी। इनके पीछे धार्मिक और सामाजिक संदेश देती हुई करीब 120 झांकियां चल रही थीं। करतब दिखाते अखाड़े और शहर के करीब 11 बैंड बरात में मधुर धुन बिखेर रहे थे। रात करीब साढ़े आठ बजे प्रभु राम और उनके तीनों भाइयों को शृृंगार के बाद बारहदरी में लाया गया। यहां चारों स्वरूपों की आरती जिलाधिकारी गौरव दयाल, एसएसपी डा. प्रीतिंदर सिंह, रक्षा संपदा अधिकारी अमित कुमार मिश्रा ने की। आरती के बाद चारों स्वरूप दिव्य रथों पर विराजमान हुए। इस तरह वर यात्रा जनकपुरी के लिए रवाना हुई। मीडिया प्रभारी राहुल गौतम ने बताया कि वर यात्रा सुबह नौ बजे बल्केश्वर में अग्रवन से प्रारंभ होगी। स्वागत के बाद पूरी जनकपुरी का भ्रमण करेगी।
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इस अवसर पर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष जगन प्रसाद गर्ग, रामप्रकाश अग्रवाल, अतुल बंसल, दिनेश बंसल भगवानदास, अजय, विनोद जौहरी, टीएन अग्रवाल, प्रेमकिशन अग्रवाल, मुकेश जौहरी, संतशरण बरूआ, राकेश अग्रवाल, प्रवीन स्वरूप, अनुराग शुक्ला, प्रवीन गर्ग, संजय बंसल, विशन माहेश्वरी, पंकज मोहन शर्मा, मनोज अग्रवाल, अशोक राठी, कृष्ण मुरारी, अमित गर्ग, मनोज माहेश्वरी, राजेश शर्मा सहित सहित अनेक पदाधिकारी मौजूद थे।
रत्न जड़ित मुकुट किए धारण
शृृंगार प्रभारी रवि गोस्वामी व मुकेश अग्रवाल ने बताया मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम और उनके भाई रत्न जड़ित मुकुट धारण कराए गए। राम के मुकुट में सूर्यवंश का प्रतीक सूर्य जगमगा रहा था। मुकुटों में इलेक्ट्रिक वर्क किया गया था। लक्ष्मण शेषावतार होने के कारण उनके मुकुट पर शेषनाग विराजमान थे। भ्राता भरत तथा भ्राता शत्रुघ्न जी के मुकुटों में कमल अपनी अनोखी आभा लिए थे। चारों मुकुटों में हीरा, पन्ना, मोती, माणिक आदि रत्न जड़े थे। राजघरानों से आई कलंगी लगाई गई थीं।
राम बरात का रूट ये
राम बरात अपने परंपरागत मार्ग रावतपाड़ा से प्रारंभ होकर, जौहरी बाजार, दरेसी, कचहरी घाट, बेलनगंज, पथवारी, धूलियागंज, घटिया, फुलट्टी, फव्वारा होते हुए पुन: रावतपाड़ा से 27 सितंबर की सुबह जनकपुरी बने बल्केश्वर पहुंचेगी।
रामलीला में आज
मंगलवार (27 सितम्बर) को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की वर यात्रा बल्केश्वर में अग्रवन से सुबह नौ बजे बजे प्रारंभ होगी जो कि समस्त जनकपुरी क्षेत्र का भ्रमण कर डा. सुदर्शन सिंघल कोल्ड स्टोर पर समाप्त होगी।