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आगरा जिला कारागार में बंदी ने फांसी लगाकर की आत्महत्या, सुसाइड नोट में लिखी ये बातें

Fri, 06 Dec 2019 12:22 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 06 Dec 2019 12:22 AM IST
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prisoner commits suicide by hanging in Agra district prison
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
आगरा जिला कारागार में बृहस्पतिवार को एक बंदी ने आत्महत्या कर ली। बंदी का शव शौचालय के छज्जे से फंदे से लटका मिला। घटना की जानकारी पर परिजन आ गए। जेल प्रशासन ने पोस्टमार्टम कराने के बाद शव को परिजनों के सुपुर्द कर दिया। मृतक के पास से एक सुसाइड नोट भी मिला है। 
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मथुरा के थाना बल्देव के गांव बल्टीगढ़ी निवासी 45 वर्षीय बल्देव पुत्र पातीराम को थाना खंदौली पुलिस ने 25 नवंबर को गांव उजरई में एक दुकान का ताला काटते हुए पकड़ा गया था। उसके पास से टार्च, कट्टे, आरी आदि सामान बरामद हुआ था। पुलिस ने 26 नवंबर को आरोपी को जेल भेज दिया था।
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जेल प्रशासन के मुताबिक, बल्देव अभी नए बंदियों की नौ नंबर बैरक में रखा गया था। दोपहर तकरीबन एक बजे वो बैरक से बाहर अहाते में आया। आधा घंटे बाद अन्य बंदियों ने उसका शव बैरक के अहाते में बने शौचालय के पीछे छज्जे के होल से गमछा बांधकर बनाए गए फंदे से लटका मिला। 
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परिजनों ने नहीं दी कोई शिकायत

सूचना पर जेल अधीक्षक शशिकांत मिश्र सहित अन्य अधिकारी पहुंच गए। मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में शव को शाम पांच बजे पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। फोरेंसिक टीम भी बुलाई गई। सूचना पर परिजन भी आ गए। पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजन लेकर गांव चले गए। 

मृतक बंदी के परिजनों ने किसी तरह की शिकायत नहीं की है। जेल अधीक्षक शशिकांत मिश्र ने बताया कि बंदी की जेब से सुसाइड नोट मिला। इसमें उसने आत्महत्या की बात लिखी है। किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया है। जांच कराई जा रही है।

'बेटे तुम्हारी गलती से नहीं मिल पाया पेट्रोल पंप'

थाना खंदौली पुलिस के मुताबिक, बल्देव के दो बेटे और एक बेटी है। बड़ा बेटा नेवी में है। वो परिवार से अलग पत्नी के साथ रहता है। वहीं छोटा बेटा पढ़ाई कर रहा है। बल्देव बेटी की शादी की तैयारी में लगा था। 

उन्होंने एक सुसाइड नोट छोड़ा है, जिसमें आत्महत्या की बात लिखी है। लिखा है कि बेटे मुझे तुम्हारी गलती की वजह से पेट्रोल पंप नहीं मिल सका। अब अपने भाई और बहन के साथ मां का ख्याल रखना। मेरी आत्महत्या के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है। मैं अपना जीवन समाप्त कर रहा हूं।

पहले भी कैदी कर चुके हैं आत्महत्या

11 जुलाई 2018 : केंद्रीय कारागार में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदी अशोक (49) का शव जेल अस्पताल के शौचालय में फ्लश से फांसी पर लटका मिला था।
12 सितंबर 2019  : शहीद नगर की एकता कॉलोनी में नकली नोटों का कारखाना चलाने के आरोपी ओमकार झा (22) ने जिला जेल में आत्महत्या कर ली थी। उसका शव जेल अस्पताल के पीछे पेड़ से लटकता मिला था।
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