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मथुरा: राधे की धुन में चले जा रहे हैं ब्रजयात्री, ध्रुवजी की तपस्थली पहुंची राधारानी ब्रजयात्रा
Thu, 16 Nov 2023 05:36 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Thu, 16 Nov 2023 05:36 PM IST
सार
बरसाना से शुरू हुई राधारानी वार्षिक ब्रजयात्रा गुरुवार को जय गुरुदेव मन्दिर के पीछे स्थित अपने पड़ाव से चलकर सबसे पहले ध्रुवजी की तपस्थली मधुवन पहुंची।
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राधारानी ब्रजयात्रा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राधारानी ब्रजयात्रा 20वें दिन मधुवन से ध्रुवजी की तपस्थली के दर्शन करते हुए तालवन, कुमुदवन होते हुए सौंख रोड स्थित नौगांव में डाले गए पड़ाव पर पहुंची। इस बीच सन्त रमेश बाबा ने भक्त ध्रुव की उपासना पद्धति पर प्रकाश डाला।
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बरसाना से शुरू हुई राधारानी वार्षिक ब्रजयात्रा गुरुवार को जय गुरुदेव मन्दिर के पीछे स्थित अपने पड़ाव से चलकर सबसे पहले ध्रुवजी की तपस्थली मधुवन पहुंची। ध्रुव तपस्थली की महिमा बताते हुए रमेश बाबा महाराज ने यात्रियों को संबोधित करते हुए कहा कि 'हम जहां पहुंच रहे हैं ये वो स्थल है जहां बालक ध्रुव ने तपस्या कर केवल 6 माह में भगवद्प्राप्ति कर ली थी। उन्होंने बताया कि बालक बड़ा ही निर्मल होता है और निर्मल मन ही प्रभु को अच्छा लगता है। इसलिए भक्ति प्रारम्भ करने का सबसे उत्तम समय बाल्यावस्था ही है ।
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मधुवन बिहारी के दर्शन करने पश्चात हजारों ब्रजयात्री युगलनाम का संकीर्तन करते हुए महाप्रभु जी की बैठक गए, वहां श्रीकृष्ण कुंड का आचमन किया और फिर यात्रा मासूम नगर पहुंची, जहां यात्रा का ब्रजवासियों ने स्वागत किया।
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इसी तरह तालवन में भी ब्रजवासी आतिथ्य में लगे दिखे। तालवन से कुमुद वन दर्शन कर नाचते गाते यात्री पड़ाव स्थल पर पहुंचे। वहां भी जगह-जगह स्वागत से समस्त ब्रजयात्री आविर्भूत हुए। बंगाल से आये यात्रियों का कहना है कि रमेश बाबा की यात्रा में तीर्थो के दर्शन के साथ-साथ ब्रजवासियों का जो निश्छल प्रेम मिलता है वो अन्यत्र और कहीं नहीं मिल पाता है। गांव-गांव में स्वागत, प्रसाद आदि देकर ब्रजवासी जो आदर भाव देते हैं उसे देखकर कृष्ण काल की याद आने लगती है।
संध्याकाल के सत्संग में लीलास्थियों का माहात्म्य निरूपण भामिनी शरण महाराज ने किया। यात्रा में प्रमुख रूप से बाबा नृसिंह दास महाराज, राधकांत शास्त्री, सुनील सिंह, राजकुमार गरुण, पुजारी बाबा, माध्वी शरण महाराज, सज्जन दास, भारतभूषण गोस्वामी,भगत जी आदि उपस्थित रहे।